"गेहूं-सरसों खरीद पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग", रणदीप सुरजेवाला बोले- "किसानों को रुला रही सरकार"
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गेहूं-सरसों खरीद मुद्दे पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है.

Published : April 23, 2026 at 8:01 PM IST
|Updated : April 23, 2026 at 8:09 PM IST
जींद : कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि "प्रदेश में खेती-किसानी व्यवस्था गंभीर संकट में है और मंडी सिस्टम को खत्म करने की साजिश के तहत जानबूझकर फसल खरीद में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं. उन्होंने गेहूं और सरसों की खरीद में गड़बड़ी और कथित बेईमानी के मुद्दे पर हरियाणा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की. साथ ही मुख्यमंत्री नायब सैनी से इस मामले में जिम्मेदारी तय करने और किसान, आढ़ती और मजदूरों के लिए विशेष राहत पैकेज देने की मांग रखी. रणदीप सुरजेवाला जींद की नई अनाज मंडी का दौरा करने के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे."
"किसानों को रुला रही सरकार": सुरजेवाला ने कहा कि "भाजपा सरकार 24 फसलों पर एमएसपी खरीद के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि किसानों को अपनी गेहूं की फसल बेचने और भुगतान लेने के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की “खेती विरोधी नीतियों” के कारण किसानों का पीला सोना अब उनके लिए मुसीबत बन गया है और डबल इंजन सरकार किसानों को खरीदी, उठान और भुगतान के नाम पर रुला रही है."
हमारी मांग है कि हरियाणा में गेहूँ-सरसों खरीदी में गड़बड़झाले व बेईमानी को लेकर विधान सभा के विशेष सत्र में एक दिन की चर्चा हो – श्री नायब सैनी जिम्मेवारी लें और किसान-आढ़ती-मजदूर को विशेष राहत पैकेज मिले। pic.twitter.com/e3TlDuEVJ8
— Randeep Singh Surjewala (@rssurjewala) April 23, 2026
खरीदी को लेकर उठाए सवाल : उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि "हरियाणा की मंडियों में अब तक 80 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं की आवक हो चुकी है, लेकिन केवल 55.81 लाख मीट्रिक टन की ही खरीद हुई है. लगभग 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं अभी भी बिना खरीदी के पड़ा है. खरीदी गई फसल में भी उठान की स्थिति बेहद खराब है और मात्र 26.63 लाख मीट्रिक टन गेहूं ही उठाया जा सका है. करीब 70 प्रतिशत गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है जिससे खराब होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने बताया कि प्रदेशभर में 7.70 लाख किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंचे, लेकिन केवल 4.62 लाख किसानों की ही फसल खरीदी गई, जबकि 3.08 लाख किसान अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं और मंडियों में परेशान हो रहे हैं."
📍प्रेस वार्ता, उचाना (जींद) हरियाणा
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24 फसलों की MSP पर खरीदी का “झूठ का गाल बजाने” वाली भाजपा हरियाणा में किसानों को गेहूँ की फसल की खरीदी और भुगतान में भी रुला रही है।
किसान, मजदूर और आढ़ती अब भाजपा सरकार की इस ठगी और बदइंतजामी से तंग आ चुके हैं।
नायब सैनी सरकार को… pic.twitter.com/as3OleSB9D
"मंडी में परेशान हो रहे किसान": जींद जिले के हालात को और गंभीर बताते हुए उन्होंने कहा कि "22 अप्रैल तक 8.51 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई, जिसमें से केवल 6.6 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो पाई है. करीब 2.45 लाख मीट्रिक टन गेहूं अब भी खरीद के इंतजार में है, जबकि उठान मात्र 1.6 लाख मीट्रिक टन हुआ है. बड़ी मात्रा में फसल खुले में पड़ी है, जिससे नुकसान की आशंका बनी हुई है. सुरजेवाला ने बायोमेट्रिक, सर्वर और ट्रैक्टर नंबर जैसी अनिवार्य शर्तों को “तानाशाही” करार देते हुए कहा कि इससे किसानों को मंडियों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है."
नायब सैनी सरकार की फसल न खरीदने की मंशा तभी नजर आ गई थी, जब उन्होंने बायो-मेट्रिक, सर्वर, ट्रैक्टर नंबर आदि अनिवार्य करने का तानाशाही फरमान सुनाया।
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• जब किसान फसल लेकर मंडी में बेचने आता है तो गैरकानूनी तरीके से भाजपा सरकार द्वारा पोर्टल का ये जंजाल क्यों किया गया है?… pic.twitter.com/0uNtxgmLcT
"तिरपाल का भी इंतजाम नहीं किया गया" : उन्होंने सवाल उठाया कि "सर्वर डाउन रहने और तकनीकी खामियों के चलते किसानों को फसल बेचने में बाधा आ रही है. आढ़तियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने उनकी आय पर चोट पहुंचाई है. कांग्रेस सरकार के समय 2.5 प्रतिशत आढ़ती को मिलते थी जिसे घटाकर पहले ₹45.88 प्रति क्विंटल किया गया, फिर चुनाव से पहले बढ़ाया गया और बाद में फिर कम कर दिया गया. अब ₹50.75 प्रति क्विंटल किया गया है, जो पर्याप्त नहीं है. साथ ही आढ़तियों को समय पर भुगतान भी नहीं मिल रहा और उन्हें मजदूरों की मजदूरी तक अपनी जेब से देनी पड़ रही है. उन्होंने सरकार की तैयारियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि समय रहते गोदामों की व्यवस्था नहीं की गई और न ही बेमौसमी बारिश के दौरान किसानों की फसल बचाने के लिए तिरपाल उपलब्ध कराए गए."
भाजपा सरकार फसल खरीद की महत्वपूर्ण कड़ी आढ़तियों से भी विश्वासघात कर रही है।
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कांग्रेस सरकार में आढ़तियों को 2.5% आढ़त देने का प्रावधान था। भाजपा सरकार ने इसे घटाकर ₹45.88 प्रति क्विंटल कर दिया। चुनाव से पहले ₹55 प्रति क्विंटल किया, चुनाव के बाद फिर घटाकर ₹45.88 प्रति क्विंटल… pic.twitter.com/SQ7KvQIMLD
"बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है": सुरजेवाला ने आगे कहा कि " 72 घंटे में भुगतान के दावे के बावजूद किसानों को समय पर पैसा नहीं मिल रहा है. सुरजेवाला ने मांग करते हुए कहा कि तुरंत सर्वर और पोर्टल की समस्याएं दूर की जाए, बिना किसी अड़चन के फसल खरीद शुरू की जाए. किसानों को समय पर भुगतान दिया जाए, आढ़तियों को 2.5 प्रतिशत आढ़त बहाल की जाए, मंडी मजदूरों की मजदूरी बढ़ाई जाए और खराब फसल का उचित मुआवजा दिया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि किसान, मजदूर और आढ़ती अब सरकार की नीतियों से तंग आ चुके हैं और यदि हालात नहीं सुधरे तो प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है."
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