सरेंडर नक्सलियों ने डीआरजी जवानों को बांधी राखी, बंदूक नहीं हुनर से भविष्य संवारने का फैसला
कांकेर में सरेंडर नक्सलियों ने डीआरजी जवानों की कलाई पर राखी बांधी है. सुशील सलाम की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 28, 2026 at 4:16 PM IST
कांकेर: पूरे देश में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जा रहा है. कई वर्षों तक नक्सल हिंसा और पीड़ा को झेलने वाले कांकेर जिले में रक्षाबंधन पर सुखद तस्वीर देखने को मिली. यहां के भानुप्रतापपुर में ग्राम चौगेल के पुनर्वास केंद्र पर सरेंडर महिला नक्सलियों ने डीआरजी जवानों को राखी बांधी. आत्मसमर्पित महिला माओवादियों ने DRG जवानों की कलाई पर राखी बांधकर रक्षाबंधन का पर्व मनाया.
सरेंडर महिला नक्सलियों ने पहली बार मनाया रक्षाबंधन
सरेंडर माओवादी शांति कवाची ने बताया कि वह पहली बार रक्षाबंधन का त्योहार मना रही हैं. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कौशल विकास प्रशिक्षण के माध्यम से उन्होंने राखी बनाना सीखा और आज उन्हीं हाथों से तैयार राखी पुलिस जवान की कलाई पर बांधना उनके लिए बेहद खास और भावुक पल है.
सरेंडर करने के बाद मुझे महसूस हो रहा है कि हम समाज की मुख्यधारा में वापस लौट चुके हैं. सरकार की नीति से प्रभावित होकर हमने सरेंडर का फैसला किया. पुनर्वास केंद्र में हमें सिलाई, काष्ठ शिल्प और राखी निर्माण समेत विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि इन हुनरों के जरिए हम सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें- शांति कवाची, सरेंडर महिला नक्सली

डीआरजी जवानों ने बहनों का किया स्वागत
DRG जवान टेकेश्वर हिचामी ने कहा कि पहले परिस्थितियां ऐसी थीं कि दोनों पक्ष बंदूक लेकर एक-दूसरे के सामने खड़े होते थे. आज वही हाथ राखी के पवित्र धागे से जुड़ गए हैं. सरेंडर माओवादी द्वारा बांधी गई राखी उनकी कलाई पर होना उनके लिए भावुक अनुभव है. यह राखी भाई की लंबी उम्र, सुख और शांति की कामना का प्रतीक है.

रक्षाबंधन का यह आयोजन सिर्फ एक पर्व मनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह हिंसा से शांति, संघर्ष से विश्वास और हथियार से हुनर की ओर बढ़ते बदलाव की तस्वीर बन गया. जिस हाथ से कल तक जवानों के खिलाफ गोलियां चलती थी. आज वह हाथ जवानों की सलामती के लिए राखी बनाने का काम कर रही है. उन्हें राखी बांध रही है. बस्तर में यह बड़ा बदलाव सामने आया है.

