Jaipur Rain : मानसून की दस्तक से पहले अलर्ट मोड पर जेडीए, बाढ़ नियंत्रण कक्ष शुरू...
कंट्रोल रूम ही नहीं, बल्कि पूरे जल निकासी तंत्र की असली परीक्षा मानसून में होगी...

Published : June 26, 2026 at 10:00 PM IST
जयपुर: मानसून की दस्तक से पहले जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने शहर में संभावित जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए बनीपार्क स्थित अग्निशमन केंद्र में केंद्रीयकृत बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया है. ये कंट्रोल रूम 30 सितंबर तक चौबीसों घंटे संचालित रहेगा.
हालांकि, हर साल बारिश के दौरान राजधानी की सड़कें तालाब में बदलने और ड्रेनेज सिस्टम के जवाब दे जाने का इतिहास बताता है कि केवल कंट्रोल रूम ही नहीं, बल्कि पूरे जल निकासी तंत्र की असली परीक्षा अब मानसून में होगी. प्री मानसून में गुरुवार को हुई बारिश ने जयपुर शहर के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल कर रख दी है. ऐसे में आगामी मानसून को देखते हुए एहतियातन बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित करना शुरू कर दिया गया है.

जेडीसी सिद्धार्थ महाजन में बताया कि बाढ़ राहत कार्यों के लिए डीजल पंप, मड पंप, जेसीबी, हाइड्रोलिक पोकलेन, ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर, फ्लड बैरियर, डीजी सेट और मिट्टी के कट्टों सहित सभी जरूरी संसाधनों की अग्रिम व्यवस्था कर ली गई है. नियंत्रण कक्ष में अधिकारियों और कर्मचारियों की 24 घंटे, आठ-आठ घंटे की शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके.
हेल्पलाइन नंबर भी जारी : आमजन की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन 0141-2570096 और 9001288117 जारी किए गए हैं. इसके अलावा विद्याधर नगर, वैशाली नगर, लॉस्ट फार्म, सायपुरा, दांतली, पालड़ी मीणा, मुहाना मंडी और हाथोज सहित विभिन्न क्षेत्रों में उप-बाढ़ नियंत्रण केंद्र भी बनाए गए हैं.

क्या इस बार बदलेगी तस्वीर ? : राजधानी जयपुर में हर मानसून के दौरान कुछ घंटों की तेज बारिश भी ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल देती है. परकोटा, टोंक रोड, गोपालपुरा बाईपास, मानसरोवर, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर, जवाहर नगर, अजमेर रोड, सीकर रोड और कई कॉलोनियों में जलभराव आम समस्या बन चुकी है. कई जगह सड़कें नदी का रूप ले लेती हैं. वाहन बंद हो जाते हैं और लोगों को घंटों जाम का सामना करना पड़ता है.
पर्यावरणविद सूरज सोनी का कहना है कि नालों पर अतिक्रमण, समय पर सफाई नहीं होना, वर्षा जल ड्रेनेज नेटवर्क की सीमित क्षमता और तेजी से हुए शहरी विस्तार के कारण हर साल हालात बिगड़ते हैं.

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तैयारियां पर्याप्त या सिर्फ राहत तक सीमित : जेडीए ने राहत और बचाव के लिए संसाधन जुटा दिए हैं, लेकिन सवाल ये है कि क्या जलभराव रोकने के लिए स्थायी उपाय भी उतने ही प्रभावी हुए हैं. यदि प्रमुख नालों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के कार्य समय पर पूरे नहीं हुए तो कंट्रोल रूम का काम केवल शिकायतें दर्ज कर राहत पहुंचाने तक सीमित रह सकता है.
बहरहाल, अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि इस बार राजधानी की सड़कों पर पानी भरने की पुरानी तस्वीर फिर सामने आती हैं या प्रशासन की तैयारियां शहरवासियों को राहत दिलाने में सफल होती हैं.

