झूठा मुकदमा दर्ज कराया तो खैर नहीं, गुमराह करने वालों पर पुलिस सख्त, एक माह में 75 लोगों पर एक्शन
थाने में दर्ज करवाया मुकदमा झूठा पाए जाने पर पुलिस कोर्ट में पेश करती है रिपोर्ट.

Published : July 3, 2026 at 9:49 AM IST
जयपुर: आपसी रंजिश या निजी दुश्मनी निकालने के लिए दुष्कर्म, लूट या अन्य गंभीर अपराध की झूठी कहानी बनाकर थाने में मुकदमा दर्ज करवाने और पुलिस को गुमराह करने वालों की अब खैर नहीं. कोई व्यक्ति अपनी दुश्मनी निकालने के लिए गंभीर अपराध की झूठी कहानी बनाकर पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाता है तो उसके खिलाफ पुलिस एक्शन लेगी. ऐसे लोग पुलिस को गुमराह कर अब बच नहीं सकते. पुलिस को गुमराह करने और निर्दोष लोगों को परेशान करने वाले ऐसे समाजकंटकों के खिलाफ डीजीपी राजीव कुमार शर्मा ने कड़ा रुख दिखाया है. उनके निर्देश पर पुलिस ने ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ा विधिक अभियान छेड़ रखा है.
1,870 मामलों में पुलिस ने लिया संज्ञान : एडीजी (क्राइम) बिपिन कुमार पांडे ने बताया कि पुलिस की मजबूत पैरवी के कारण जून महीने (01 जून से 28 जून 2026) के बीच प्रदेश में 75 ऐसे मामलों में न्यायालयों ने फैसला सुनाया है. कोर्ट ने झूठी कहानी रचने वाले दोषियों को सजा और आर्थिक जुर्माने से दंडित किया है. इसके साथ ही, पुलिस की मुस्तैदी से 1,870 ऐसे मामलों में अदालतों ने संज्ञान लिया है. इनमें झूठी शिकायत करने वालों पर अब बकायदा केस चलाया जाएगा.
नागौर में सबसे ज्यादा मामले: उन्होंने बताया, जब पुलिस अपनी तफ्तीश में किसी मामले को झूठा पाती है तो न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करती है. इसमें राज्य के कई जिलों ने बेहतरीन काम किया है. झूठी कहानियां रचने वालों को कोर्ट के कटघरे में खड़ा करने में नागौर जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा. वहां जून महीने में 292 नए मामलों पर कोर्ट ने संज्ञान लिया. जयपुर ग्रामीण 247 नए मामलों के साथ दूसरे स्थान पर और अलवर (212) तीसरे स्थान पर रहा. इसके अलावा जयपुर दक्षिण में 139, कोटपुतली-बहरोड़ में 120, हनुमानगढ़ में 110, जयपुर पश्चिम में 71 और जयपुर उत्तर में 59 ऐसे मामलों में कानूनी शिकंजा कसा गया है.
तथ्य छुपाकर गुमराह करने वालों को मिली सजा: वे बोले, जून महीने में कुल 75 मामलों में कोर्ट ने दोषियों को सजा दी और जुर्माना ठोका. मजबूत विधिक पैरवी के दम पर हनुमानगढ़ पुलिस ने रिकॉर्ड 18 मामलों में दोषियों को कोर्ट से सजा व जुर्माना मुकर्रर कराया. इस अभियान के दौरान प्रतापगढ़ पुलिस की सटीक पैरवी कोर्ट ने 9 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई. जयपुर ग्रामीण में 6 मामलों, कोटा शहर में 5, अलवर, बांसवाड़ा व ब्यावर में 4-4, सवाई माधोपुर में 3, जयपुर दक्षिण, धौलपुर, झुंझुनू, डूंगरपुर, सिरोही, झालावाड़ और भीलवाड़ा में 2-2 तथा बीकानेर चूरू और जीआरपी अजमेर के 1-1 मामले में कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया.
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इसलिए दर्ज होते हैं झूठे मुकदमे: पुलिस जांच में सामने आया कि कई लोग जमीन विवाद, पैसों के लेनदेन या आपसी रंजिश के कारण दूसरों को डराने को पुलिस तंत्र का गलत इस्तेमाल करते हैं. इससे न केवल पुलिस का कीमती समय बर्बाद होता है, बल्कि उन वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है, जिन्हें पुलिस की सबसे ज्यादा जरूरत है. पुलिस मुख्यालय ने साफ चेतावनी दी है कि जो कोई भी व्यक्ति झूठे साक्ष्य गढ़ेगा या झूठी एफआईआर कराएगा, उसके खिलाफ कोर्ट के माध्यम से त्वरित ट्रायल कराया जाएगा.
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