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यमुना जल बंटवारे पर 32 साल का इंतजार खत्म, ऐसे पहुंचेगा हरियाणा से शेखावटी में पानी, 33 हजार करोड़ से अधिक आएगा खर्च

​दिल्ली में आज अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान और हरियाणा के बीच ऐतिहासिक यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर होंगे.

सी आर पाटील, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह
यमुना बुझाएगी शेखावटी की प्यास. (ETV Bharat gfx)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 29, 2026 at 9:59 AM IST

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Updated : June 29, 2026 at 11:01 AM IST

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जयपुर : प्रदेश की सियासत और विकास के लिहाज से आज सोमवार का दिन बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है. लंबे समय से चर्चा और विवादों में रहे यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर आज एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक पड़ाव आने वाला है. इस बेहद महत्वाकांक्षी समझौते को अमलीजामा पहनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा दिल्ली रवाना हो चुके हैं.

​मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से मिली जानकारी के मुताबिक, नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-3 में यमुना जल परियोजना के निर्माण और क्रियान्वयन को लेकर 'मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' (MoA) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे. इस ऐतिहासिक मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी विशेष रूप से मौजूद रहेंगे.

सी आर पाटील, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह
यमुना जल समझौता. (ETV Bharat gfx)

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सरकारी और प्रशासनिक स्तर पर यह समझौता पानी की उपलब्धता और क्षेत्रीय विकास के लिहाज से मील का पत्थर साबित होगा. वहीं, राजनीतिक गलियारों में इसे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कार्यकाल की सबसे बड़ी और महत्वाकांक्षी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू और झुंझुनूं में पानी की पुरानी मांग को देखते हुए सरकार इसे बड़े जनहित और चुनावी असर वाले फैसले के रूप में प्रस्तुत कर रही है. भाजपा इस प्रोजेक्ट के जरिए राजनीतिक रूप से कमजोर शेखावाटी अंचल को पंचायत - निकाय चुनाव से पहले अपने पक्ष में मजबूत करने की कोशिश करेगी.

​33,779 करोड़ का बजट और तकनीकी चुनौतियां : यमुना जल प्रोजेक्ट को लेकर सरकार की रणनीति केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं है. राज्य सरकार ने पहले ही बजट में इसके लिए वित्तीय प्रावधान कर दिए हैं. MOA साइन होने के तुरंत बाद इसी साल भूमि अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. इस पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 33,779 करोड़ रुपए है, जिसमें से लगभग 3,900 करोड़ रुपए सिर्फ जमीन अधिग्रहण पर खर्च होने की संभावना है.

तकनीकी रूप से यह भी बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि प्रस्तावित भूमिगत पाइपलाइन का लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा क्षेत्र से होकर गुजरने की संभावना है. ऐसे में भूमि उपलब्धता, अंतरराज्यीय समन्वय और क्रियान्वयन सरकार की अगली बड़ी परीक्षा होगी. यमुना जल प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इसको लेकर वह पिछले ढाई साल से लगातार प्रयासरत हैं. राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ती है और शेखावाटी तक पानी पहुंचता है, तो यह भजनलाल सरकार की बड़ी उपलब्धि बन सकती है, लेकिन यदि प्रक्रिया लंबी खिंचती है, तो विपक्ष के पास घेरने का मौका मिल सकता है. इस समझौते के साथ ही साल 1994 में हुए यमुना जल बंटवारे के मूल समझौते को लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया जाएगा. समझौते के तहत राजस्थान को 1917 क्यूसेक यमुना जल मिलेगा, जिससे प्रदेश के शेखावाटी क्षेत्र में लंबे समय से बनी पेयजल और सिंचाई की समस्या के समाधान की उम्मीद जगी है.

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शेखावाटी के लाखों लोगों को मिलेगा सीधा लाभ : यमुना जल परियोजना के लागू होने के बाद चूरू, सीकर और झुंझुनूं जिलों के शहरों और गांवों तक पाइपलाइन के माध्यम से यमुना का पानी पहुंचाया जाएगा. सालों से जल संकट झेल रहे इन इलाकों के लिए यह परियोजना किसी जीवनरेखा से कम नहीं मानी जा रही है. सरकार का मानना है कि इससे क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बेहतर होने के साथ-साथ भविष्य की जल आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सकेगा.

हाईब्रिड तकनीक से पहुंचेगा पानी : परियोजना में आधुनिक हाईब्रिड मोड अपनाया जाएगा. हथिनीकुंड बैराज और राजगढ़ (चूरू) के बीच लगभग 110 मीटर का ऊंचाई अंतर होने के कारण अधिकांश मार्ग में पानी प्राकृतिक ढलान (ग्रेविटी फ्लो) से पहुंचेगा, वहीं जहां आवश्यकता होगी, वहां अत्याधुनिक पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे, ताकि कम जल प्रवाह की स्थिति में भी पानी निर्बाध रूप से राजस्थान तक पहुंचाया जा सके.

सी आर पाटील, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह
यमुना रिवर बोर्ड समझौता (ETV Bharat gfx)

एसपीवी कंपनी करेगी परियोजना का संचालन : परियोजना के संचालन के लिए पहले संयुक्त बोर्ड बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन अब राजस्थान और हरियाणा स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) कंपनी बनाने पर सहमत हुए हैं. यही कंपनी परियोजना का निर्माण, संचालन और रख रखाव करेगी. परियोजना का पूरा वित्तीय भार फिलहाल राजस्थान सरकार वहन करेगी, जबकि केंद्र सरकार से भी आर्थिक सहयोग प्राप्त करने के प्रयास किए जाएंगे. राज्य सरकार का मानना है कि भविष्य में किशाऊ, लखवार और रेणुकाजी बांध परियोजनाओं से राजस्थान के हिस्से का पानी भी इन्हीं पाइपलाइन के माध्यम से प्रदेश तक पहुंचाया जा सकेगा.

दो घंटे चली अधिकारियों की बैठक में बनी सहमति : रविवार को नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में राजस्थान और हरियाणा के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच करीब दो घंटे तक मैराथन बैठक हुई. राजस्थान की ओर से मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार, जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता भुवन भास्कर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे. हरियाणा की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, मुख्य अभियंता वीरेन्द्र सिंह तथा मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए. बैठक में परियोजना की लागत, जल वितरण, निर्माण प्रक्रिया और संचालन से जुड़े सभी प्रमुख बिंदुओं पर अंतिम सहमति बनी.

सी आर पाटील, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह
ऐसे आएगा पानी. (ETV Bharat gfx)

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हरियाणा के पांच जिलों से होकर गुजरेगी पाइपलाइन : योजना के तहत पाइपलाइन यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर राजस्थान पहुंचेगी. हरियाणा ने परियोजना के तहत विभिन्न स्थानों से अपने उपयोग के लिए निर्धारित मात्रा में पानी लेने का प्रस्ताव भी रखा है, जिस पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बन गई है.

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का ड्रीम प्रोजेक्ट : यमुना जल परियोजना को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्राथमिक योजनाओं में शामिल माना जाता है. पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटील से कई दौर की बैठकें कर इस परियोजना को गति देने का प्रयास किया. जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने भी लगातार तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बनाकर समझौते का रास्ता तैयार किया. ऐसी संभावना है कि , 4 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित राजस्थान यात्रा के दौरान इस एमओए का औपचारिक आदान-प्रदान भी किया जा सकता है.

राजस्थान के मुख्य सचिव और हरियाणा के मुख्य सचिव के बीच बैठक
राजस्थान के मुख्य सचिव और हरियाणा के मुख्य सचिव के बीच बैठक (फोटो सोर्स-राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी)

1994 से 2026 तक का सफर : यमुना जल समझौते की शुरुआत वर्ष 1994 में हुई थी, जब राजस्थान को यमुना नदी के जल में हिस्सा आवंटित किया गया था. वर्ष 2001 में हथिनीकुंड बैराज से पानी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया. इसके बाद 2018 में पाइपलाइन के जरिए पानी राजस्थान लाने की योजना पर गंभीर विचार शुरू हुआ. 17 फरवरी 2024 को केंद्र, राजस्थान और हरियाणा के बीच त्रिपक्षीय एमओए पर हस्ताक्षर होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई. अब साल 2026 में दोनों राज्यों के बीच अंतिम एमओए पर सहमति बनने के साथ इस महत्वाकांक्षी परियोजना के धरातल पर उतरने का रास्ता लगभग साफ हो गया है.

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जल संकट के समाधान की दिशा में बड़ा कदम : यमुना जल परियोजना के लागू होने से राजस्थान के जल संकट प्रभावित क्षेत्रों को दीर्घकालिक राहत मिलेगी. विशेष रूप से शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बढ़ेगी, भूजल पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में औद्योगिक और कृषि विकास को भी नई गति मिलेगी. लगभग तीन दशक के इंतजार के बाद यह समझौता राजस्थान के जल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है.

​गहलोत की चुनौती और सीएम भजनलाल का पलटवार : इस ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर राजस्थान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी भी अपने चरम पर है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार को घेरते हुए सार्वजनिक रूप से कहा था कि अगर भजनलाल सरकार वास्तव में यमुना का पानी राजस्थान लाने में कामयाब रही, तो वह खुद मुख्यमंत्री को माला पहनाएंगे. गहलोत का तर्क था कि ऐसे समझौते पहले भी केवल चर्चाओं में रहे, लेकिन जमीन पर कभी नहीं उतरे. इसके जवाब में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की कभी नीयत ही नहीं थी कि शेखावाटी को उसका हक मिले. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के कुछ नेताओं को तो 'MOA' और 'MOU' का फर्क तक नहीं पता है, वे बस दिनभर सोशल मीडिया पर 'ट्विटर-ट्विटर' खेलते रहते हैं. कभी उनकी इच्छा शक्ति नहीं रही की यमुना जल धरातल पर उतरे.

Last Updated : June 29, 2026 at 11:01 AM IST