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खौफ के साये में जी रहे हैं एचईसी से विस्थापित हजारों रैयत, गांव की हो गई है रजिस्ट्री, राजेश कच्छप का ध्यानाकर्षण, सरकार का ये जवाब

एचईसी से विस्थापित हजारों रैयत खौफ के साये में जी रहे हैं. उन्हें अपना घर और जमीन खोने का डर सता रहा है.

LAND CONTROVERSY
राजेश कच्छप (JVSTV)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 25, 2026 at 7:37 PM IST

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रिपोर्ट: राजेश कुमार सिंह

रांची: झारखंड में जमीन की हेराफेरी आम बात हो गई है. इस बीच बजट सत्र के छठे दिन खिजरी के कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने ध्यानकर्षण के जरिए एचईसी निर्माण की वजह से विस्थापित और हेथु मौजा में पुनर्वासित गांवों की जमीन का ऑनलाइन रसीद कटने और रजिस्ट्री होने का मसला जोरशोर से उठाया. उन्होंने कहा कि इस कांड की वजह से हजारों रैयत डरे और सहमे हुए हैं. उन्हें डर है कि उन्हें घर और जमीन से बेदखल ना कर दिया जाए. वहां खून खराबा वाली नौबत है. इसलिए उच्चस्तरीय जांच के साथ साथ संलिप्त दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जरुरत है.

तीन माह में रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई

जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि यह बेहद ही गंभीर मसला है. इसपर विभाग की नजर है. इसी वजह से तीन माह के भीतर जांच कर रिपोर्ट तलब किया गया है. उन्होंने आश्वस्त किया कि दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा चाहे वो कोई भी अधिकारी क्यों ना हो. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर एनआईसी के स्तर पर ऑनलाइन रसीद दिया गया है तो उसको भी देखा जाएगा. इसलिए रिपोर्ट आने तक इंतजार किया जाना चाहिए.

सदन में राजेश कच्छप (JVSTV)



विस की एक समिति से जांच की निगरानी की मांग

इसपर खिजरी विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि जमीन की हेराफेरी का खेल अधिकारियों की साठगांठ से ही हो रहा है. इसलिए अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती है. लिहाजा, अधोहस्ताक्षरी या विधानसभा के अन्य सदस्यों की एक कमेटी बना दी जाए जो अधिकारियों की जांच पर नजर रख सके. एनआईसी से रसीद तक निर्गत कर दिया गया है. जबकि रजिस्टर-टू में मालिकाना हक को लेकर कोई ब्यौरा नहीं है. इसलिए गांव वालों के साथ टकराव वाली स्थिति बनी हुई है. इसको गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

हर हाल में दोषियों पर होगी कार्रवाई - मंत्री

मंत्री ने विधानसभा की समिति के गठन के सुझाव को नकारते हुए कहा कि खुद वे इसको लेकर गंभीर है. इसलिए तीन माह के भीतर आने वाले जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए. इसके लिए कमेटी की कोई जरुरत नहीं है. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि दोषी पाए जाने वालों पर हर हाल में कार्रवाई होगी.

दरअसल, हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन यानी एचईसी की स्थापना के लिए 1894 की भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत 13 गांव को पूर्ण रुप से और 22 गांव को आंशिक रुप से विस्थापित किया गया था. उन्हीं में से राजस्व ग्राम लटमा को विस्थापित कर हेथु मौजा में पुनर्वासित किया गया. साल 1961-63 में ही ये गांव पुनर्वासित किया गया. लेकिन अब 2019 से 2025 तक में अधिग्रहित जमीन पर मूल रैयत और भू-माफिया, पदाधिकारियों और कर्मियों की मदद से फर्जीवाड़ा कर पुनर्वासित गांव को अपना बताते हुए ऑनलाइन रसीद के साथ सहायक निबंधक की अदूरदर्शिता के कारण रजिस्ट्री कर दी गई है. इसकी वजह से खौफ का माहौल बना हुआ है.

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