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राजस्थान यूनिवर्सिटी RUPA-2026 विवाद: 250 से अधिक PhD सीटें खाली का दावा, राज्यपाल तक पहुंची शिकायत

राजस्थान यूनिवर्सिटी में आरक्षण नियमों की अनदेखी और JRF अभ्यर्थियों के साथ भेदभाव को लेकर राज्यपाल से शिकायत की गई है.

राजस्थान यूनिवर्सिटी
राजस्थान यूनिवर्सिटी (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : September 2, 2026 at 10:34 PM IST

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जयपुर: राजस्थान यूनिवर्सिटी की PhD प्रवेश प्रक्रिया को लेकर विवाद अब लोकभवन तक पहुंच गया है. शिकायतकर्ता राजस्थान विश्वविद्यालय के ईएएफएम (EAFM) विभाग के पोस्ट डॉक्टरल फेलो डॉ. सज्जन सैनी ने राज्यपाल को शिकायत भेजकर विश्वविद्यालय की RUPA (Research University PhD Admission) प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. शिकायत में 985 PhD सीटों में से 250 से अधिक सीटें रिक्त रहने, JRF अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में कम अंक देकर बाहर करने, आरक्षण नियमों की अनदेखी करने और प्रवेश प्रक्रिया के बीच सीट मैट्रिक्स में बदलाव करने के आरोप लगाए गए हैं. शिकायतकर्ता ने राज्यपाल से मामले में हस्तक्षेप कर रिक्त सीटों पर योग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश देने और JRF अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देने की मांग की है. साथ ही, कॉमर्स के विद्यार्थियों को उनकी दूसरी प्राथमिकता के आधार पर BADM विभाग में प्रवेश देने की मांग भी की है.

आरक्षण सूची पर विवाद से शुरू हुआ मामला: लोकभवन पहुंची डॉ. सज्जन सैनी की शिकायत के अनुसार, राजस्थान यूनिवर्सिटी ने 27 मई से 7 जून 2026 तक 985 PhD सीटों के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए थे. इससे पहले 7 मार्च को जारी नोटिफिकेशन में PhD प्रवेश से जुड़े नियम तय किए गए थे. शिकायतकर्ता डॉ. सज्जन सैनी का दावा है कि इन नियमों के मुताबिक प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के बाद सीटों की संख्या में बदलाव नहीं किया जाना था. 17 जून को RUPA कन्वीनर की ओर से इंटरव्यू के लिए विभागवार सूची जारी की गई. शिकायत में आरोप है कि यह सूची राजस्थान सरकार की आरक्षण नीति के अनुरूप नहीं थी. विरोध के बाद 18 जून को इंटरव्यू प्रक्रिया को आगामी आदेश तक रोकना पड़ा. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने आरक्षण संबंधी गलती सुधारने के बजाय छात्रों पर AI के जरिए मार्कशीट और दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने जैसे झूठे आरोप लगाए.

पोस्ट डॉक्टरल फेलो डॉ. सज्जन सैनी (ETV Bharat Jaipur)

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इंटरव्यू के बीच सीटें घटाने का आरोप: शिकायत के मुताबिक, 15 जुलाई को कैटेगरीवार सीट और कट-ऑफ जारी की गई. इसके बाद 19 जुलाई से 7 अगस्त तक इंटरव्यू हुए. इसी दौरान 7 अगस्त को पॉलिटिकल साइंस और EAFM विभाग की सीटें कम करते हुए संशोधित सीट मैट्रिक्स जारी किया गया. इस पर 11 अगस्त को विरोध किया गया. शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया के बीच सीटें कम करना विश्वविद्यालय की सिंडिकेट द्वारा तय नियमों के विपरीत था. विरोध के बाद प्रशासन को सीटें कम करने का आदेश वापस लेना पड़ा.

JRF अभ्यर्थियों को कम अंक देकर बाहर करने का आरोप: शिकायत में सबसे बड़ा आरोप JRF अभ्यर्थियों से जुड़ा है. डॉ. सैनी का दावा है कि अंतिम विषयवार कट-ऑफ और चयन सूची जारी होने के बाद यह सामने आया कि UGC और CSIR-NET JRF पास करने वाले करीब 60 प्रतिशत अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में कम अंक देकर चयन से बाहर कर दिया गया. उन्होंने कहा कि JRF अभ्यर्थियों को PhD प्रवेश की संबंधित कैटेगरी में प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने मांग की है कि JRF, NET और PhD प्रवेश की तीनों श्रेणियों में JRF अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देते हुए सूची की दोबारा समीक्षा की जाए.

250 से ज्यादा सीटें खाली रहने का दावा: शिकायत में दावा किया गया है कि विश्वविद्यालय की कुल 985 PhD सीटों में से 250 से अधिक सीटें अभी भी खाली हैं. ऐसे में इन सीटों पर योग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश देने की मांग की गई है. इसके लिए शिकायतकर्ता ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (MDSU), अजमेर में रिक्त PhD सीटों पर प्रवेश दिए जाने की प्रक्रिया का उदाहरण भी दिया है. शिकायतकर्ता का तर्क है कि यदि समान नियम राज्य के सभी विश्वविद्यालयों पर लागू होते हैं, तो राजस्थान यूनिवर्सिटी में भी रिक्त सीटों को योग्य अभ्यर्थियों से भरा जाना चाहिए.

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BADM की रिक्त सीटों पर प्रवेश की मांग: शिकायत में कॉमर्स के विद्यार्थियों का मुद्दा भी उठाया गया है. इसके अनुसार, ABST, EAFM और BADM विभागों के लिए आवेदन के दौरान छात्रों से प्राथमिकता भरवाई गई थी. ऐसे में जिन छात्रों ने ABST को पहली और BADM को दूसरी प्राथमिकता दी थी, लेकिन पहली प्राथमिकता में उनका चयन नहीं हुआ, उन्हें BADM में खाली सीटों पर प्रवेश देने की मांग की गई है. शिकायतकर्ता के अनुसार, BADM में करीब 40 सीटें खाली हैं. ऐसे में दूसरी प्राथमिकता वाले योग्य छात्रों को इन सीटों पर प्रवेश दिया जा सकता है.

EWS सीटों को UR से भरने पर भी सवाल: शिकायत में अर्थशास्त्र विभाग की सीटों को लेकर भी सवाल उठाया गया है. दावा किया गया है कि EWS की चार सीटों में से दो सीटें खाली रहने के बावजूद उन्हें सामान्य श्रेणी से भर दिया गया. शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि एक विभाग में रिक्त सीटों को दूसरी श्रेणी के योग्य अभ्यर्थियों से भरा जा सकता है, तो अन्य विभागों में रिक्त सीटों के मामले में भी यही व्यवस्था लागू होनी चाहिए. शिकायत में अर्थशास्त्र विभाग के सीट मैट्रिक्स और प्रवेश संख्या को लेकर भी सवाल उठाया गया है. इसमें UR की 13 स्वीकृत सीटों के मुकाबले 15 छात्रों को प्रवेश देने का दावा किया गया है.

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कुछ JRF अभ्यर्थियों के कोर्ट से प्रोविजनल एडमिशन का दावा: वहीं, कुछ JRF अभ्यर्थियों को न्यायालय के आदेश के बाद प्रोविजनल (अस्थायी) एडमिशन मिला है. शिकायतकर्ता ने कहा कि हर विद्यार्थी के लिए न्यायालय जाना आर्थिक और मानसिक रूप से संभव नहीं है. ऐसे में विश्वविद्यालय स्तर पर ही नीतिगत निर्णय लेकर योग्य अभ्यर्थियों को न्याय मिलना चाहिए.

राज्यपाल की से ये प्रमुख मांगें:

  • PhD प्रवेश की तीनों कैटेगरी में JRF अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाए.
  • कॉमर्स विभागों में BADM को दूसरी प्राथमिकता देने वाले योग्य विद्यार्थियों को रिक्त सीटों पर प्रवेश दिया जाए.
  • सभी विभागों में रिक्त रह गई PhD सीटों पर योग्य अभ्यर्थियों को प्रवेश दिया जाए.
  • राजस्थान यूनिवर्सिटी की संपूर्ण PhD प्रवेश प्रक्रिया की उच्च स्तरीय समीक्षा हो.
  • राज्य सरकार की आरक्षण नीति और लागू नियमों के अनुसार संशोधित प्रवेश सूची जारी की जाए.

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