MONSOON : एक सप्ताह की देरी से पहुंचा मानसून, जयपुर में देर रात झमाझम बारिश, ट्रॉमा सेंटर के वार्डों में भरा पानी
प्रदेश में मानसून दाखिल होने के बाद अब दो सप्ताह तक मेहरबान रहने के आसार हैं.

Published : July 3, 2026 at 12:31 PM IST
जयपुर : आखिरकार बारिश का इंतजार खत्म हुआ और दक्षिण-पश्चिम मानसून ने सामान्य से सात दिन की देरी के बाद गुरुवार को राजस्थान में दस्तक दे दी. मानसून ने बंगाल की खाड़ी की शाखा के जरिए दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के झालावाड़ जिले से प्रवेश किया और पहले ही दिन पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों तक पहुंच गया. राजधानी जयपुर में भी देर रात झमाझम बारिश हुई, जिससे भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार दिनों में मानसून पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा, जबकि 14 जुलाई तक अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश का दौर जारी रहेगा. मौसम विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी मानसून सक्रिय होगा. यहां तेज हवाओं के साथ बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी. अगले चार दिनों में पूरा प्रदेश मानसूनी प्रभाव में आ जाएगा.
पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में हुई मानसून की एंट्री : मौसम विज्ञान केंद्र, जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार इस बार मानसून ने सामान्य तिथि 25 जून के बजाय 2 जुलाई को राजस्थान में प्रवेश किया. गुरुवार सुबह झालावाड़ जिले की ओर से एंट्री करते हुए मानसून ने कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी, टोंक, जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ के आंशिक हिस्सों सहित पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों को प्रभावित किया. मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल टोंक, जयपुर और अलवर से होकर गुजर रही है. जयपुर जिले का उत्तरी-पूर्वी हिस्सा मानसूनी रेखा के दायरे में आ चुका है, जबकि पूरे जिले के कवर होने की प्रक्रिया जारी है.

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जयपुर में देर रात बरसे मानसूनी बादल : गुरुवार को सुबह से ही कोटा, भीलवाड़ा, टोंक और आसपास के इलाकों में अच्छी बारिश हुई. वहीं देर रात राजधानी जयपुर में भी मानसून ने जोरदार दस्तक दी. बस्सी, कानोता, शाहपुरा, पावटा, विराटनगर समेत कई इलाकों में हल्की से मध्यम और कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की गई. मानसून की पहली बारिश के साथ ही तापमान में गिरावट आई और लोगों को गर्मी से राहत मिली.
इस बीच जल संसाधन विभाग ने पिछले 24 घंटे के दौरान जिले में हुई बारिश के आंकड़े जारी किए हैं. विभाग के अनुसार सबसे अधिक 84 मिलीमीटर वर्षा सांभर में दर्ज की गई. इसके बाद फागी में 70 मिलीमीटर, सांगानेर में 53 मिलीमीटर, माधोराजपुरा में 48 मिलीमीटर, मौजमाबाद और नरेना में 36-36 मिलीमीटर, चौमूं में 38 मिलीमीटर, दूदू में 31 मिलीमीटर, फुलेरा में 23 मिलीमीटर, जयपुर शहर में 20 मिलीमीटर तथा किशनगढ़ रेनवाल और कोटखावदा में 18-18 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई.
राजधानी जयपुर में मानसून की पहली जोरदार बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दिलाई, वहीं शहर की तैयारियों की पोल भी खोलकर रख दी. गुरुवार देर रात हुई तेज बारिश का असर शहर के कई हिस्सों में देखने को मिला. सबसे गंभीर स्थिति प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल ट्रॉमा सेंटर में रही, जहां बारिश का पानी छत से रिसकर ग्राउंड फ्लोर तक पहुंच गया. अस्पताल की मुख्य इमरजेंसी, आईसीयू, ईसीजी कक्ष, एक्स-रे रूम समेत कई महत्वपूर्ण हिस्सों में पानी भर गया. बरामदों और वार्डों में जलभराव होने से मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. मानसून की पहली ही बारिश में अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए, क्योंकि बारिश का पानी चिकित्सा सेवाओं तक पहुंच गया और कर्मचारियों को भी कामकाज में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
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बारिश का असर केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं रहा. शहर के झोटवाड़ा इलाके में देर रात हुई तेज बारिश के कारण कई स्थानों पर सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं. बारिश के पानी के तेज बहाव से सड़क किनारे की मिट्टी लगभग तीन-तीन फीट तक धंस गई, जिससे स्थानीय आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया. कई मार्गों पर यातायात रोकना पड़ा और वाहन चालकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ी. लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा, जबकि कई क्षेत्रों में जलभराव और सड़क धंसने के कारण आवाजाही प्रभावित रही.

अगले चार दिन में पूरा राजस्थान होगा कवर : मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि वर्तमान स्थिति को देखते हुए मानसून अगले दो से चार दिनों में पूरे राजस्थान में फैल जाएगा. अगले पांच से सात दिनों तक जयपुर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर और अजमेर संभाग में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा. इस दौरान अधिकांश क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जबकि पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में कई स्थानों पर भारी से अतिभारी वर्षा होने की संभावना है.
बंगाल की खाड़ी से आई मानसून की शाखा : राजस्थान में सामान्यतः मानसून दो दिशाओं से प्रवेश करता है. एक शाखा बंगाल की खाड़ी से ओडिशा, बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश होते हुए कोटा, बारां और झालावाड़ के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करती है. दूसरी शाखा अरब सागर से गुजरात के रास्ते डूंगरपुर, बांसवाड़ा और उदयपुर पहुंचती है. इस वर्ष सबसे पहले बंगाल की खाड़ी वाली शाखा सक्रिय हुई है, जिसके कारण पूर्वी राजस्थान में मानसून की शुरुआत हुई.
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मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी में नया लो प्रेशर सिस्टम सक्रिय हो गया है. इसके प्रभाव से अगले दो सप्ताह तक राजस्थान में मानसून को लगातार नमी मिलती रहेगी. इसी कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश होने के आसार हैं. विशेष रूप से पूर्वी, दक्षिण-पूर्वी और मध्य राजस्थान में कई दौर की तेज बारिश देखने को मिल सकती है. वहीं पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर और बीकानेर संभाग में भी आगामी दिनों में आंधी और बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी.
अगले एक सप्ताह तक मूसलाधार बारिश के संकेत : जयपुर में मानसून की शुरुआत भले ही कुछ दिन देर से हुई हो, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि अगले एक सप्ताह तक मानसूनी हवाएं सक्रिय रहेंगी. इस दौरान बादल छाए रहेंगे और ज्यादातर इलाकों में औसत से अच्छी बारिश होगी. कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है. मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव, बिजली गिरने और तेज बारिश के दौरान जरूरी सावधानी बरतने की हिदायत दी है.
दूसरी और गुरुवार रात 11:30 बजे के बाद राजधानी जयपुर के अलग-अलग इलाकों में शुरू हुई बारिश का दौरा सुबह 4:00 बजे तक जारी रहा. इस दौरान कालवाड़ रोड, झोटवाड़ा, सिरसी रोड, वैशाली नगर, अजमेर रोड, मानसरोवर, सांगानेर, चौमूं, रेनवाल, फागी और फुलेरा-सांभर समेत कई इलाकों में बारिश देखने को मिली. राजधानी जयपुर के कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया, तो जल भराव के कारण रास्ते क्षतिग्रस्त नजर आए. कुछ जगहों पर नालों में कचरा फंस जाने के कारण भी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. सफाई कर्मियों की हड़ताल खत्म होने के अगले ही दिन बारिश आने के कारण राजधानी वासियों को परेशानियों से दो-चार होना पड़ा.
दस्तक के साथ ही चार इंच तक बरसात : मानसून ने प्रवेश करते ही कई जिलों में जोरदार बारिश कराई. अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक जिलों में चार इंच तक वर्षा दर्ज की गई. देरी से पहुंचने के बावजूद राहत की बात यह है कि आगामी दो सप्ताह तक मानसून सक्रिय रहने के कारण अच्छी बारिश की संभावना बनी हुई है. इससे खरीफ फसलों की बुवाई को भी गति मिलेगी और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने की उम्मीद है.
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जुलाई में पहले भी हो चुकी है मानसून की एंट्री : राजस्थान में जुलाई महीने में मानसून का प्रवेश पहले भी कई बार हो चुका है. साल 2019 में मानसून 2 जुलाई को, 2014 में 3 जुलाई को, 2012 में 5 जुलाई को, 2010 और 2009 में 3 जुलाई को, 2008 में 10 जुलाई और 2007 में 15 जुलाई को प्रदेश में पहुंचा था. दिलचस्प बात यह है कि 2014 और 2019 में भी मानसून जुलाई में पहुंचने के बावजूद पूरे सीजन में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई थी. इससे संकेत मिलता है कि शुरुआती देरी का पूरे मानसून सीजन पर जरूरी नहीं कि नकारात्मक असर पड़े.
आकाशीय बिजली गिरने से डूंगरपुर में झुलसे तीन बच्चे : मानसून की शुरुआत के बीच डूंगरपुर जिले से दुखद खबर भी सामने आई. जिले के भचड़िया गांव में गुरुवार को एक मकान के आंगन में आकाशीय बिजली गिरने से तीन बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए. घायलों की पहचान छह वर्षीय हर्षिल पुत्र रामलाल डामोर, छह वर्षीय सूर्यवीर तथा दस वर्षीय राजदीप पुत्र बाबूलाल डामोर के रूप में हुई है. तीनों बच्चों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है.
किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत भरी शुरुआत : मानसून की देरी ने किसानों की चिंता जरूर बढ़ा दी थी, लेकिन अब अच्छी बारिश की संभावना से राहत मिली है. अगले दो सप्ताह तक सक्रिय मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने, बांधों और जलाशयों में पानी की आवक बढ़ने तथा पेयजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है. मौसम विभाग का मानना है कि यदि वर्तमान मौसम प्रणाली इसी तरह सक्रिय रही तो जुलाई का पहला पखवाड़ा प्रदेश के लिए अच्छी बारिश लेकर आएगा.
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