ETV Bharat / state

रतलाम के तालों का नहीं कोई तोड़, डुप्लीकेट चाबी फेल, बड़ी-बड़ी दौलत की सुरक्षा करते हैंडमेड लॉक

महल से लेकर सोने-चांदी की दुकानों की सुरक्षा करते हैं रतलाम के हैंडमेड ताले, ताला और तिजोरी बनाने की 200 साल पुरानी विरासत.

RATLAM HAND MADE LOCKS STRONG
रतलाम के तालों का नहीं कोई तोड़ (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 8, 2026 at 8:45 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

रतलाम: तालों की बात आए तो देशभर में मशहूर अलीगढ़ के तालों का जिक्र जरूर होता है, लेकिन अलीगढ़ के इन तालों को टक्कर दे रहे हैं रतलाम में बने ताले और तिजोरी. जो रतलाम में ही हाथों से बनाए जाते हैं. जी हां रतलाम से सोना और साड़ी ही मशहूर नहीं है, बल्कि यहां के हाथों से बने ताले भी बड़ी डिमांड में है. लोग यहां ऑर्डर देकर हाथ से बने ताले और तिजोरी बनवाते हैं. रतलाम का सेवाराम एंड संस परिवार की छठी पीढ़ी तालों और तिजोरी की इस विरासत को संभाले हुए हैं.

रियासत काल से राजमहल तालों से लेकर रतलाम के सर्राफा व्यापारियों की करोड़ों की दौलत की सुरक्षा इन्हीं के हाथों से बनाए गए तालों के हवाले है. आइए जानते हैं सेवाराम एंड संस के तालों की खासियत और कहानी.

रतलाम के हाथों से बने तालों की डिमांड (ETV Bharat)

200 साल पहले हुई अपनी ही चाबी से खुलने वाले ताले बनाने की शुरुआत

रतलाम राजमहल के पिछले वाले हिस्से में शीतला माता की गली में स्थित ताले और तिजोरी बनाने का यह कारखाना पांचाल परिवार की 6वीं पीढ़ी संभाल रही है. पांचवीं पीढ़ी के विनय पांचाल और युवराज पांचाल अपने पुरखों के द्वारा दिए गए हुनर और धंधे को आगे बढ़ा रहे हैं. विनय पांचाल बताते हैं कि उनके परदादा शोभाराम राजमिस्त्री हुआ करते थे. रियासत काल में राजमहल के ताले और तिजोरी उनके और उनके बेटे सेवाराम द्वारा ही बनाए जाते थे.

RATLAM STRONG LOCKS
रतलाम महाराजा द्वारा दिया गया प्रशस्ति पत्र (ETV Bharat)

रतलाम के सर्राफा व्यापारी, बड़े व्यापारियों के घर और दुकान के ताले और तिजोरी भी उन्हीं के हाथों से बनाए जाते थे. युवराज पांचाल बताते हैं कि "इन तालों और तिजोरियों की खासियत यह थी कि यह केवल अपनी ही चाबी से खुलते थे. इसके अलावा इन्हें खोलना लगभग असंभव है. वहीं, इनकी चाबी की डुप्लीकेट चाबी नहीं बनाई जा सकती है."

RATLAM LOCKS DEMAND
रतलाम के ताले (ETV Bharat)

मशीन से नहीं हाथ से बनाए जाते हैं यह मजबूत ताले

कारखाने के संचालक विनय पांचाल और युवराज पांचाल ने बताया कि "हाथों से ताले और तिजोरी बनाने का हुनर उन्हें विरासत में मिला है. एक अच्छे और मजबूत ताले को बनाने में 5 से 7 दिन लग जाते हैं. पहले ताले का मेकैनिज्म तैयार किया जाता है. जिसके बाद चाबी और फिर उसे मजबूत स्टील की प्लेटों के बीच फिट किया जाता है. यह सब काम हाथों से ही किया जाता है. यह कारीगर कटिंग और वेल्डिंग के लिए साधारण मशीन का उपयोग जरूर करते हैं.

युवराज पांचाल ने बताया कि इनकी मजबूती और किसी और चाबी से नहीं खुलने की खासियत इन्हें यूनिक बनाती है. रतलाम के सराफा बाजार के अधिकांश व्यापारी उन्हीं के कारखाने में बने ताले और तिजोरी इस्तेमाल करते हैं. व्यापारियों की दुकान और तिजोरी की सुरक्षा का यह विश्वास पांच पीढ़ियों से चला आ रहा है." सर्राफा व्यापारी अशोक राजेश मूणत बताते हैं कि "5 पीढ़ियों से सेवाराम एंड संस की बनी तिजोरी और तालों का इस्तेमाल कर रहे हैं. व्यापारियों को इनकी कारीगरी पर भरोसा है. इनके बनाए ताले किसी और चाबी से नहीं खुलते हैं और ना ही आसानी से तोड़े जा सकते हैं."

RATLAM SEVARAM SONS MAKE LOCKS
सेवाराम एंड संस की ताले की विरासत (ETV Bharat)

सूरत, मुंबई, जयपुर और पाकिस्तान के कराची भी गए इनके बनाए ताले

पांचाल परिवार की छठी पीढ़ी के ध्रुव पांचाल भी अपने पुरखों की इस विरासत को संभालने के लिए तैयार हैं. वह आधुनिक तकनीक के तिजोरी, डोर लॉक, चैनल लॉक, सामान्य लॉक भी बनाने का कार्य करते हैं. ध्रुव ने बताया कि "उन्हें बड़े शहरों के व्यापारियों से भी तले और तिजोरी बनाने का आर्डर मिलते हैं. जयपुर, सूरत और मुंबई के बड़े सर्राफा और हीरा व्यापारी भी उन्हें आर्डर देते हैं. उनके दादाजी के हाथ के बने ताले तो पाकिस्तान के कराची शहर तक भी डिमांड में थे."

RATLAM HAND MADE LOCKS STRONG
असली चाबी से खुलते ताले (ETV Bharat)

बेशक तालों के लिए अलीगढ़ मशहूर है, लेकिन रतलाम के हाथों की कारीगरी से बनाए गए ताले आज भी आधुनिक दौर में बन रहे तालों को भरोसे के मामले में कड़ी टक्कर दे रहे हैं. यही वजह है कि राजशाही के दौर से लेकर वर्तमान में रतलाम के प्रसिद्ध सराफा बाजार के व्यापारियों की धन दौलत की सुरक्षा सेवाराम एंड संस के बने तालों के ही हवाले हैं.