राजस्थान में बढ़ने लगी गर्मी की रफ्तार, 15 स्थानों पर तापमान 33 सेल्सियस पार
होली पर प्रदेश के ज्यादातर शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री के पार रह सकता है.

Published : February 28, 2026 at 1:38 PM IST
जयपुर: राजस्थान में फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी. मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया जा रहा है. अगले दो सप्ताह तक मौसम साफ रहने की संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि साफ आसमान और शुष्क हवाओं के कारण दिन और रात दोनों के तापमान में क्रमिक वृद्धि हो रही है. बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश में मौसम शुष्क रहा. कई स्थानों पर तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई. अधिकतम तापमान 35.2 सेल्सियस बाड़मेर रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अलवर में 10 सेल्सियस दर्ज किया गया. आज झुंझुनू, सीकर, अलवर और कोटपूतली जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. इससे कुछ इलाकों में अस्थायी राहत मिल सकती है.
अगले सप्ताह 3 से 4 डिग्री बढ़ेगा तापमान: मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि विभाग का अनुमान है कि पश्चिमी और उत्तरी जिलों में तापमान 3 से 4 सेल्सियस तक और बढ़ सकता है. मौसम विभाग ने यह भी संकेत दिया कि कुछ क्षेत्रों में हल्के बादल छाने और सीमित स्थानों पर बूंदाबांदी की संभावना है, लेकिन इससे तापमान में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है. विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि इस वर्ष गर्मी का सीजन सामान्य से पहले तीखा हो सकता है. फरवरी में दिन के तापमान में तेजी से वृद्धि बताती है कि रेगिस्तानी और शुष्क इलाकों में गर्म हवाएं सक्रिय होने लगी हैं. इससे आने वाले दिनों में हीट-इंडेक्स और बढ़ सकता है.
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न्यूनतम तापमान ने भी बनाया रिकॉर्ड : मौसम विभाग के अनुसार जयपुर में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जिसने 2003 के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली. फलोदी में फरवरी का दूसरा सबसे अधिक न्यूनतम तापमान 21.2 डिग्री दर्ज हुआ, जबकि जैसलमेर में 20.4 डिग्री सेल्सियस ने 2023 का रिकॉर्ड तोड़ दिया. बाड़मेर में 21.4 डिग्री ने 2010 के रिकॉर्ड की बराबरी की.
न्यूनतम तापमान (कम से अधिक क्रम)
| शहर | तापमान °C |
| अलवर | 10 |
| उदयपुर | 14.6 |
| श्रीगंगानगर | 15.5 |
| चित्तौड़गढ़ | 15.8 |
| पिलानी | 16.8 |
| चूरू | 17 |
| सीकर | 18 |
| जोधपुर | 18.7 |
| बीकानेर | 19 |
| अजमेर | 19.6 |
| कोटा | 19.6 |
| जयपुर | 20 |
| जैसलमेर | 20.4 |
| फलोदी | 21.2 |
| बाड़मेर | 21.4 |
15 स्थानों पर तापमान 33 सेल्सियस पार: राजस्थान में फरवरी के अंतिम सप्ताह से ही गर्मी ने समय से पहले दस्तक दे दी है. शुष्क हवाओं के कारण दिन और रात दोनों के तापमान में क्रमिक वृद्धि हो रही है. खासकर पश्चिमी और उत्तरी जिलों में गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है, जहां दिन के तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही है. जयपुर, अलवर, सीकर और पिलानी सहित कई शहरों में तापमान लगभग 2 डिग्री तक बढ़ा है, जिससे लोगों को फरवरी के अंतिम सप्ताह में ही गर्मी का अहसास होने लगा है. शुक्रवार को राज्य के 15 जिलों में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा, जो की फरवरी में एक रिकॉर्ड है.
अधिकतम तापमान (High to Low)
| शहर | तापमान °C |
| बाड़मेर | 35.2 |
| चित्तौड़गढ़ | 34.8 |
| जैसलमेर | 34.8 |
| चूरू | 34.6 |
| फतेहपुर | 34.5 |
| पिलानी | 34.3 |
| लूणकरणसर | 34.3 |
| बीकानेर | 34.2 |
| जोधपुर | 34 |
| फलोदी | 33.8 |
| वनस्थली | 33.6 |
| जवाई डेम | 33.6 |
| दौसा | 33.2 |
| अलवर | 33 |
| जालौर | 33 |
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भरतपुर में बूंदाबांदी ने बढ़ाई किसानों की चिंता: उधर, भरतपुर जिले में शनिवार सुबह आसमान में घनघोर काले बादल छा गए और कई इलाकों में बूंदाबांदी हुई. मौसम में आए बदलाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी, क्योंकि इस समय खेतों में रबी फसलों की कटाई चल रही है. बड़ी मात्रा में सरसों की कटी फसल खेतों में पड़ी है. कई जगह सरसों की पकी फसल अभी भी खेतों में खड़ी है. ऐसे में बूंदाबांदी और इसके बाद तेज हवा चलने की स्थिति में फसलों को नुकसान होने की आशंका है.
कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक देशराज सिंह ने बताया कि इस समय की बूंदाबांदी रबी के लिए नुकसानदायी हो सकती है. खेतों में पड़ी कटी सरसों यदि लंबे समय तक नमी में रहती है तो उसके दाने झड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इससे किसानों को सीधे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. जिले के कई ग्रामीण इलाकों में सुबह से बादलों की आवाजाही बनी रही. हल्की बूंदें भी गिरीं. मौसम में अचानक आए इस बदलाव के कारण किसान अपनी फसलों को लेकर चिंतित नजर आए. खासतौर पर सरसों और गेहूं की फसल इस समय संवेदनशील स्थिति में है. खेतों में रखी कटी हुई सरसों यदि अधिक समय तक नमी के संपर्क में रहती है तो उसके दाने झड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इससे सीधे तौर पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इसके अलावा कई किसानों की सरसों की फसल अभी खेतों में खड़ी है और पूरी तरह पक चुकी है. ऐसे में यदि बारिश के कारण फसल में दोबारा नमी आती है तो दाने फूलने और फुटान की संभावना बढ़ जाती है. इससे पैदावार में गिरावट आने का खतरा रहता है. इसी तरह गेहूं की फसल भी इस समय अहम अवस्था में है. गेहूं की बालियां निकल चुकी हैं और दाने बन चुके है. इस दौरान तेज हवा या अधिक बारिश होती है तो फसल के गिरने का खतरा रहता है. फसल गिरने की स्थिति में दाने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और कटाई में भी कठिनाई आती है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
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