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रतलाम के 5K की गजब स्टोरी, क्या कम हो जाएगा 1K, 7 साल से नहीं लौटे खरमोर पक्षी

रतलाम के सैलाना में टूरिस्टों के बीच मशहूर 5K खो रहा पहचान, सैलानियों का खरमोर अभ्यारण से भंग हुआ मोह, खरमोर के इंतजार में पर्यटक.

RATLAM KHARMORE SANCTUARY vacate
रतलाम के टूरिस्ट प्लेस 5K की गजब स्टोरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 6, 2026 at 8:41 PM IST

4 Min Read
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रतलाम: सैलाना में 'K' नाम से मशहूर 5 जगह और चीजें प्रदेश सहित देशभर में मशहूर हैं. इन्हें टूरिस्ट 5K के नाम से भी जानते हैं. इनमें कैक्टस गार्डन, कीर्ति स्तंभ, केदारेश्वर झरने, बालम ककड़ी और खरमोर अभयारण्य शामिल है. सैलाना के इन्हीं फेमस जगहों के नामों के फस्ट लेटर से बनकर तैयार हुआ 5k नाम पर्यटकों के बीच सैलाना को अलग की पहचान दिलाता है. लेकिन कुछ समय से ये 5K अपनी विरासत खोने की या कहें टूटने की कगार पर है.

खरमोर विहीन हुआ अभ्यारण

इसका कारण यह है कि सैलानियों का इस 5K में से एक K यानी खरमोर से मोहभंग होते जा रहा है. पिछले करीब 7 सालों से खरमोर अभ्यारण में पर्यटक बहुत कम संख्या में पहुंच रहे हैं. इसके पीछे की वजह जानकार पर्यावरणविद मोहम्मद असलम बताते हैं कि "अभ्यारण में अब खरमोर नामक पक्षी दिखाई नहीं देता है. इस खास प्रजाति के पक्षी को देखने के लिए ही लोगों की भीड़ जुटती थी. साल 2018 में आखिरी बार खरमोर पक्षी अभ्यारण में दिखाई दिए थे. करीब 1296 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला अभयारण्य क्षेत्र अब खरमोर विहीन हो गया है. इसका मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण, घटते घास के मैदान, अभयारण्य के आसपास लगी पवन चक्की और वन विभाग की उदासीनता है."

7 साल से नहीं लौटे खरमोर पक्षी (ETV Bharat)

बहुत शर्मिला होता है ये पक्षी

मोहम्मद असलम कहते हैं, "खरमोर यानी लेसर फ्लोरीकन बस्टर्ड प्रजाति का एक पक्षी है, जो घास के मैदानों में रहना पसंद करता है. यह दक्षिण भारत से लेकर गुजरात, मध्य प्रदेश के रतलाम और धार में प्रजनन के लिए वर्षा काल के दौरान पहुंचता है. धार के सरदारपुर और रतलाम के सैलाना में खरमोर अभयारण्य स्थित है, जहां यह पक्षी बारिश के मौसम में देखे जाते थे. जंगली मुर्गी और मोर की तरह दिखाई देने वाले इस पक्षी को खरमोर के नाम से जाना जाता है. इस पक्षी की खासियत है कि मादा पक्षी को रिझाने के लिए नर पक्षी पंख फैलाकर एक ही जगह पर छलांग लगाता है. ये पक्षी शांत और एकांत वातावरण में रहना पसंद करते हैं."

ratlam famous bird kharmor
पवन चक्की प्रोजेक्ट की वजह से नहीं आ रहे पक्षी (ETV Bharat)

प्रजनन के लिए नहीं आ रहे खरमोर

स्थानीय निवासी धर्मेंद्र मालवीय ने बताया, "रतलाम के सैलाना, आंबा और शेरपुर क्षेत्र में खरमोर पक्षी के प्रवास के लिए अभ्यारण्य बने हुए थे. ये अभ्यारण शासकीय और निजी भूमि पर बने थे, जिनमें बड़ी संख्या में खरमोर पक्षी रहते थे, लेकिन वर्तमान में अब ये अभ्यारण पक्षी विहीन हो गए है. इसका सबसे बड़ा कारण साल 2023 में निजी जमीन को अभयारण्य क्षेत्र से बाहर किए जाने का नोटिफिकेशन जारी किया जाना है. वहीं 2015-16 के बाद लगातार इस क्षेत्र में पवन चक्की प्रोजेक्ट लगा है. पवनचक्की लगने से इलाके में घास के मैदान की कमी हो गई और अभयारण्य के आसपास खेती की गतिविधियां बढ़ने से ये दुर्लभ प्रजाति के पक्षी अब यहां प्रजनन के लिए नहीं आ रहे हैं."

Ratlam famous tourist spot
खरमोर पक्षी विहीन हुआ अभ्यारण (ETV Bharat)

गतिविधियां बढ़ने से पक्षियों का मोहभंग

खरमोर अभ्यारण में लंबे समय तक कार्य कर चुके डिप्टी रेंजर कमल सिंह देवड़ा ने बताया, "वर्ष 2015 में 24 खरमोर दिखाई दिए थे. 2016 में यह संख्या 17 हुई, 2017 में 4 और 2018 में आखिरी बार 5 खरमोर नजर आए थे. इसके बाद से खरमोर पक्षी आना ही बंद हो गए." फॉरेस्ट अधिकारी की माने तो मानवीय हस्तक्षेप, पवन चक्की प्रोजेक्ट और घास के मैदानों में बढ़ती नील गायों की संख्या की वजह से ये दुर्लभ प्रजाति के पक्षी इस क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं. जबकि यहां घास के मैदान और अनुकूल वातावरण अब भी मौजूद है."