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गुजराती-मराठी वस्त्र में सजेंगे बाबा विश्वनाथ; मां गौरा धारण करेंगी कांजीवरम् साड़ी

नंदलाल अरोड़ा बताते हैं कि उनकी पांच पीढ़ियां सेवा में लगी हैं. बाबा की सेवा का अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

काशी में बाबा विश्वनाथ-मां गौरा का गौना.
काशी में बाबा विश्वनाथ-मां गौरा का गौना. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : February 27, 2026 at 10:00 AM IST

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वाराणसी: काशी में बाबा विश्वनाथ के गौने की धूम है. हर कोई अपने तरीके से इस उत्सव में शामिल हो रहा है. इस खास मौके पर बाबा का विशेष श्रृंगार भी किया जाता है. उनको राजसी परिधान धारण कराया जाता है. बाबा के राजसी श्रृंगार का परिधान काशी के कारीगरों के जरिए ही तैयार किया जाता है.

यहां कई ऐसे परिवार है जो बाबा की सेवा में लीन हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी बाबा के लिए विशेष परिधान, विशेष भोग, विशेष टोपी तैयार कर रहे हैं. इस बार भी इन परिवारों ने बाबा के लिए विशेष श्रृंगार तैयार किया है.

बाबा विश्वनाथ जहां गुजरात और राजस्थान के परिधान में नजर आएंगे. मराठी देव किरीट उनके मस्तक पर विराजमान होगा. वहीं, मां गौरा कांजीवरम् साड़ी में भक्तों को दर्शन देंगी.

काशी में रंगभरी एकादशी की धूम.
काशी में रंगभरी एकादशी की धूम. (Photo Credit: ETV Bharat)

काशी में तैयार होते हैं वस्त्र: रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का श्रृंगार किया जाता है. बाबा को खास वस्त्र पहनाया जाता है. यह वस्त्र देश के अलग-अलग हिस्सों से आते हैं, जिन्हें काशी के अलग- अलग कारीगरों के जरिए सजाया जाता है. इन पर जार जरदोजी का काम किया जाता है.

काशी में नंदलाल अरोड़ा का परिवार इन्हीं में से एक है. इनकी कई पीढ़ियां बाबा विश्वनाथ की सेवा में लगी रही हैं. परिवार बाबा के लिए राजसी परिधान के साथ विशेष टोपी तैयार करते हैं. इस बार भी उन्होंने बाबा विश्वनाथ के लिए मराठी देव किरीट को तैयार किया है.

नंदलाल अरोड़ा बताते हैं कि उनकी पांच पीढ़ियां बाबा की सेवा में लगी हुई हैं. बाबा की सेवा का अनुभव शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. वह कहते हैं कि हम लोग एक महीने पहले से ही बाबा की परिधान और टोपी की तैयारी में लग जाते हैं. इसमें तीन से चार कारीगर लगते हैं. हर बार बाबा के लिए अलग-अलग तरीके का वस्त्र तैयार किया जाता है.

उन्होंने बताया कि यह इतने अनोखे होते हैं कि उनकी कोई दूसरी कॉपी नहीं होती है. इस बार वह बाबा के लिए गुजराती और राजस्थान के वस्त्र को तैयार कर रहे हैं. इस पर उन्होंने जरी जरदोजी का काम किया है. वह बताते हैं कि यह वस्त्र देश के अलग-अलग हिस्सों से काशी पहुंचता है. इसके बाद वह इस पर खास जरदोजी का काम करते हैं.

काशी के कारीगर बनाते हैं विशेष वस्त्र.
काशी के कारीगर बनाते हैं विशेष वस्त्र. (Photo Credit: ETV Bharat)

यह होगी बाबा की वेषभूषा: गुजराती वस्त्र और मराठी देव किरीट में सजेंगे बाबा, कांजीवरम पहनेंगी गौरा: उन्होंने बताया कि बाबा के लिए तैयार देवकिरीट में सुनहरी रेशम जरी स्टोन का काम किया गया है. इस पर सफेद पंख लगाए गए हैं, जो इसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रहे हैं.

वहीं, बाबा की सेवा करने वाले पंडित भानु मिश्र कहते हैं कि हर वर्ष रंग भरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ का श्रृंगार किया जाता है. जिसमें बाबा को अलग-अलग तरीके की वेशभूषा धारण कराया जाता है.

उन्होंने कहा कि बाबा के श्रृंगार में जिन सामानों का प्रयोग किया जाता है, वह देश के अलग-अलग हिस्सों से आता है. इसमें काशी के लोगों की अपनी अलग सहभागिता होती है. हर साल बाबा के लिए अलग-अलग प्रकार के वस्त्र तैयार किए जाते हैं, जिसे काशी के कारीगर सजाते हैं.

इस बार गुजरात और राजस्थानी संस्कृति और वस्त्र की झलक दिखाई देगी, जिसमें बाबा का श्रृंगार होगा. वही मां गौरा कांजीवरम् साड़ी को धारण करेंगी.

बाबा के लिए विशेष पान: उन्होंने बताया कि यदि बाबा के श्रृंगार भोग की बात करें तो काशी के लोग बाबा को रंगभरी एकादशी के दिन अपना जमाता मानकर उस प्रकार उनका आवभगत करते हैं, तैयारी करते हैं.

इसमें बाबा के लिए वस्त्र, आभूषण और टोपी के साथ उनका प्रिय पान भी अर्पित किया जाता है. इस पान को लगाने का काम बनारस की गलियों में मौजूद एक परिवार बीते 350 सालों से कर रहा है. उन्होंने बताया कि वह हर वर्ष बाबा के लिए खास पान तैयार करते हैं, जो बाबा को समर्पित किया जाता है. उनकी कई पीढ़ियां बाबा की सेवा में लीन है.

बाबा विश्वनाथ की विशेष टोपी.
बाबा विश्वनाथ की विशेष टोपी. (Photo Credit: ETV Bharat)

रंगभरी से उत्सव की शुरुआत: रंगभरी एकादशी यानि आज के दिन बाबा विश्वनाथ, मां गौरा का गौना कराने ससुराल आते हैं. इस दौरान काशीवासी बाबा को रंग गुलाल अर्पित कर उनके ससुराल में उनका स्वागत करते हैं. इसी दिन से काशी में होली के उत्सव की शुरुआत मानी जाती है.

खास बात यह है कि यह उत्सव को हर कोई अपने अंदाज में मनाता है. इसके गवाह काशी के लोग बनते हैं, जो बाबा के लिए इस खास दिन पर उनके श्रृंगार के लिए वस्त्र, टोपी और मां गौरा के लिए वस्त्र तैयार करते हैं.

बाबा का श्रृंगार टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास में किया जाता है. वहां से बाबा की चल प्रतिमा नगर भ्रमण के लिए निकलती है. बाबा विश्वनाथ के गर्भगृह में स्थापित होती है और काशीवासी इस उत्सव को मनाते हैं.

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