ETV Bharat / state

Raksha Bandhan Special: अपनों के इंतजार के बीच आश्रम की बेटियों का कमाल, अमेरिका तक पहुंची हाथ से बनी राखियां

'अपना घर आश्रम' की बेटियों ने आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए 18 हजार राखियां बनाई हैं. पढ़िए श्यामवीर सिंह की स्पेशल रिपोर्ट.

Raksha Bandhan Specia
आश्रम की बेटियों का कमाल (ETV Bharat GFX)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 28, 2026 at 6:33 AM IST

6 Min Read
Choose ETV Bharat

भरतपुर: रक्षाबंधन का त्योहार पर आज हर तरफ बहनें अपने भाइयों के लिए खूबसूरत राखियां बांध रही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस बार देश के कई बड़े शहरों से लेकर अमेरिका तक की कलाईयों पर जो सबसे खूबसूरत धागे बांधे जा रहे हैं, उन्हें भरतपुर के 'अपना घर आश्रम' में रहने वाली उन बेटियों ने बनाया है जिन्हें कभी अपनों का सहारा तक नसीब नहीं था. मानसिक विमंदित और लावारिस अवस्था से उबरकर इन बेटियों ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि अपनी मेहनत से आश्रम में ही रहकर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाए हैं.

17-18 हजार राखियां तैयार की: कभी लावारिस और मानसिक रूप से अस्वस्थ हालत में आश्रम पहुंचीं या लाई गईं इन बेटियों को आज भी अपने परिजनों के लौटने की उम्मीद है. कुछ के परिजनों का पता चल चुका है, लेकिन वे उन्हें वापस ले जाने को तैयार नहीं हैं, जबकि कई बेटियों के परिवारों का अब तक कोई सुराग नहीं मिला है. अपनों की कमी के इस दर्द के बीच ये बेटियां दूसरों के भाइयों के लिए प्रेम के धागे तैयार कर रही हैं. आश्रम की करीब 30-35 बेटियों ने अब तक 17-18 हजार राखियां तैयार कर ली हैं. इनके हाथों से बनी राखियां जयपुर, मुंबई, मेरठ और मध्यप्रदेश तक पहुंच चुकी हैं, जबकि अमेरिका से आए लोग भी इन राखियों को अपने साथ ले गए हैं.

'अपना घर आश्रम' की बेटियों ने बनाई राखियां (ETV Bharat Bharatpur)

इसे भी पढे़ं- Raksha Bandhan 2026: अलवर में नए डिजाइन की राखियों से सजा बाजार, इटली-कनाडा तक भारी डिमांड

हर दिन तैयार हो रही 500-700 राखियां: अपना घर आश्रम की संस्थापक डॉ. माधुरी भारद्वाज ने बताया कि आश्रम में इस समय 6 हजार से अधिक महिला और पुरुष प्रभुजन निवासरत हैं. हर प्रभुजन की अपनी एक कहानी है. इनमें से करीब 30-35 बेटियां राखियां बनाने के काम में जुटी हैं. कोई धागों को जोड़ती है, कोई सजावटी सामग्री लगाती है, तो कोई तैयार राखियों को अंतिम रूप देती है. सामूहिक रूप से ये बेटियां हर दिन करीब 500 से 700 राखियां तैयार कर रही हैं. अब तक करीब 17-18 हजार राखियां बनाई जा चुकी हैं. इन राखियों को सिर्फ बाजार में बेचने के लिए तैयार नहीं किया जा रहा, बल्कि अलग-अलग जगहों से आने वाले ऑर्डर के अनुसार भी बनाया जाता है. जहां से भी मांग आती है, बेटियां उसी हिसाब से राखियां तैयार कर देती हैं. ये राखियां आश्रम के ही प्रभुजनों की कलाई पर भी बांधी जाएंगी.

Raksha Bandhan Specia
आश्रम की बेटियों ने तैयार की राखियां (ETV Bharat GFX)

कई बहनों को अपनों का इंतज़ार: डॉ. माधुरी ने बताया कि इनमें से कई बेटियां मानसिक रूप से अस्वस्थ अवस्था में लावारिस मिली थीं और आश्रम पहुंचीं या लाई गईं. आश्रम ने उन्हें घर और परिवार का सहारा दिया. कुछ के परिजनों की तलाश भी पूरी हुई और परिवार का पता भी चल गया, लेकिन परिजन उन्हें वापस अपने साथ ले जाने को तैयार नहीं हैं. वहीं, कई प्रभुजनों के परिजनों की पहचान और पता आज तक नहीं चल सका है. रक्षाबंधन के पर्व पर ये बेटियां आश्रम के ही पुरुष प्रभुजनों की कलाई पर राखी बांधती हैं.

इसे भी पढे़ं- Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर राखी बांधने, तिलक लगाने और आरती की पारंपरिक विधि, भूलकर भी न करें ये गलतियां

10 रुपये से 40 रुपये तक की राखी: उन्होंने बताया कि आश्रम में तैयार की जा रही राखियों की कीमत आम लोगों की पहुंच में रखी गई है. यहां राखियां 10 रुपये से शुरू होकर 40 रुपये तक की हैं. अलग-अलग डिजाइन के हिसाब से 15 और 20 रुपये की राखियां उपलब्ध हैं. वहीं भाई-भाभी के लिए जोड़ी में तैयार राखियों की कीमत करीब 40 रुपये तक रखी गई है.

ऐसे हुई राखी बनाने की शुरुआत: डॉ. माधुरी ने बताया कि इन राखियों के बनने की शुरुआत भी एक छोटे और बेहद भावुक दृश्य से हुई थी. रक्षाबंधन के समय प्रभुजनों को राखी बांधने के लिए बाजार से राखियां खरीदकर लाई जाती थीं. कई बार इनमें से कुछ राखियां टूट जाती थीं. आश्रम की बेटियां उन टूटी हुई राखियों को फेंकती नहीं थीं, बल्कि वे उन्हें फिर से धागे में पिरोकर अपने हाथों में पहन लेती थीं. बेटियों का राखियों के प्रति यह लगाव देखकर आश्रम प्रबंधन के मन में विचार आया कि जब वे खुद कुछ काम करना चाहती हैं और राखियों में इतनी रुचि रखती हैं, तो क्यों न उन्हें राखियां बनाने का अवसर दिया जाए. पहले थोड़ी सामग्री मंगाकर प्रयोग के तौर पर बेटियों से राखियां बनवाई गईं, लेकिन बेटियों ने इतनी सुंदर राखियां तैयार कीं कि यह छोटा सा प्रयास धीरे-धीरे एक बड़े अभियान में बदल गया.

Raksha Bandhan 2026
आश्रम की बेटियां तैयार कर रही हैं राखियां (ETV Bharat Bharatpur)

इसे भी पढे़ं- चाइनीज राखियां बाजार से गायब, भारतीय राखी 25% तक महंगी, छोटी और नग वाली राखियों की बढ़ी डिमांड

अब तक 18 हजार के करीब: शुरुआत में शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि आश्रम की बेटियों के हाथों से तैयार होने वाली राखियों की संख्या हजारों तक पहुंच जाएगी. अब तक करीब 17-18 हजार राखियां बनाई जा चुकी हैं. ऑर्डर मिलने पर उसी के अनुसार राखियां तैयार की जाती हैं और पैक कर भेजी जाती हैं. इन राखियों की मांग भरतपुर से बाहर तक पहुंच गई है. हाल ही में जयपुर के लिए 1200 राखियां भेजी गईं. आश्रम की राखियां मध्यप्रदेश, मुंबई और मेरठ तक भी भेजी जा चुकी हैं. इतना ही नहीं, अमेरिका से आश्रम घूमने आए कुछ विजिटर्स ने यहां तैयार राखियां पसंद कीं और करीब 9-10 राखियां खरीदकर अपने साथ अमेरिका ले गए.

Raksha Bandhan 2026
कई डियायनर राखियां यहां बनाई गई हैं (ETV Bharat Bharatpur)

डिजाइनर राखियां भी हो रही तैयार: आश्रम की बेटियों ने अलग-अलग डिजाइन की राखियां तैयार की हैं. इनमें इलायची दाने वाली राखियां, ‘ब्रदर’ और ‘भैया’ लिखी राखियां शामिल हैं. इसके अलावा गणेश जी, कृष्ण जी और खाटू श्याम जी के डिजाइन वाली राखियां भी बनाई गई हैं. बच्चों और युवाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए आजकल लोकप्रिय 'एविल आई' डिजाइन की राखियां भी तैयार की गई हैं. डॉ. माधुरी ने बताया कि अपना घर आश्रम में पिछले आठ वर्षों से रक्षाबंधन का पर्व विशेष रूप से मनाया जा रहा है. इस दिन आश्रम की बेटियां प्रभुजनों को राखी बांधती हैं, उन्हें मिठाई खिलाती हैं और पूरे उत्साह के साथ पर्व मनाती हैं. कई बार बाहर से आने वाले लोग भी आश्रम में आकर ही प्रभुजनों से राखी बंधवाते हैं.

Raksha Bandhan 2026
30-35 महिलाएं रोज राखियां बनाती हैं (ETV Bharat Bharatpur)

इसे भी पढे़ं- Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन 28 अगस्त को, इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया

इसे भी पढे़ं- रक्षाबंधन का सबसे बड़ा तोहफा: 16 साल से सूनी कलाई पर फिर सजेगी राखी, आश्रम में जीवित मिली लापता बहन