Modern Technology के दौर में बदल रही पढ़ाई की सूरत, रांची यूनिवर्सिटी में टीचर्स को AI के इस्तेमाल के लिए किया जा रहा तैयार
रांची विश्वविद्यालय में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत शिक्षकों को AI के बारे में बताया गया. चंदन भट्टाचार्य की रिपोर्ट.

Published : August 21, 2026 at 2:30 PM IST
रांची: क्लास में अब सिर्फ किताब, ब्लैकबोर्ड और नोट्स तक सीमित रहना संभव नहीं है. जिस पीढ़ी के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट तकनीक के बीच सीख रहे हैं, उनके शिक्षकों को भी उसी तकनीकी दुनिया के साथ कदम मिलाना होगा. इसी विचार के साथ झारखंड के विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को आधुनिक तकनीक और AI के इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा रहा है.
AI के जरिए पाठ्य सामग्री विद्यार्थियों की जरूरत
रांची विश्वविद्यालय में NCERT नई दिल्ली और केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान (CIET) के सहयोग से चल रहे फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में शिक्षकों को यह समझाया जा रहा है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल ऑनलाइन पढ़ाने तक सीमित नहीं है. AI के जरिए पाठ्य सामग्री को विद्यार्थियों की जरूरत के मुताबिक, तैयार किया जा सकता है, सीखने की प्रक्रिया को अधिक रोचक बनाया जा सकता है और कक्षा में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाई जा सकती है.
शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ चलना होगा कदम से कदम मिलाकर
कार्यक्रम में भुवनेश्वर से पहुंचे विशेषज्ञ ने कहा कि आज AI का जमाना है. ऐसे में बच्चों को तकनीक से पीछे नहीं रखा जा सकता. शिक्षकों को भी विद्यार्थियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना होगा. उन्होंने कहा कि AI को लेकर शिक्षकों में समझ विकसित करना जरूरी है ताकि वे इसके सही और जिम्मेदार इस्तेमाल के जरिए विद्यार्थियों को बेहतर तरीके से तैयार कर सके.
शिक्षण पद्धति में AI की उपयोगिता
प्रशिक्षण में शामिल शिक्षकों का अनुभव भी इसी बदलाव की ओर इशारा करता है. एक शिक्षिका ने कहा कि बच्चे Gen Z के जमाने के हैं, इसलिए शिक्षकों को भी उनके साथ चलना होगा. कम से कम कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए AI और आधुनिक तकनीक की जानकारी जरूरी है. शिक्षकों का कहना है कि विद्यार्थी, तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं, ऐसे में शिक्षण पद्धति में भी बदलाव जरूरी है.

AI की मदद से ई-कंटेंट तैयार करना
कार्यक्रम में AI-Integrated Experiential Learning, Prompt Engineering, Learning Management System (LMS), Instructional Design, Media Research और ICT Tools जैसे विषयों को शामिल किया गया है. एक्सपर्ट, शिक्षकों को बता रहे हैं कि AI की मदद से ई-कंटेंट तैयार करने, पाठ्य सामग्री को व्यवस्थित करने, विद्यार्थियों की सीखने की जरूरतों को समझने और शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है.
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार
इस पहल का व्यापक उद्देश्य नई शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है. झारखंड के अलग-अलग विश्वविद्यालयों के शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़ रहे हैं ताकि तकनीकी दक्षता केवल किसी एक संस्थान तक सीमित न रहे और इसका लाभ अलग-अलग विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों तक पहुंचे.

शिक्षा को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण साधन होगा AI
रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) सरोज शर्मा ने भी तकनीक को विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, सहभागिता और रचनात्मकता बढ़ाने का माध्यम बनाने पर जोर दिया है. कार्यक्रम में विशेषज्ञों की ओर से यह संदेश स्पष्ट है कि आने वाले समय में AI शिक्षा का विकल्प नहीं, बल्कि शिक्षा को बेहतर बनाने का महत्वपूर्ण साधन होगा.
क्लास और तकनीक के बीच तालमेल
टीचर्स के लिए चुनौती अब सिर्फ नई तकनीक सीखने की नहीं है बल्कि यह समझने की है कि AI का इस्तेमाल कहां, कितना और किस उद्देश्य से किया जाए? यही समझ आने वाले समय में कक्षा और तकनीक के बीच बेहतर तालमेल तैयार करेगी.
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