राजस्थान यूनिवर्सिटी में 4 जून से एडमिशन शुरू, स्किल कोर्स और अप्रेंटिसशिप पर रहेगा फोकस
राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. छात्र विश्वविद्यालय की प्रवेश संबंधी वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे.

Published : May 31, 2026 at 3:14 PM IST
जयपुर: राजस्थान विश्वविद्यालय के संघटक कॉलेजों में सत्र 2026-27 के लिए यूजी और टेक्निकल कोर्सेज में प्रवेश प्रक्रिया 4 जून से शुरू होने जा रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप इस बार प्रवेश प्रक्रिया में स्किल डेवलपमेंट, एंप्लॉयमेंट बेस्ड एजुकेशन और अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया गया है. विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि नए सत्र में छात्रों को न केवल डिग्री, बल्कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
4 जून से शुरू होगी ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया : राजस्थान विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. छात्र विश्वविद्यालय की प्रवेश संबंधी वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकेंगे. ये वेबसाइट जल्द ही राजस्थान विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी जाएगी. विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए अलग-अलग आवेदन पत्र भरना अनिवार्य होगा.
राजस्थान विश्वविद्यालय की केंद्रीय प्रवेश समिति के संयोजक प्रो. राम अवतार शर्मा ने बताया कि विश्वविद्यालय के चारों संघटक महाविद्यालयों महारानी महाराजा कॉमर्स और राजस्थान कॉलेज में संचालित बीए, बीकॉम, बीएससी, बीसीए, बीबीए और ललित कला संकाय के बीपीए और बीवीए सहित विभिन्न यूजी कोर्सेस में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 4 जून 2026 से शुरू होगी. इसके अलावा बीटेक और एमटेक कोर्सेस में भी वरीयता आधारित नए प्रवेश की प्रक्रिया इसी दिन से शुरू होगी. सभी कोर्सेस सेमेस्टर प्रणाली के तहत तीन और चार वर्षीय स्वरूप में संचालित किए जाएंगे.
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हार्ड कॉपी जमा कराने की जरूरत नहीं : इस बार छात्रों को आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी जमा कराने की आवश्यकता नहीं होगी. ऑनलाइन आवेदन ही मान्य माना जाएगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन करने से पहले प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित ब्रोशर का ध्यानपूर्वक अध्ययन करें, ताकि पात्रता, दस्तावेज और अन्य शर्तों की जानकारी स्पष्ट रूप से मिल सके.
कौशल आधारित शिक्षा पर रहेगा विशेष फोकस : राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत छात्रों को केवल एकेडमिक ज्ञान तक सीमित न रखते हुए कौशल विकास और रोजगार से जोड़ने की दिशा में विश्वविद्यालय ने कई नए प्रयास किए हैं. इसके तहत छात्रों के लिए माइक्रो सर्टिफिकेट, व्यवहारिक अनुभव आधारित प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) संचालित किए जाएंगे.
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को मजबूत वित्तीय ज्ञान, व्यवहारिक कौशल और कार्यस्थल के लिए तैयार करना है. इसके अंतर्गत बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा (BFSI), ह्यूमन रिसोर्स ऑपरेशंस और कंटेंट एंड क्रिएटिव राइटिंग जैसे रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं.
तीसरे वर्ष में मिलेगी अप्रेंटिसशिप : अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम की सबसे बड़ी विशेषता ये होगी कि छात्रों को तीसरे वर्ष में राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रशिक्षण योजना (NATS) के तहत उद्योगों और संस्थानों में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा. इस दौरान छात्रों को कम से कम 9 हजार रुपए प्रतिमाह का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा. इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कार्य अनुभव और आर्थिक सहयोग दोनों प्राप्त होंगे.
उच्च शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की पहल : विश्वविद्यालय का मानना है कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप शुरू किए जा रहे कौशल और अप्रेंटिसशिप आधारित कार्यक्रम छात्रों को पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़ाकर रोजगार और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ेंगे. इससे स्नातक स्तर पर ही छात्रों को कार्य अनुभव प्राप्त होगा और उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी.

