राजस्थान में मानसून की दस्तक से पहले मौसम मेहरबान, 27 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट...जानिए मेवाड़ की स्थिति
प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गुरुवार को मौसम ने करवट ली. उदयपुर में राहत, लेकिन मेवाड़ के कई छोटे बांध खतरे की घंटी बजा रहे...

Published : June 26, 2026 at 2:56 PM IST
जयपुर/उदयपुर: राजस्थान में मानसून की आधिकारिक एंट्री से पहले ही प्री-मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है. पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से आ रही नमी के असर से गुरुवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम ने करवट ली. राजधानी जयपुर में महज एक घंटे में 50 मिमी (करीब 2 इंच) बारिश दर्ज की गई, जबकि 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश के 27 जिलों में आंधी, मेघगर्जन और बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है.
जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून की दस्तक : मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार मानसून गुजरात और मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों तक पहुंच चुका है और अगले चार से पांच दिनों में इसके राजस्थान में प्रवेश करने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं. विभाग का अनुमान है कि जुलाई के पहले सप्ताह में मानसून प्रदेश में दस्तक देगा. इसके बाद बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी और पूर्वी राजस्थान के साथ-साथ पश्चिमी हिस्सों में भी अच्छी वर्षा होने की संभावना है.
बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर व कोटा संभाग के कुछ भागों में मेघगर्जन के साथ मध्यम से कहीं-कहीं तेज बारिश की गतिविधियां आगामी 2-3 दिन जारी रहने की प्रबल संभावना है।https://t.co/hAJ2xTJRC4
— मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर (@IMDJaipur) June 26, 2026
सामान्य से 43 फीसदी अधिक हुई प्री-मानसून बारिश : इस बार प्री-मानसून ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है. 25 जून तक राजस्थान में 52.34 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य आंकड़ा 36.61 मिमी है. यानी प्रदेश में अब तक करीब 43 प्रतिशत अधिक प्री-मानसून बारिश हो चुकी है. अच्छी बारिश के चलते अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है.
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प्रदेशभर में झमाझम बारिश, कई जिलों में बरसात : जल संसाधन विभाग के मुताबिक बीते 24 घंटों में दौसा के रेडिया बांध क्षेत्र में सर्वाधिक 68 मिमी बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा झालावाड़ के अकलेरा में 51 मिमी, जयपुर शहर में 50 मिमी, सांगानेर में 36 मिमी, नागौर के डेगाना और भीलवाड़ा के शकरगढ़ में 35-35 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई. झुंझुनू के गुढ़ागौड़जी और नागौर के सांजू में 25-25 मिमी बारिश हुई. वहीं, गांगरार (चित्तौड़गढ़) और कुम्हेर (भरतपुर) में 40-40 मिमी, सलूम्बर में 30 मिमी, चौमूं में 30 मिमी तथा जमवारामगढ़ में 20 मिमी बारिश दर्ज की गई.
27 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट : मौसम विभाग ने शुक्रवार को बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनू, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, नागौर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा, बारां, झालावाड़, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा सहित 27 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है. इन क्षेत्रों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, मेघगर्जन और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और बिजली गिरने के समय खुले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी है.
पश्चिमी राजस्थान में अभी भी गर्मी का असर : बारिश के बावजूद पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में गर्मी बनी हुई है. फलोदी प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 41.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके बाद श्रीगंगानगर में 41.0 डिग्री, जैसलमेर में 40.8 डिग्री, बाड़मेर में 40.5 डिग्री, चूरू में 39.8 डिग्री, बीकानेर में 39.3 डिग्री तथा जोधपुर में 39.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया. वहीं, जयपुर में अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 26.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ. पिलानी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया.
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अगले दो सप्ताह कैसा रहेगा मौसम ? : मौसम विभाग के दो सप्ताह के पूर्वानुमान के अनुसार 26 जून से 2 जुलाई के बीच कोटा, उदयपुर, भरतपुर और जयपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रहेगा. वहीं, पश्चिमी राजस्थान में छिटपुट बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं. 3 से 9 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियों में और तेजी आने के संकेत हैं. विशेष रूप से कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी और उदयपुर संभाग में अच्छी बारिश होने की संभावना जताई गई है.

मौसम विभाग का कहना है कि मानसून भले ही इस बार सामान्य तिथि से कुछ दिन देरी से पहुंचे, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि जुलाई के पहले सप्ताह से प्रदेश में व्यापक और अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है. इससे खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी, जलाशयों में पानी की आवक बढ़ेगी और भीषण गर्मी से लंबे समय से राहत का इंतजार कर रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
मानसून की पहली बारिश से पहले उदयपुर में राहत, लेकिन मेवाड़ के कई छोटे बांधों को खतरा : मानसून की दस्तक का इंतजार पूरे राजस्थान को है, लेकिन इस बार उदयपुर के लिए तस्वीर राहत देने वाली नजर आ रही है. शहर की प्यास बुझाने वाली प्रमुख झीलों और बांधों में अभी पर्याप्त पानी मौजूद है, जिससे फिलहाल जल संकट की आशंका नहीं है. दूसरी ओर मेवाड़ के कई छोटे बांध तेजी से खाली हो रहे हैं, यानी एक तरफ उदयपुर शहर सुरक्षित है तो दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों के लिए आने वाले दिनों में अच्छी बारिश बेहद जरूरी हो गई है.
जल संसाधन विभाग के अधिकारी उमेश ने बताया कि जल संसाधन विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान के 693 बड़े, मध्यम और छोटे बांधों में फिलहाल कुल जल भंडारण उनकी क्षमता का 44.22 प्रतिशत है. इनमें 307 बांध पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि केवल 5 बांध पूरी क्षमता के साथ भरे हुए हैं. शेष 381 बांधों में आंशिक पानी बचा है. पिछले 24 घंटे में ही तेज गर्मी और वाष्पीकरण के कारण प्रदेश के बांधों से 11.88 एमसीएम पानी कम हो गया.
उदयपुर के लिए राहत इसलिए है, क्योंकि शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली फतेहसागर झील में 68.35 प्रतिशत और पिछोला झील में 66.18 प्रतिशत पानी मौजूद है. वहीं, शहर की पेयजल आपूर्ति का मुख्य स्रोत मानसी वाकल बांध 60.34 प्रतिशत भरा हुआ है. जल विशेषज्ञों का मानना है कि इन जल स्रोतों में उपलब्ध पानी मानसून आने तक शहर की नियमित जलापूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त है.
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मेवाड़ क्षेत्र के प्रमुख जलाशयों पर नजर डालें तो साबरमती बांध 68.91 प्रतिशत जल भंडारण के साथ सबसे मजबूत स्थिति में है. उदयसागर झील में 57.14 प्रतिशत तथा जयसमंद झील में 54.58 प्रतिशत पानी शेष है. वल्लभनगर बांध 48.54 प्रतिशत, जाखम बांध 44.46 प्रतिशत और सोम कागदर बांध 35.03 प्रतिशत क्षमता पर पहुंच चुके हैं. वहीं, आकोदड़ा बांध में मात्र 7.60 प्रतिशत, खराताना में 3.07 प्रतिशत और बागोलिया बांध में सिर्फ 2.93 प्रतिशत पानी बचा है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय है.
उदयपुर संभाग के अन्य जिलों में भी जल स्थिति मिश्रित बनी हुई है. राजसमंद झील में 57.28 प्रतिशत पानी उपलब्ध है. चित्तौड़गढ़ के घोसुंडा बांध में 49.83 प्रतिशत जल भंडारण है, जबकि गम्भीरी में 15.16 प्रतिशत और ओराई बांध में केवल 9.97 प्रतिशत पानी बचा है. भीलवाड़ा के कोठारी बांध में 68.81 प्रतिशत और मेजा बांध में 33.97 प्रतिशत पानी है. डूंगरपुर के सोम-कमला-अंबा बांध में 68.56 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया है, जबकि माही बजाज सागर में 43.76 प्रतिशत पानी उपलब्ध है.
प्रदेश स्तर पर आंकड़े बताते हैं कि 23 बड़े बांधों में 56.09 प्रतिशत, 263 मध्यम बांधों में 26.27 प्रतिशत और 407 छोटे बांधों में केवल 13.50 प्रतिशत पानी बचा है. जोनवार स्थिति में कोटा सबसे बेहतर 54.93 प्रतिशत जल भंडारण के साथ आगे है, जबकि जोधपुर जोन सबसे कमजोर 18.68 प्रतिशत पर पहुंच गया है. मानसून की शुरुआत से ठीक पहले सामने आए ये आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि उदयपुर शहर फिलहाल सुरक्षित स्थिति में है, लेकिन मेवाड़ के कई छोटे जलाशयों में तेजी से घटता जलस्तर चेतावनी भी दे रहा है. यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.

