'मानसिक संतुलन खो बैठे हैं जगत नेगी', "एंटी-हिमाचल" वाले बयान पर राकेश जम्वाल का तीखा पलटवार
जम्वाल ने कहा कि जनता ने सरकार को जिम्मेदारी सौंपी है और मंत्रियों को उसी पर ध्यान देना चाहिए.

By ANI
Published : February 23, 2026 at 10:36 PM IST
|Updated : February 23, 2026 at 10:51 PM IST
शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जम्वाल ने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के उस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने बीजेपी नेताओं को "एंटी-हिमाचल" कहा था. जम्वाल ने कहा कि इस तरह की भाषा राजनीतिक हताशा का संकेत है. मंत्री के हालिया बयानों से प्रतीत होता है कि वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं और समय-समय पर इसी प्रकार की आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते रहते हैं.
"सरकार जिम्मेदारी निभाए, आरोप न लगाए"
राकेश जम्वाल ने कहा कि जनता ने सरकार को जिम्मेदारी सौंपी है और मंत्रियों को उसी पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए विपक्ष पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है. उन्होंने कहा कि विपक्ष को दोष देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा.
राजस्व घाटा अनुदान पर उठाए सवाल
राजस्व घाटा अनुदान के मुद्दे पर बोलते हुए जम्वाल ने कहा कि यह विषय विधानसभा में तीन दिनों तक विस्तार से चर्चा में रहा. उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी ने कभी यह नहीं कहा कि अनुदान बंद किया जाए. असली सवाल यह है कि अनुदान बंद क्यों हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार वित्त आयोग के सामने अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाई, जिससे यह स्थिति बनी.
खर्च और बढ़ते कर्ज पर चिंता
जम्वाल ने कहा कि पहले से संकेत मिल चुके थे कि अनुदान धीरे-धीरे कम होगा, लेकिन सरकार ने खर्च कम करने या आय बढ़ाने के ठोस कदम नहीं उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मुख्य संसदीय सचिवों, सलाहकारों और अन्य पदों पर नियुक्तियां कर खर्च बढ़ाया. उनका कहना है कि तीन साल में प्रदेश पर कर्ज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है.
मर्यादा बनाए रखने की अपील
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हाल ही में आपदा राहत के लिए लगभग 286 करोड़ रुपये जारी किए हैं, फिर भी राज्य सरकार लगातार केंद्र की आलोचना कर रही है. जम्वाल ने इसे विरोधाभास बताया और कहा कि सहयोग को स्वीकार करना चाहिए. जम्वाल ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाए, जिसमें कहा गया है कि हिमाचल प्रदेश 2027 तक आत्मनिर्भर बनेगा. उन्होंने पूछा कि बढ़ते कर्ज के बीच यह लक्ष्य कैसे हासिल होगा. उन्होंने कहा कि विधानसभा में इस पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला. अंत में जम्वाल ने कहा कि लोकतंत्र में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है. बीजेपी प्रदेश के हितों से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी और सरकार से बेहतर वित्तीय प्रबंधन की अपेक्षा करती है.
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