शहरी सरकार की जंग : लापरवाही पर निर्वाचन आयोग सख्त, कहा- समय पर निर्देशों की पूरी तरह पालना हो
राज्य निर्वाचन आयोग ने रिटर्निंग अधिकारियों को चुनावी प्रशिक्षण दिया.

Published : August 24, 2026 at 3:33 PM IST
जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकाय आम चुनाव-2026 की तैयारियां अब पूरी तरह चुनावी मोड में पहुंचती दिखाई दे रही हैं. एक तरफ राजनीतिक दल शहरों की सरकार पर कब्जे के लिए टिकट चयन, स्थानीय समीकरण और चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य निर्वाचन आयोग भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी तैयारियों को अंतिम चरण में पहुंचा रहा है.
सोमवार को राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह की अध्यक्षता में रिटर्निंग अधिकारियों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया. शासन सचिवालय स्थित राज्य निर्वाचन आयोग के सभागार में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुए प्रशिक्षण में प्रदेश के सभी जिलों के संबंधित अधिकारी जुड़े. आयुक्त ने जिलेवार चुनाव तैयारियों की समीक्षा करते हुए अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली. अधिकारियों से चुनाव कार्य में आ रही दिक्कतों पर फीडबैक लिया गया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.
मतदाता सूची और संवेदनशील बूथों पर फोकस : राज्य निर्वाचन आयुक्त ने मतदाता सूचियों में संशोधन और अद्यतन की स्थिति की समीक्षा की, साथ ही दिव्यांग मतदाताओं के लिए मतदान केंद्रों पर आवश्यक सुविधाओं और संवेदनशील और क्रिटिकल मतदान केंद्रों की तैयारियों की भी जानकारी ली. आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित नहीं रहे. दिव्यांग और जरूरतमंद मतदाताओं को मतदान के दौरान आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया.
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लापरवाही पर आयोग सख्त : चुनाव तैयारियों में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाने वाले जिलों और अधिकारियों पर राज्य निर्वाचन आयुक्त ने नाराजगी जताई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्वाचन कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, सभी अधिकारियों को तय समय सीमा में चुनाव संबंधी कार्य पूरे करने और आयोग के निर्देशों की पूरी तरह पालना करने के निर्देश दिए गए. प्रशिक्षण में रिटर्निंग अधिकारियों को नामांकन, मतदान और मतगणना सहित निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की जानकारी दी गई. अधिकारियों की शंकाओं का समाधान भी किया गया.
अब वार्ड से लेकर मतदान केंद्र तक तैयारी : निकाय चुनाव में राजनीतिक दलों के लिए जहां सबसे बड़ी चुनौती सही उम्मीदवार का चयन और वार्डवार समीकरण साधना है. वहीं, निर्वाचन आयोग के सामने चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरा कराने की जिम्मेदारी है. आयोग संवेदनशील और क्रिटिकल बूथों पर विशेष निगरानी की तैयारी कर रहा है.
इस तरह राजस्थान में शहरी सरकार के चुनाव की तस्वीर अब धीरे-धीरे साफ होने लगी है. एक तरफ राजनीतिक दलों का फोकस टिकट और चुनावी गणित पर है, तो दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का फोकस निष्पक्ष चुनाव की व्यवस्था पर. आने वाले दिनों में दोनों मोर्चों पर तैयारियां और तेज होने की संभावना है.

