भाजपा का तंज- रणनीति नहीं, विचारधारा बदलें...कांग्रेस ने कहा- पार्टी का 100 साल का इतिहास
कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर सियासत तेज हो गई है.

Published : July 9, 2026 at 3:12 PM IST
जयपुर: राजस्थान में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान के तहत करीब 15 लाख पदाधिकारियों की नियुक्ति और संगठन के संचालन में ऑनलाइन और हाईटेक तकनीक के इस्तेमाल ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. टास्क मैनेजमेंट, मॉनिटरिंग और रिव्यू जैसी व्यवस्थाओं के जरिए कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय और जवाबदेह बनाने की कोशिश कर रही है.
भाजपा की कार्यप्रणाली की तर्ज पर शुरू हुई कांग्रेस की संगठन सृजन अभियान पर भाजपा ने तंज कसना शुरू कर दिया है. पार्टी नेताओं ने कहा कि कार्यप्रणाली तो अपना लेंगे, लेकिन कार्यशैली कहां से लाएंगे? कांग्रेस को "परिवार प्रथम" की राजनीति छोड़कर "राष्ट्र प्रथम" की भावना अपनानी चाहिए. तकनीक अपनाने से अधिक महत्वपूर्ण विचारधारा है. वहीं, कांग्रेस ने जवाब में कहा कि भारतीय जनता पार्टी बने कुछ साल हुए हैं. कांग्रेस का इतिहास 100 साल से अधिक पुराना है.
"परिवार प्रथम" नही "राष्ट्र प्रथम" की भावना : प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस भाजपा की कार्यशैली की नकल कर रही है, लेकिन उसे "परिवार प्रथम" की राजनीति छोड़कर "राष्ट्र प्रथम" की भावना अपनानी चाहिए. उनका दावा है कि जनता कांग्रेस को पहले ही नकार चुकी है और केवल संगठनात्मक बदलाव से राजनीतिक भरोसा वापस नहीं आएगा. राठौड़ का कहना है कि उसका संगठन पहले से ही तकनीक आधारित मॉनिटरिंग और मजबूत बूथ नेटवर्क पर काम कर रहा है.
कांग्रेस किस तरह से काम कर रही है, वो उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है. इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल को व्यक्ति, परिवार और पार्टी से ऊपर राष्ट्र को रखना चाहिए. भाजपा पहले राष्ट्र, उसके बाद पार्टी और फिर व्यक्ति की भावना के साथ काम करती है, जबकि कांग्रेस पहले व्यक्ति, फिर पार्टी और तीसरे स्थान पर राष्ट्र को रखती है. राठौड़ ने कहा कि कोरा दिखावा करने से नहीं, मन से राष्ट्र को प्रथम मानना चाहिए. इसके लिए अगर कांग्रेस के कार्यकर्ता चाहें तो हम उन्हें राष्ट्र प्रथम का प्रशिक्षण दे देंगे. वैसे भी भाजपा का इन दिनों प्रशिक्षण शिविर चल ही रहे हैं.
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क्या है संगठन सृजन अभियान ? : राजस्थान में कांग्रेस ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत बनाने के लिए "संगठन सृजन अभियान" के तहत व्यापक संगठनात्मक ढांचा तैयार किया है. पार्टी के अनुसार इस अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में लगभग 15 लाख पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं को विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. इसका उद्देश्य संगठन को गांव, वार्ड और बूथ स्तर तक सक्रिय बनाना तथा प्रत्येक कार्यकर्ता को स्पष्ट जिम्मेदारी देना है.
कांग्रेस ने इस अभियान में पारंपरिक संगठनात्मक व्यवस्था के साथ-साथ डिजिटल और हाईटेक टेक्नोलॉजी का भी व्यापक उपयोग किया है. पार्टी का दावा है कि पदाधिकारियों का डेटा, जिम्मेदारियां और संगठनात्मक गतिविधियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर तैयार किया गया है, जिससे संगठन की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है. इन कार्यों की टास्क मैनेजमेंट प्रणाली के माध्यम से निगरानी की जाती है. जिला, ब्लॉक और प्रदेश स्तर के प्रभारी ऑनलाइन माध्यम से यह देख सकते हैं कि किस पदाधिकारी को कौन-सा कार्य सौंपा गया है और उसकी प्रगति क्या है.
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कांग्रेस की संगठन संरचना :
- बूथ से प्रदेश तक एकीकृत संरचना.
- प्रदेश भर में कुल 15 लाख पदाधिकारी.
- कांग्रेस प्रदेश में 52 हजार बूथ पर 11 सदस्य कमेटी बनाई.
- 14 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों में 21 सदस्य कार्य करणी बनाई है.
- ये ग्राम इकाई का कांग्रेस पहली बार गठन किया.
- इसी तरह 400 ब्लॉक में भी 31 सदस्य कार्यकारिणी बनाई है.
- 2200 मंडल में 21 सदस्य कार्यकारणी बनाई है.
- हर वार्ड में 11 सदस्य कार्यकारणी का गठन.
- कांग्रेस संगठनात्मक जिलों में 51 सदस्य कार्यकारणी का गठन.
- 22 विभाग प्रकोष्ठों में 3000 हजार पदाधिकारी बनाए हैं.
- हाईटेक और डिजिटल संगठन पर जोर.
- टास्क मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग.
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग और रिव्यू सिस्टम.
सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे : भाजपा के तंज पर कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी ने भाजपा को उसके राजनीतिक इतिहास की याद दिलाई. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी का गठन हुए कुछ दशक ही हुए हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास 100 वर्ष से भी अधिक पुराना है. जिस संगठनात्मक ढांचे की आज कांग्रेस बात कर रही है, वह वर्षों से पार्टी की कार्यप्रणाली का हिस्सा रहा है. चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा को पहले यह बताना चाहिए कि उसका राजनीतिक सफर कहां से शुरू हुआ और उसके अनेक वरिष्ठ नेता पहले किस राजनीतिक दल और सरकारों का हिस्सा रहे हैं.
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उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का संगठनात्मक ढांचा ही कमजोर है, जिसका उदाहरण राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में सवा से डेढ़ साल लगना है. उन्होंने कहा कि भाजपा आज तक मोर्चों की पूरी टीम तक समय पर गठित नहीं कर पाई. ऐसे में कांग्रेस के संगठन पर सवाल उठाना उनकी बोखला को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत है और लगातार विस्तार कर रहा है.
भाजपा संगठन की सामान्य संरचना :
- प्रदेश स्तर: प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष, मीडिया, आईटी, सोशल मीडिया, प्रवक्ता, विभिन्न विभागों एवं मोर्चों के पदाधिकारी.
- जिला स्तर: जिला अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री, कोषाध्यक्ष तथा मोर्चों के पदाधिकारी.
- मंडल स्तर: मंडल अध्यक्ष, महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्री एवं कार्यसमिति.
- शक्ति केंद्र स्तर: संयोजक एवं सह-संयोजक.
- बूथ स्तर: बूथ अध्यक्ष, बूथ समिति, बूथ एजेंट, पन्ना प्रमुख और विभिन्न अभियान प्रभारी.
प्रदेश भर में कुल 60 लाख पदाधिकारी का दावा :
- प्रदेश: 200-250 पदाधिकारी.
- 44 जिलों में: लगभग 4,000-4,500 पदाधिकारी.
- 1138 से अधिक मंडलों में: जिसमें एक बूथ अध्यक्ष और 15 सदस्य कार्यकारणी, लगभग 40 हजार पदाधिकारी.
- बूथ : 61 हजार 404: जिसमें एक बूथ अध्यक्ष और 15 सदस्य कार्यकारणी. कुल 2 से ढाई लाख पदाधिकारी.
- शक्ति केंद्र : 8 हजार 90 शक्ति केंद्र, प्रत्येक शक्ति केंद्र पर एक संयोजक, सह संयोजक.
- जिला : प्रदेश भर में भाजपा के 44 संगठनात्मक जिले हैं, जिसमें भी लगभग 40 से 50 सदस्य टीमें होती हैं.
प्रदेश भाजपा में 7 मोर्चे हैं :
- सभी 7 मोर्चों में प्रदेश टीम की तरह बूथ मंडल तक संगठन संरचना होती है. इसमें भी लगभग 4 से साढ़े 4 लाख पदाधिकारी.
- बूथ मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग.
- ऑनलाइन मॉनिटरिंग और रिव्यू सिस्टम.
- सभी अभियान संयोजक जो सरल ऐप के जरिए मॉनिटरिंग करते हैं.
मजबूत संगठन राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत : राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्यामसुंदर शर्मा का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस की चुनावी हार के पीछे सबसे बड़ा कारण संगठन की कमजोरी, कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी और बूथ स्तर तक प्रभावी नेटवर्क का अभाव रहा है. ऐसे में संगठन सृजन अभियान के माध्यम से नए सिरे से व्यापक संगठनात्मक ढांचा तैयार करना कांग्रेस के लिए सकारात्मक पहल है. यदि 15 लाख पदाधिकारियों की नियुक्ति केवल कागजों तक सीमित न रहकर उन्हें स्पष्ट जिम्मेदारियां और नियमित मॉनिटरिंग मिले, तो इसका लाभ पार्टी को आगामी चुनावों में मिल सकता है.
उन्होंने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका मजबूत और अनुशासित संगठन माना जाता है, जिसने चुनावी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कांग्रेस अब उसी तरह तकनीक आधारित टास्क मैनेजमेंट, मॉनिटरिंग और जवाबदेही की व्यवस्था विकसित कर रही है. ऐसे में स्वाभाविक है कि संगठनात्मक बढ़त रखने वाली भाजपा कांग्रेस के इस प्रयास पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दे रही है, क्योंकि मजबूत संगठन किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत होता है. अब प्रदेश में भाजपा को सत्ता परिवर्तन के मिथक को तोड़ना है तो कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान का तोड़ भी निकालना होगा.

