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राखी बांधने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और सही विधि, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा और चंद्र ग्रहण का नहीं होगा प्रभाव

इस बार 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाया जाएगा. इस बार राखी पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जबकि भारत में चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा.

Raksha Bandhan 2026
रक्षाबंधन 2026 (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : August 22, 2026 at 3:47 PM IST

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कुरुक्षेत्र: भाई-बहन के पवित्र प्रेम, विश्वास और अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन त्यौहार सबसे पावन त्योहारों में से एक है. यह केवल धागे की गांठ बांधने का दिन नहीं, बल्कि एक बहन का अपने भाई के प्रति प्रेम और एक भाई का अपनी बहन की हर परिस्थिति में रक्षा करने का संकल्प है. सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व जीवन में सकारात्मकता, सुरक्षा और पारिवारिक सौहार्द लेकर आता है.

हालांकि इस बार रक्षाबंधन पर तिथियों का अद्भुत योग बन रहा है, जिसे लेकर अक्सर लोगों के मन में भद्रा काल, चंद्र ग्रहण और शुभ मुहूर्त को लेकर कई प्रश्न उठते हैं. तो आइए, इस पावन पर्व से जुड़ी तिथि, शुभ मुहूर्त, ग्रहण के प्रभाव, राखी बांधने की सही विधि और सावधानियों के बारे में जानते है.

भद्रा और चंद्र ग्रहण का नहीं होगा प्रभाव: इस साल रक्षाबंधन 28 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा. श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ने वाले इस त्योहार को लेकर भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के योग के कारण कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस दिन रक्षाबंधन मनाने में कोई रुकावट नहीं है.

राखी बांधने से पहले जान लें शुभ मुहूर्त और सही विधि (ETV Bharat)

​राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: कुरुक्षेत्र तीर्थ पुरोहित पंडित पवन शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया कि, " हिंदू पंचांग के अनुसार सावन महीने की पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे से प्रारंभ होकर 28 अगस्त को सुबह 09:48 बजे समाप्त होगी. इसलिए उदयातिथि के कारण 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाया जाएगा. इस दिन ​सबसे उत्तम मुहूर्त सुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक है. जबकि ​लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:10 बजे तक है. ​ ध्यान रखे सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे के बीच राहुकाल रहेगा. इसलिए इस समय राखी बांधने से बचें. हालांकि इसके बाद पूरे दिन रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा."

​भद्रा काल की स्थिति: पंडितजी ने आगे बताया ​कि शास्त्रों में भद्रा काल के दौरान रक्षाबंधन या मांगलिक कार्य करना वर्जित माना गया है. हालांकि इस साल भद्रा काल 27 अगस्त को रात 09:32 बजे ही समाप्त हो जाएगा. 28 अगस्त की सुबह सूर्योदय के समय कोई भद्रा दोष नहीं रहेगा. इसलिए बहनें बिना किसी भय या संशय के सुबह अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं.

​चंद्र ग्रहण का प्रभाव और सूतक काल: पंडित पवन शर्मा ने कहा कि, "​28 अगस्त को पूर्णिमा के दिन आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण सुबह लगभग 08:04 बजे से प्रारंभ होकर 11:21 बजे तक रहेगा. यह ग्रहण दिन के समय लगेगा, इसलिए भारत में चंद्रमा क्षितिज से नीचे रहेगा और यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा.इसलिए उसका सूतक काल या धार्मिक प्रभाव मान्य नहीं होता. इसलिए भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा, और न ही पूजा-पाठ या राखी पर्व पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा."

राखी बांधने की विधि:

  • एक पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई, नारियल और राखी रखें.
  • फिर भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके बिठा दें.
  • बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर हो.
  • उसके बाद बहन सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम का तिलक लगाए और उस पर अक्षत लगाए.
  • इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधें.
  • भाई की आरती उतारकर दीर्घायु की कामना करें और उसका मुंह मीठा कराएं.
  • उसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार व जीवन भर रक्षा का का वचन दे.

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