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प्री-मानसून में कर दी सोयाबीन की बुवाई, कृषि एक्सपर्ट की सलाह से उड़ी किसानों की हवाइयां

रतलाम ग्रामीण के दंतोडिया और सिमलावदा में सैकड़ों किसानों ने समय से पूर्व कर दी सोयाबीन की बुवाई. कृषि अधिकारी बोले- यह अनुकूल समय नहीं.

Ratlam Farmers sowed soybean
किसानों ने बेमौसम कर दी सोयाबीन की बुवाई (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : June 11, 2026 at 5:29 PM IST

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Updated : June 11, 2026 at 7:15 PM IST

4 Min Read
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रतलाम: पश्चिम मध्य प्रदेश में प्री-मानसून एक्टिविटी शुरू हो चुकी है और इस दौरान हुई बारिश में कुछ किसानों ने सोयाबीन की बेमौसम बुवाई कर दी है. उनमें से कई किसानों की बोई गई फसल खराब भी हो गई है. कृषि विभाग के अधिकारी और कृषि वैज्ञानिक इसे किसानों के लिए बड़ा नुकसानदायक बता रहे हैं.

किसान खेत में कम नमी होने और अनुकूल स्थिति नहीं होने पर भी बुवाई कर देते हैं, जिससे उनके महंगे दामों पर खरीदा हुआ सोयाबीन का बीज खराब हो जाता है. किसानों द्वारा की जा रही इस जल्दबाजी पर कृषि विभाग के अधिकारियों ने अपील जारी कर किसानों से ऐसा नहीं करने की सलाह दी है.

आरके सिंह जिला कृषि अधिकारी रतलाम (ETV Bharat)

कृषि अधिकारियों ने कहा, पर्याप्त बारिश होने पर ही करे सोयाबीन की बुवाई

कृषि अधिकारियों ने बताया कि पर्याप्त बारिश होने और तापमान कम हो जाने पर ही किसान सोयाबीन की बुवाई करें. अभी सोयाबीन की बुवाई का अनुकूल समय नहीं आया है. इसलिए किसान ऐसा बिल्कुल ना करें जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़े. दरअसल रतलाम ग्रामीण के दंतोडिया, सिमलावदा और इटावा माताजी गांव में सैकड़ों किसानों ने इस वर्ष भी समय से पूर्व ही सोयाबीन की बुवाई कर दी है.

Ratlam Farmers sowed soybean
किसानों ने बेमौसम कर दी सोयाबीन की बुवाई (ETV Bharat)

वहीं किसानों को देखकर कई अन्य किस भी जल्दबाजी में सोयाबीन की बुवाई कर बैठे हैं. जिसके चलते कुछ किसानों के खेतों में सोयाबीन उगा ही नहीं है. वहीं, मानसून के पूर्व पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से अंकुरित हुए सोयाबीन के पौधे भी नष्ट हो रहे हैं. जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह किसानों से जल्दबाजी में सोयाबीन की बुवाई नहीं करने की अपील की है.

सोयाबीन को लेकर क्या है कृषि विभाग की सलाह

कृषि अधिकारी एवं वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किसानों को खेत में पर्याप्त नमी हो जाने के बाद ही सोयाबीन सहित अन्य खरीफ की फसलों की बुवाई करना चाहिए. जिला कृषि अधिकारी आरके सिंह ने बताया "प्री मानसून की बारिश में कई बार मूसलाधार बारिश हो जाती है. जिससे किसानों को लगता है कि अच्छी बरसात हो गई है लेकिन खेत में नीचे की सतह सूखी ही रहती है. किसान 15 जून के बाद 4 इंच बारिश हो जाने पर ही खरीफ की फसलों की बुवाई करें. सोयाबीन और खरीफ की फसलों की बुवाई का सही समय 15 जून से लेकर 5 जुलाई तक का होता है. क्योंकि बारिश की वजह से खेतों में पर्याप्त नमी भले ही हो लेकिन तापमान फसलों के अंकुरण के लिए अनुकूल नहीं है."

सोयाबीन की बुवाई के लिए 25 से 35 डिग्री का तापमान होता है अनुकूल

कृषि अधिकारी ने बताया कि किसान महंगे दाम पर खरीदे गए बीज को सड़ने से बचाने के लिए खेत पर पहुंच कर नमी का परीक्षण स्वयं कर सकते हैं. खेत के अलग-अलग हिस्सों में गड्ढा खोदकर चार से पांच इंच तक मिट्टी की नमी चेक की जा सकती है. खेत में नंगे पैर चलने पर यदि पैर गड़ने लगे तो भी बुवाई के लिए खेत तैयार होना माना जाता है. इसके अलावा अपने क्षेत्र में हुई बारिश का आंकड़ा और वर्तमान में दिन और रात का तापमान कितना चल रहा है इसका भी ध्यान रखें. सोयाबीन की बुवाई के लिए 25 से 35 डिग्री का तापमान अनुकूल होता है. इससे अधिक तापमान होने पर सोयाबीन का अंकुरण सही तरीके से नहीं होता है.

बहरहाल मध्य प्रदेश में खरीफ की फसल की बुवाई के लिए 15 दिन का समय बाकी है. ऐसे में किसान जल्दबाजी कर अपना ही नुकसान कर रहे हैं. बोई गई फसल खराब हो जाने पर किसान को दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ेगा.

Last Updated : June 11, 2026 at 7:15 PM IST