विधानसभा बजट सत्र: सवालों में फिर घिरे सरकार के मंत्री, पक्ष-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल हंगामेदार रहा. कई मुद्दों पर भजनलाल सरकार के मंत्री जवाब न होने की स्थिति में घिरे नजर आए.

Published : February 24, 2026 at 1:49 PM IST
जयपुर: विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान भजनलाल सरकार के कई मंत्री विपक्ष के तीखे सवालों में घिरते नजर आए. जवाबों से असंतुष्ट विपक्ष ने जोरदार नोकझोंक की, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति बन गई. सीकर में घोषित एमडीआर सड़क मामले पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा के पूरक प्रश्नों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी. सड़क के रूट परिवर्तन को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई. चूरू विधानसभा क्षेत्र में संचालित मोबाइल वेटरिनरी यूनिट के मुद्दे पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत आंकड़ों को लेकर उलझ गए. नेता प्रतिपक्ष ने आंकड़ों में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जिन्हें संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सिरे से खारिज किया. इसी दौरान महाराणा प्रताप टूरिस्ट विकास योजना में व्यय को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष और संबंधित मंत्री के बीच तीखी बहस हुई. बढ़ते हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पूरक प्रश्न पूछने की व्यवस्था सुनिश्चित कर सदन को शांत कराया.
सीकर जिले में घोषित एमडीआर सड़कों को लेकर विधायक गोवर्धन धोद के सवाल पर उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने जवाब दिया. उन्होंने बताया कि धोद क्षेत्र में 39 सड़क कार्य 45 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 6 पूरे हो चुके हैं और शेष प्रगति पर हैं. उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की चर्चा हो रही है, उन्हें एमडीआर घोषित किया जा चुका है और वन विभाग की अनापत्ति तथा वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर निर्माण होगा. इस पर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष और लक्ष्मणगढ़ से विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने पूरक प्रश्न करते हुए कहा कि सड़क पहले उनके कार्यकाल में घोषित हुई थी, फिर रूट क्यों बदला गया? इस पर उपमुख्यमंत्री ने विस्तृत जानकारी बाद में उपलब्ध कराने की बात कही. संसदीय परंपरा को लेकर विधायक जोगेश्वर गर्ग ने भी टिप्पणी की कि पूरक प्रश्न अपवाद ही रहने चाहिए.
मोबाइल वेटरिनरी यूनिट पर हंगामा: चूरू विधानसभा क्षेत्र में संचालित मोबाइल वेटरिनरी यूनिट को लेकर विधायक हरलाल सहारण के प्रश्न पर पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत जवाब देते हुए कुछ बिंदुओं पर उलझ गए. उन्होंने बताया कि प्रदेश में 536 मोबाइल वेटरिनरी वैन संचालित हैं, जिनमें से तीन चूरू में हैं. 15 फरवरी 2026 तक चूरू में 36,550 पशुओं का उपचार किया गया. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि उपचार के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा है और जांच की मांग की. मंत्री ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों में कैंप में उपचारित पशु भी शामिल हैं. इस पर संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक बहस की जरूरत नहीं है, जिसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया.

महाराणा प्रताप पर गरमाई बहस: प्रश्नकाल में महाराणा प्रताप टूरिस्ट विकास योजना की प्रगति को लेकर सवाल लगा. राजसमंद विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने योजना के तहत कार्यवार स्वीकृति, आवंटित बजट, अब तक हुए व्यय तथा पूर्ण एवं प्रगतिरत कार्यों का विवरण मांगा, जिस पर सरकार ने पूरी जानकारी सदन की मेज पर रखी. सवाल के जवाब में पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने बताया कि महाराणा प्रताप सर्किट की डीपीआर तैयार हो चुकी है और योजना को भव्य रूप से विकसित किया जाएगा. पूरक प्रश्न में विधायक माहेश्वरी ने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को लेकर सवाल उठाया.

मंत्री ने कहा कि इस योजना से स्थानीय लोगों को विभिन्न स्तरों पर रोजगार के अवसर मिलेंगे और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा. इस दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने 100 करोड़ रुपए की घोषणा के मुकाबले बेहद कम राशि खर्च होने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि दो वर्षों में केवल दो लाख रुपए खर्च होना गंभीर सवाल खड़ा करता है और योजना की स्पष्ट समय-सीमा तय की जानी चाहिए. जवाब में दीया कुमारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो एक हजार करोड़ रुपये तक भी खर्च किए जाएंगे और किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार केवल घोषणा नहीं, बल्कि पक्का और पूर्ण कार्य करेगी, साथ ही पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि इतनी चिंता थी तो पांच वर्षों में क्या किया गया. नेता प्रतिपक्ष ने महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए योजना में देरी को अनुचित बताया और कहा कि घोषणा के बाद भी 2 लाख रुपये खर्च नहीं हुए, इससे साफ है कि सरकार महाराणा प्रताप को लेकर कितनी गंभीर है.
मंदिरों की स्थिति और 'सेटिंग' पर गरमाया सदन: प्रश्नकाल के दौरान प्रदेश के सरकारी अधीन मंदिरों का मुद्दा प्रमुखता से उठा. निंबाहेड़ा विधायक श्रीचंद कृपलानी ने दो वर्ष से अधिक समय से बंद पड़े मंदिरों का जिलेवार विवरण मांगा. देवस्थान मंत्री जोगाराम पटेल ने सदन में बताया कि विभाग के अधीन कुल 938 मंदिर दर्ज हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में कोई भी मंदिर बंद नहीं है और सभी आमजन के दर्शन के लिए खुले हैं. चर्चा के दौरान मांडल स्थित देवनारायण मंदिर का मामला भी उठा. मंत्री ने कहा कि यह मामला न्यायालय में लंबित है और अदालत के निर्णय के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. मंत्री जोराराम कुमावत ने स्पष्ट किया कि जिस मंदिर की चर्चा की जा रही है, वह देवस्थान विभाग में दर्ज ही नहीं है. कृपलानी ने मंदिरों के पुजारियों के वेतन वृद्धि को लेकर भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जिस पर मंत्री ने विभागीय प्रक्रिया का हवाला दिया. पूरक प्रश्नों के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मंत्री की तैयारी पर सवाल खड़े किए. उन्होंने आरोप लगाया कि सप्लीमेंट्री प्रश्न पहले से तय था और मंत्री ने उसी के अनुसार जवाब तैयार किया. जूली ने सदन में तीन बार जोर देकर कहा, 'सेटिंग कर रखी है.' आरोपों के बीच सदन में कुछ देर के लिए तीखी नोकझोंक का माहौल बना रहा, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने शांत कराया.
यह भी पढ़ें: विधानसभा में हंगामेदार दिन: पानी की बोतल से लेकर पेपर लीक और जमीन आवंटन तक गूंजे मुद्दे
डग में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय का मामला: डग विधायक कालूराम के सवाल पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने बताया कि डग नगर पालिका क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय खोलने का प्रस्ताव विचाराधीन है. प्रस्ताव मिलने पर आगे कार्रवाई की जाएगी. झालावाड़ के गंगधार थाने की जर्जर स्थिति पर उन्होंने कहा कि मरम्मत के लिए 16.15 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे, लेकिन भवन की स्थिति देखते हुए नए निर्माण पर विचार किया जाएगा. विधायक सुभाष मील के प्रश्न पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने बताया कि सीएचसी रिंगस को क्रमोन्नत कर उप जिला अस्पताल का दर्जा दिया गया है. 33 करोड़ रुपए की लागत से भवन और उपकरणों पर कार्य प्रस्तावित है. 28 स्वीकृत चिकित्सकों में से 21 की नियुक्ति हो चुकी है और शेष पदों पर भर्ती की जाएगी. ट्रॉमा सेंटर की महंगी मशीनें इस वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता से लगाई जाएंगी.

विधायक गौतम का कांग्रेस पर हमला: राजस्थान विधानसभा में मंगलवार को खाद्य एवं ऊर्जा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई. केकड़ी से भाजपा विधायक शत्रुघ्न गौतम ने पूर्व सीएम अशोक गहलोत की तस्वीर वाला बैग लहराते हुए कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने गरीबों और किसानों पर 'नमक-मिर्च' छिड़कने का काम किया. गौतम ने कहा कि पूर्व सीएम ने बिजली को लेकर 'थोथी घोषणाएं' कीं और फूड पैकेट योजना में करोड़ों का घोटाला हुआ. वहीं कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुढ़ानिया ने आरोप लगाया कि किसानों के यहां बीसीआर के नाम पर छापेमारी हो रही है और भाजपा को वोट न देने वालों को निशाना बनाया जा रहा है. कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा ने धौलपुर में बिजली संकट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धौलपुर की बिजली और चंबल का पानी भरतपुर भेजा जा रहा है. दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ.

