कलेक्टर की पहली ही जनसुनवाई में महिला ने काटा बवाल, बाबू पर कार्रवाई की मांग
रतलाम कलेक्टर की पहली जनसुनवाई में महिला का हंगामा, कलेक्ट्रेट परिसर में तैनात कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : October 14, 2025 at 7:58 PM IST
रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम में मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में चक्कर लगा लगाकर परेशान हो चुके कई लोगों का सब्र जवाब देने लगा है. अपनी शिकायत लेकर पहुंची एक महिला ने जनसुनवाई कक्ष के बाहर जमकर हंगामा किया. महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार शिकायत करने के बावजूद आरोपी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही है.
टूट रहा सब्र का बांध
रतलाम की नवागत कलेक्टर मिशा सिंह मंगलवार को पहली बार जनसुनवाई करने पहुंची थीं. जहां बड़ी संख्या में आवेदक अपनी समस्या लेकर पहुंचे थे, इस दौरान जनसुनवाई में कई बार आवेदन दे चुकी एक महिला भड़क गई और सभा कक्ष के बाहर खड़ी होकर सुनवाई नहीं किए जाने के आरोप लगाने लगी.
कर्मचारी पर लग रहे गंभीर आरोप
रतलाम के गोस्वामी नगर निवासी एक महिला ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही काम करने वाले एक कर्मचारी द्वारा प्रताड़ित करने जैसे गंभीर मामले की शिकायत करने आई थी. इस मामले में पीड़ित महिला ने पहले भी कई बार शिकायत कर चुकी है, लेकिन अभी तक आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इसलिए शिकायतकर्ता नाराज हो गई.
आरोपी को संरक्षण देने का आरोप
महिला ने आरोप लगाते हुए कहा कि "कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन की ओर से उसे संरक्षण दिया जा रहा है. इस पूरे मामले पर रतलाम शहर एसडीएम आर्ची हरित ने बताया कि "महिला की शिकायत पर पूर्व में ही कार्रवाई की गई थी. उसके आवेदन पर नाम अनुसार जांच कर अग्रिम कार्रवाई भी की जाएगी."
कलेक्टर की पहली जनसुनवाई में उमड़ी भीड़
मंगलवार को नवागत कलेक्टर मिशा सिंह की जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आवेदक पहुंचे. आमतौर पर जनसुनवाई में आवेदनों की संख्या 60 से 70 के बीच रहती है, लेकिन मंगलवार को 80 से अधिक आवेदन जनसुनवाई में पहुंचे हैं. कई लोग नई कलेक्टर के पास अपनी समस्याओं के समाधान होने की उम्मीद में पहुंचे थे.
संबंधित अधिकारी को निर्देश
सुनवाई के दौरान लंबे समय से मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बनने और नामांतरण नहीं किए जाने जैसी शिकायतें कलेक्टर को मिली है. कलेक्टर मिशा सिंह ने आवेदकों की समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को उसका समाधान करने के निर्देश भी दिए है.
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नवागत कलेक्टर के जनसुनवाई में मौजूद आवेदकों को उनकी समस्या का समाधान मिलने की उम्मीद भी बंधी है. वहीं, जनसुनवाई में उमड़ी भीड़ से बड़ा सवाल यह भी खड़ा होता है कि इससे पूर्व जनसुनवाई में क्या अधिकारी आम लोगों की समस्या का समाधान नहीं कर पा रहे थे या जनसुनवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही थी.

