मध्य प्रदेश के 43 निकायों में दूषित पानी की वजह सीवरेज प्रोजेक्ट: पारस सकलेचा
रतलाम में साथ-साथ लगी है सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन, सीवरेज प्रोजेक्ट का गंदा पानी पेयजल को कर रहा दूषित.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 5, 2026 at 7:48 PM IST
रतलाम: दूषित पानी की वजह से इंदौर में हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश के कई नगरीय निकायों में दूषित पानी की समस्या का समाधान करने को लेकर प्रशासन जुटा हुआ है. रतलाम शहर में जगह-जगह पेयजल पाइपलाइन लीकेज होने और गंदा पानी आने की समस्या की शिकायत मिलने के बाद नगर निगम की टीमों के पसीने छूट रहे हैं. क्योंकि मध्य प्रदेश शासन के अल्टीमेटम के अनुसार 48 घंटे में समस्या का समाधान करना है, जो संभव ही नहीं है.
व्हिसल ब्लोर ने सीवरेज प्रोजेक्ट को बताया फेल
रतलाम में एक नहीं कई जगह पर पेयजल पाइपलाइन और सीवरेज प्रोजेक्ट की पाइपलाइन को साथ-साथ डाला गया है. इस मामले को सीवरेज घोटाला मामले के व्हिसल ब्लोअर पारस सकलेचा ने उठाया है. पारस सकलेचा का कहना है कि "मध्य प्रदेश के 43 नगरीय निकायों में दूषित पानी की वजह, फेल हो चुके सीवरेज प्रोजेक्ट है. जिम्मेदार अधिकारी पेय पाइपलाइन के लीकेज को ठीक करने में जुटे हुए हैं, जबकि समस्या का कारण सीवरेज प्रोजेक्ट है. जिनसे निकल रहा दूषित पानी पेयजल पाइप लाइन में मिल रहा है.
सीवरेज प्रोजेक्ट के ठेकेदार को बचाने का आरोप
रतलाम के चांदनी चौक, अशोक नगर, अलकापुरी, आईटीआई, जवाहर नगर और करीब एक दर्जन इलाकों में पेयजल पाइपलाइन का लीकेज ठीक करने के लिए जब खुदाई की गई, तो सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन की लाइन साथ-साथ में ही मिली है. वहीं, सीवरेज मामले को उठाने वाले पारस सकलेचा ने कहा कि "सरकार समस्या का समाधान करने की बजाय सीवरेज प्रोजेक्ट के ठेकेदारों को बचाने का काम कर रही है.
अन्य शहरों में भी ऐसी घटनाओं की आशंका
उन्होंने बताया कि "इंदौर और रतलाम ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश के 43 नगरीय निकायों में सीवरेज प्रोजेक्ट का फेल मॉडल अपनाया गया है. जिसमें सीवरेज लाइनों को कच्चे चेम्बर बनाकर जहां चाहा वहां पानी की लाइन के साथ गाड़ दिया गया. अधिकांश पेयजल पाइपलाइन 30 वर्ष पुरानी है. ऐसे में उनमें लीकेज होना स्वाभाविक है. लेकिन 4 साल पहले ही इंस्टॉल की गई सीवरेज लाइन से हो रहा रिसाव जगह-जगह पीने की पाइपलाइन में जा रहा है. जिससे अन्य शहरों में भी ऐसी घटनाएं हो सकती है."

ठेकेदार से सीवरेज ठीक कराने की दी नसीहत
पारस सकलेचा ने बताया कि "अमृत मिशन एक में 20 शहरों में 24 परियोजनाएं शुरू की गई थी. जिसकी लागत कुल 4086.22 करोड़ है. जिसमें बड़े शहरों इंदौर ,भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर ,उज्जैन सहित मुरैना, सतना, सागर, रतलाम, रीवा, कटनी, सिंगरौली, बुरहानपुर, भिंड, गुना, विदिशा, खरगोन, नीमच, सीहोर और दतिया शामिल है. वहीं, 43 शहरों में 2017 से सीवरेज का कार्य शुरू हुआ. जिसमें अधिकांश में योजना 2019 के स्थान पर 2024 में जाकर पूरी हुई. कुछ शहरों में अभी भी काम चल रहा है, जिसमें उज्जैन शामिल है. मध्य प्रदेश शासन को सीवरेज प्रोजेक्ट ठेकेदारों से सीवरेज लाइन ठीक करवाना चाहिए. क्योंकि यह अब भी 5 साल के डेमेज मेंटेनेंस में है."

- इंदौर में दूषित पानी से मौतों की सॉलिड वजह अब आई सामने, सरकार ने किया कन्फर्म
- इंदौर में दूषित पानी का शिकार 2 बच्चों को हैजा, डायरिया के 20 मामले आए सामने
'पेयजल पाइपलाइन सुधार रहा नगर निगम'
रतलाम नगर निगम के जल प्रदाय विभाग के सुहास पंडित ने बताया कि "शासन के निर्देश के अनुसार जहां भी पाइपलाइन लीकेज की जानकारी मिल रही है, वहां पहुंचकर पेयजल पाइपलाइन का लीकेज सुधारा जा रहा है." वहीं, पानी की पाइपलाइन पर सीवरेज लाइन निकलने के मामले पर निगम के अधिकारियों ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

