असदुद्दीन ओवैसी होंगे बिहार में राज्यसभा चुनाव के KEY फैक्टर, 5वीं सीट पर उड़ाएंगे 'पतंग'!
बिहार के राज्यसभा चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की भूमिका निर्णायक होने वाली है. वे ही तय करेंगे कि पांचवीं सीट किस गठबंधन को जाएगी.

Published : February 18, 2026 at 4:24 PM IST
पटना: चुनाव आयोग ने 10 राज्यों में होने वाले 37 राज्यसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान कर दिया है. इन 10 राज्यों में बिहार की पांच सीटें भी शामिल हैं. जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, उनमें से कुछ सांसद रिपीट हो सकते हैं लेकिन कुछ की विदाई तय है. विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर 4 सीटें एनडीए के खाते में जाएगी, जबकि पांचवीं सीट के लिए किसी भी गठबंधन के पास संख्या बल नहीं है. ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी के 5 विधायकों का जिसे समर्थन मिलेगा, जीत उसकी होगी.
एआईएमआईएम बनेगा अहम फैक्टर: बिहार में पूर्ण बहुमत वाली एनडीए की सरकार है. भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सभी विधायकों को मिला दिया जाए तो 202 की संख्या होती है. ऐसे में इन पांच सीटों में से चार सीटों पर एनडीए का आसानी से कब्जा हो जाएगा. एक सीट के लिए चुनाव भी हो सकते हैं और एनडीए चाहे तो उसे विपक्ष के के लिए छोड़ भी सकता है.

कैसे होता है चुनाव?: अब राज्यसभा चुनाव के लिए बिहार के गणित को समझते हैं. बिहार में कुल 243 विधानसभा सीट है. राज्यसभा चुनाव का जो गणित है, उसके मुताबिक विधानसभा की सीटों को 100 से गुना दिया जाता है. मतलब यह की एक वोट को 100 मूल्य का माना जाता है. वहीं जितनी सीटों पर चुनाव होना है, उसमें एक जोड़ दिया जाता है और उसके बाद भाग दिया जाता है.
आसान भाषा में ऐसे समझिये कि कुल विधायकों की संख्या 243 X 100 = 24300 और जितनी सीटों पर चुनाव होगा यानी 5 +1 = 6. अब 24300÷6 = 4050 होता है. इसका मतलब ये कि एक सीट के लिए 4050 मूल्य के वोट पड़ेंगे. चूकि एक विधायक के वोट का मूल्य 100 है तो एक सीट के लिए 40.5 विधायक चाहिए. राउंड फिगर की बात करें तो एक सीट के लिए 41 विधायकों का वोट चाहिए.
4 सीटों पर एनडीए की जीत तय: 41 के मुताबिक एनडीए को पांचो सीटों पर कब्जा बनाए रखने के लिए 205 विधायकों का समर्थन चाहिए. इस तरह एनडीए चार सीटों पर तो आसानी से जीत हासिल कर लेगा लेकिन 5वीं सीट के लिए उन्हें 3 अतिरिक्त वोट की जरूरत होगी. उधर, दूसरी तरफ महागठबंधन के पास 35 विधायक है लेकिन यदि एआईएमआईएम अपने 5 विधायकों का समर्थन दे देता है और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक भी सपोर्ट कर देते हैं तो राज्यसभा की एक सीट महागठबंधन की झोली में चली जाएगी. वहीं अगर एआईएमआईएम और बीएसपी अपने आप को चुनाव से अलग रखते हैं तो तो पांचवीं सीट पर भी एनडीए का ही कब्जा हो जाएगा.

किस पर मेहरबान होंगे 'भाईजान'?: इसके बावजूद यदि महागठबंधन की तरफ से किसी कैंडिडेट ने नामांकन किया और वोटिंग की स्थिति हुई तो सब की निगाहें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) पर रहेगी. ऐसे में ओवैसी की पार्टी जिधर करवट लेगी, उधर के उम्मीदवार का पांचवीं सीट पर कब्जा हो जाएगा. इसलिए इस राज्यसभा चुनाव में एआईएमआईएम 'किंग मेकर' की भूमिका में होगा.

कब है चुनाव?: राज्यसभा चुनाव का नोटिफिकेशन 26 फरवरी को जारी होगा. नामांकन की आखिरी तारीख 5 मार्च और नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च है. नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च है. वहीं 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा. मतगणना 16 मार्च को ही शाम 5 बजे से शुरू हो जाएगी. चुनाव प्रक्रिया 20 मार्च 2026 तक पूरी करनी होगी.
भारत के चुनाव आयोग ने 10 राज्यों की 37 सीटों को भरने के लिए काउंसिल ऑफ़ स्टेट्स (राज्य सभा) के हर दो साल में होने वाले चुनावों की घोषणा की है।
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 18, 2026
चुनाव की तारीख- 16 मार्च 2026।
वोटों की गिनती भी वोटिंग वाले दिन ही होगी। pic.twitter.com/BVQQBif3oV
कौन-कौन हो रहे हैं रिटायर?: बिहार से रिटायर होने वाले सदस्यों में आरजेडी से अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता है. जेडीयू से केंद्रीय राज्यमंत्री रामनाथ ठाकुर और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह हैं, जिनका 6 वर्ष का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को पूरा हो रहा है. इसके अलावे बीजेपी कोटे से आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा उपचुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनाया गया था. वे भी 9 अप्रैल को रिटायर हो जाएंगे.
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