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राम मंदिर से निकला समाधान, राजगढ़ के गांव में श्मशान की वर्षों पुरानी समस्या खत्म

राजगढ़ में ग्रामीणों ने श्मशान के लिए दान कर दी जमीन, राम मंदिर में एक बैठक और गांव की वर्षों पुरानी समस्या खत्म,जानिए

donated land for crematorium
श्मशान घाट के लिए जमीन दान की (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 4, 2026 at 3:13 PM IST

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Updated : January 4, 2026 at 4:13 PM IST

3 Min Read
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राजगढ़: शहरी वा ग्रामीण क्षेत्र में आपने कई बार जमीन व मकान के लिए लोगों को आपस में लड़ते हुए देखा होगा. लेकिन हम आपको राजगढ़ जिले के एक गांव की ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने ग्रामीणों की वर्षों पुरानी समस्या ही खत्म करदी. वह भी सिर्फ एक बैठक में. जिसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है.

राम मंदिर में हुई बैठक में निकला समाधान
यह पूरा मामला है राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले हिनोतिया क्रमांक 2 का. जहां के ग्रामीण गांव में श्मशान ना होने के चलते पिछले कई वर्षों से परेशानी का सामना कर रहे थे. ऐसे में शनिवार 3 जनवरी को गांव के राम मंदिर परिसर में आयोजित इस बैठक में इस समस्या का हल भी निकल गया. जिसमें गांव के ही एक व्यक्ति ने जहां अपनी पुस्तैनी जमीन दान में दी. वहीं, एक व्यक्ति ने वहां तक जाने के लिए अपनी जमीन में से रास्ता दान कर दिया. जिसका बकायदा गांव के जिम्मेदार व्यक्तियों के समक्ष पंचनामा भी बनाया गया है.

राम मंदिर में हुई बैठक में निकला समाधान (ETV Bharat)

दो लोगों ने श्मशान के लिए दान की जमीन
जानकारी के मुताबिक, गांव के ही निवासी फतेह सिंह झाला ने अपनी पुश्तैनी जमीन शमशान के लिए दान में दी है. गांव के ही शेर सिंह झाला ने श्मशान तक पहुंचने वाले रास्ते के लिए अपनी जमीन दे दी. जिसका ग्राम पंचायत के सरपंच रामबाबू मीणा के द्वारा भूमि पूजन किया गया. जिस पर जल्द ही सर्वसुविधायुक्त श्मशान घाट का निर्माण कार्य कराया जाएगा.

rajgarh shamshan ghat problem solve
राजगढ़ में ग्रामीणों ने श्मशान के लिए दान कर दी जमीन (ETV Bharat)
rajgarh shamshan ghat problem solve
श्मशान की वर्षों पुरानी समस्या खत्म (ETV Bharat)

श्मशान घाट निर्माण का हुआ भूमिपूजन
ग्राम पंचायत हिनोतिया के सरपंच रामबाबू मीणा कहते हैं कि, ''गांव में श्मशान के लिए जगह न होने के चलते ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. जिसके लिए गांव के राम मंदिर परिसर में बैठक आयोजित की गई. जहां पंचायत के समक्ष गांव के फतेह सिंह ने अपनी पैतृक जमीन श्मशान के लिए और शेर सिंह ने अपनी जमीन श्मशान के रास्ते के लिए दान में दी है. जिसका इकरारनामा भी तैयार कराया गया है और निर्माण कार्य के लिए भूमिपूजन भी कर दिया गया.''

शेर सिंह झाला ईटीवी भारत से बात करते हुए कहते हैं कि, ''गांव में शमशान के लिए भूमि नहीं थी. सब अपने मृत परिजनों के शवों को अपनी-अपनी जमीन में क्रियाक्रम करते हुए आ रहे थे. ऐसे में फतेह सिंह ने अपनी एक बीघा जमीन का चौथाई हिस्सा और उन्होंने अपनी जमीन में से 8 फीट का रास्ता श्मशान के लिए दान में दिया है.''

Last Updated : January 4, 2026 at 4:13 PM IST