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टेंडर घोटाले और 'कांग्रेसी बबूल' पर राजनीति: विधानसभा में गरमाया माहौल

राजस्थान विधानसभा में शिक्षा व पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के 'कांग्रेसी बबूल उखाड़ने' वाले बयान से सियासी पारा गरमाया.

Rajasthan Vidhansabha
राजस्थान विधानसभा (Courtesy: Rajasthan Vidhansabha)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 25, 2026 at 2:36 PM IST

7 Min Read
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जोधपुर: राजस्थान विधानसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष जमकर आमने-सामने आए. विपक्षी विधायकों ने लिफ्ट नहर में टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों द्वारा सदन को गुमराह करने का मामला उठाया. इसी बीच अंग्रेजी बबूल के मुद्दे पर पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर के 'कांग्रेसी बबूलों को समूल नष्ट करने' वाले बयान ने सदन में हंगामा खड़ा कर दिया. वहीं, ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टर न होने से लेकर पेंशन में देरी तक कई मुद्दों पर सरकार घेरे में रही.

तारानगर से कांग्रेस विधायक नरेंद्र बुढ़ानिया ने लिफ्ट नहर में टेंडरों की अनियमितता का मामला उठाकर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. वहीं, नोहर से अमित चाचाण ने उनको गलत जवाब देकर सदन को गुमराह करने वाले अधिकारियों का मंत्री द्वारा संरक्षण करने का मामला उठाते हुए कार्रवाई की मांग की. सदन में अंग्रेजी बबूल और जर्मन घास का मामला उठा तो पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा, 'बबूल कांग्रेस की देन है, हम कांग्रेसी बबूलों को समूल नष्ट कर देंगे'. इस जवाब पर हंगामा हुआ. रेवदर विधायक मोतीराम ने सरकार द्वारा आवंटित जमीनों पर सामाजिक संस्थाओं के काम शुरू करने के बाद निरस्त किए जाने का मामला उठाया. चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह ने आनासागर में डिसिल्टिंग (गाद निकालने) का मामला उठाया, इस पर नगरीय विकास मंत्री झाबरसिंह खर्रा ने संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में अजमेर विकास प्राधिकरण, नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर आनासागर में डिसिल्टिंग का काम शुरू करने के लिए कार्य योजना बनाकर यह काम शुरू करवाने की घोषणा की.

विधानसभा में जनप्रतिनिधियों में नोंकझोक (Courtesy: Rajasthan Vidhansabha)

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शून्यकाल की शुरुआत में तारानगर विधायक नरेंद्र बुढ़ानिया ने कहा कि कुंभाराम लिफ्ट नहर में दो टेंडर हुए, जिनकी राशि 1 करोड़ 92 लाख थी. यह टेंडर जारी होने के बाद पिछले वर्ष 19 मार्च को खोले गए. छह फर्मों ने भाग लिया. तकनीकी बिड के बाद जब वित्तीय बिड खोली गई तो सभी की दरें निर्धारित राशि से कम मिलीं. यह कमी 40 से 53 प्रतिशत तक थी. इस पर जनता ने टेंडर में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विरोध किया. इतनी कम दरों पर टेंडर आने से यह स्पष्ट हुआ कि इतनी बड़ी राशि की आवश्यकता नहीं थी. सरकार का दबाव बनने पर टेंडर वापस ले लिए गए, लेकिन कुछ समय बाद फिर से टेंडर करवाए गए, जिसमें अधिकारियों ने मिलीभगत करते हुए वही पुरानी छह कंपनियों से टेंडर भरवाए. इसमें खेल करते हुए पांच के टेंडर निरस्त कर दिए गए और एक कंपनी पीएम इंफ्रा का टेंडर अप्रूव कर दिया. इस कंपनी ने पिछले टेंडर में 37 प्रतिशत कम (बिलो) राशि भरी थी, जबकि इस बार उसी कंपनी को 0.1 प्रतिशत पर टेंडर दे दिया गया. विधायक ने कहा कि यह मिलीभगत का खेल है, यदि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति रखती है तो इसकी जांच करे. मंत्री सदन में हैं, जवाब दें.

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'छोटे गहलोत' ने दिया भरोसा, सामाजिक पेंशन मिलती रहेगी: बूंदी विधायक हरिमोहन शर्मा ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन में हो रही देरी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि 91 हजार लोगों की पेंशन चार महीने रोक दी गई. पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने इसमें बढ़ोतरी की थी, लेकिन वर्तमान में इसे चलाने वाले मंत्री (अविनाश गहलोत) दे नहीं पा रहे हैं. विधानसभा सत्र शुरू हुआ तो पेंशन जारी हुई है. सरकार 15 प्रतिशत की दर से पेंशन नहीं बढ़ा रही है. मंत्री अविनाश गहलोत ने जवाब देते हुए कहा कि आपने चुनाव में जाते-जाते न्यूनतम पेंशन का कानून बनाया था. हमने इसमें बढ़ोतरी की है. अभी 1300 रुपए पेंशन दे रहे हैं. सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा,'आपको 'छोटा गहलोत' आश्वस्त करता है कि पेंशन निरंतर जारी रहेगी. सरकार ने दस लाख लोगों की पेंशन बढ़ाई है.' नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि कानून के तहत 15 प्रतिशत बढ़नी चाहिए थी, इसलिए इसे हर वर्ष बढ़ाइए.

कांग्रेसी बबूलों को राजस्थान में नहीं रहने देंगे: सहाड़ा विधायक लादूलाल पितलिया ने अपने क्षेत्र में अंग्रेजी बबूल व जर्मन घास (झाड़ियों) का मामला उठाया. विधायक ने कहा किसानों को इसे हटाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है. चारागाह भी इसकी चपेट में हैं. जर्मन घास जहरीली है, इससे प्राकृतिक औषधि वृक्ष व वनस्पतियां खत्म हो रही हैं. इससे हमारा पारिस्थितिक तंत्र गड़बड़ा रहा है, जबकि अंग्रेजी बबूल व जर्मन घास का उपयोग नहीं होता है. सरकार को चाहिए कि नरेगा के माध्यम से योजना बनाकर चारागाह भूमि को साफ करवाए. पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने इसका जवाब देते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर समस्या है. यह प्रतिदिन 30 लीटर पानी सोखने से जलस्तर नीचे जा रहा है. 1960 में तत्कालीन सरकार ने हेलीकॉप्टर से बीज बरसाए थे, जिससे यह सब जगह उग गए हैं. इसे लोग कांग्रेसी बबूल भी कहते हैं. राजस्थान सरकार इस पर विचार कर रही है कि इसे समूल नष्ट कैसे किया जाए?. कांग्रेसी बबूलों को राजस्थान की धरती पर नहीं रहने देंगे. इनका समूल नष्ट करने पर कार्ययोजना बना रहे हैं. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई और हंगामा हुआ.

गुमराह करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई करें : नोहर विधायक अमित चाचण ने नोहर में ट्रॉमा सेंटर का संचालन नहीं किए जाने का मामला उठाया. विधायक ने कहा कि पिछली सरकार ने इसका निर्माण कराया था, लेकिन इस सरकार ने वहां डॉक्टर नहीं लगाए, जबकि कटौती प्रस्ताव के जवाब में मुझे बताया गया कि 6 पद स्वीकृत हैं और डॉक्टर लगा दिए गए हैं, जबकि वहां ऐसा कुछ नहीं है. अधिकारी सदन को गुमराह कर रहे हैं. ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय मंत्री उनका संरक्षण कर रहे हैं. लगातार अधिकारी सदन को गुमराह कर रहे हैं. रतनगढ़ विधायक पूसाराम गोदारा ने तृतीय श्रेणी अध्यापकों के स्थानांतरण का मामला उठाया. गोदारा ने कहा कि विधवा, एकल व दुर्गम स्थलों पर कार्यरत शिक्षकों के लिए अंतर जिला तबादला किया जाए. इससे पहले इनकी डीपीसी करवाई जाए, उसके बाद पारदर्शिता से तबादले किए जाएं. सरकार से नीति नहीं बन पा रही है, ऐसे में सत्र समाप्त होते ही स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू कर काम करें.

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ट्रैक्टर-ट्रॉली की पासिंग छह टन करें : खंडेला विधायक सुभाष मील ने कहा कि परिवहन विभाग ट्रैक्टर-ट्रॉली की पासिंग ढाई टन की लिमिट रखता है, जबकि ट्रॉली सहित वजन 5 टन होता है. ट्रैक्टर-ट्रॉली के परिवहन की व्यावहारिकता को देखते हुए 6 टन पासिंग की जाए और जुर्माना पांच हजार रखा जाए, जो अभी बीस हजार रुपए किया गया है. इससे लाखों किसान जुड़े हुए हैं, इसलिए किसानों को राहत दी जाए. बयाना विधायक डॉ. ऋतु बानावत ने उच्च शिक्षा में गेस्ट फैकल्टी का मामला उठाया. विधायक ने कहा कि संविदा पर निकाली गई भर्ती में इन कार्यरत प्राध्यापकों के बारे में कुछ नहीं सोचा गया है. सरकार को उनके स्थायीकरण पर काम करना चाहिए. ऐसा मध्य प्रदेश में हो रहा है. प्रदेश में सहायक आचार्य की भर्ती होने पर उनको शामिल किया जाए.