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महिलाओं के हुनर को मिला राजीविका का साथ, आत्मनिर्भता की मिसाल बन समाज को दे रही नई दिशा

राजीविका के माध्यम से अब सैंकड़ों महिलाएं अपने हुनर के दम पर स्वरोजगार की ओर बढ़ रही हैं.

Woman selling products at a stall
स्टॉल पर उत्पाद बेचती महिला (ETV Bharat Udaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : November 14, 2025 at 7:06 PM IST

3 Min Read
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उदयपुर: देशभर में महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने के प्रयासों के बीच राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद महिलाओं की जिंदगी में बड़ा बदलाव ला रही है. राजीविका कार्यक्रम से जुड़कर महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं. बल्कि अपने हुनर को व्यवसाय में बदलकर लाखों रुपए तक की कमाई कर रही हैं. दक्षिणी राजस्थान में भी हजारों महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, पेंटिंग, हस्तशिल्प और अन्य कौशलों के माध्यम से अपने पैरों पर खड़ी होकर समाज में नई दिशा दे रही हैं.

महिलाओं ने लगाई अपनी स्टॉल: उदयपुर में आयोजित एग्रीकल्चर एंड लाइवस्टॉक एंटरप्रेन्योरशिप पर तीन दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में भी कई महिला उद्यमियों ने अपने स्टॉल लगाए. यहां ईटीवी भारत से बातचीत में उन्होंने बताया कि कैसे राजीविका से जुड़ने के बाद उनका शौक रोजगार में बदल गया और उनकी आय में वृद्धि हुई.

महिलाओं ने बताई आत्मनिर्भर बनने की कहानी, देखें वीडियो (ETV Bharat Udaipur)

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54 हजार से अधिक महिलाएं बनी उद्यमी: राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि राजीविका के माध्यम से आज 7037 महिला बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट गांवों तक डोर-स्टेप बैंकिंग सेवा पहुंचा रही हैं. इनमें खाते खोलना, रकम जमा-निकासी जैसी सेवाएं शामिल हैं. महिलाओं की आर्थिक सक्रियता बढ़ाने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिला एवं ब्लॉक मुख्यालयों पर 254 कैंटीन शुरू की गई हैं, जिनका संचालन भी महिला समूहों द्वारा किया जा रहा है. उद्यम प्रोत्साहन के तहत 54 हजार से अधिक महिला उद्यमियों को सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मसाला उद्योग, हस्तशिल्प, किराना और लेडीज स्टोर जैसे व्यवसाय स्थापित करवाए गए हैं. उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए जयपुर, उदयपुर, जोधपुर, कोटा, अलवर आदि जिलों में रिटेल स्टोर भी प्रारंभ किए गए हैं.

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महिलाओं की सफलता की कहानियां: उदयपुर की पद्मा बचपन से पेंटिंग कला में माहिर थीं, लेकिन शादी के बाद परिस्थितियों के चलते उनका शौक छूट गया. बाद में राजीविका से जुड़ने पर उन्होंने समूह बनाकर अपनी पेंटिंग कला को नया जीवन दिया. आज उनके समूह में 15 से 20 महिलाएं शामिल हैं जो कपड़े, पेपर और शीट पर पेंटिंग बनाकर अच्छी कमाई कर रही हैं. पद्मा ने बताया कि समूह की कई महिलाएं पहले घर से बाहर भी नहीं निकलती थीं. लेकिन अब उनकी बनाई कला देश के विभिन्न शहरों तक पहुंच रही है.

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प्रिया-डिंपल ने किया अपना व्यवसाय: इसी प्रकार, प्रिया ने बताया कि वे हैंड एम्ब्रॉयडरी का काम करती हैं. 2014 में यह कला सीखी, लेकिन कुछ वर्षों तक काम बंद रहा. राजीविका से जुड़कर उन्होंने फिर से समूह बनाया और आज उनके साथ 25 से 30 महिलाएं काम कर रही हैं. पहले जहां वे रोजाना 50-100 रुपए कमाती थीं, वहीं अब उन्हें बड़े-बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं और मासिक आमदनी हजारों में पहुंच गई है. बाड़मेर की डिंपल, जो एक समय गृहिणी थीं, राजीविका की टीम के गांव पहुंचने के बाद समूह में शामिल हुईं. उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर कपड़ों और शादी-ब्याह में उपयोग होने वाली पेंटिंग का काम शुरू किया. आज उनका समूह स्थिर आय अर्जित कर रहा है और कई परिवार इस आय से आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं.