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जानलेवा हमला मामला: अजमेर दरगाह खादिमों की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने खारिज की अपील

हाईकोर्ट ने अजमेर दरगाह के पूर्व खादिम सैयद तारिक चिश्ती और उनके सहयोगियों की 7 साल की सजा बरकरार रखी, सजा निलंबन की याचिका खारिज.

राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 28, 2026 at 8:47 PM IST

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने जानलेवा हमले के मामले में अजमेर दरगाह खादिमों की संस्था अंजुमन सैयद जादगान के पूर्व सह सचिव सैयद तारिक चिश्ती, उनके बेटे सैयद तौसीफ चिश्ती और भांजे सैयद फखर जमाली को निचली कोर्ट से सुनाई 7 साल की सजा के आदेश को बरकरार रखा है. वहीं अदालत ने सजा को निलंबित करने से इनकार करते हुए इस संबंध में दायर प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया.

जस्टिस विनोद कुमार भारवानी ने यह आदेश अभियुक्तों की क्रिमिनल अपील में दायर सजा निलंबन प्रार्थना पत्रों पर दिए. प्रार्थना पत्र में अपील के निस्तारण तक सजा स्थगित कर जमानत देने का आग्रह किया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत ने तथ्यों को देखते हुए दंडादेश पारित किया है. अभियुक्तों की अभिरक्षा की अवधि भी कम है. ऐसे में उनकी सजा को निलंबित नहीं किया जा सकता.

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मामले से जुड़े वकील दीपक चौहान ने बताया कि परिवादी हाजी सैयद बिलाल हुसैन चिश्ती ने पुलिस को पर्चा बयान दिया था कि वह 16 जून 2014 को सुबह 11.15 बजे अपनी हवेली के बाहर मुख्य सड़क पर आया तो पीछे से तारिक जमाली ने तलवार और फखर जमाली और तौसीफ चिश्ती ने हथियारों से उस पर हमला किया. इससे उसके सिर व पीठ पर गंभीर चोट लगी. पुलिस ने मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया, जिस पर सुनवाई करते हुए अजमेर की महिला उत्पीड़न मामलों की विशेष अदालत ने गत 7 नवंबर को अभियुक्तों को सात साल की सजा सुनाई थी, जिसे अपील में चुनौती दी गई.

वहीं, एक दूसरे मामले में पॉक्सो मामलों की विशेष अदालत क्रम-1, महानगर द्वितीय ने नाबालिग को बहला फुसलाकर अपने साथ कई जगह ले जाने और इस दौरान उसके साथ कई बार दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त आरिफ उर्फ इदरीश को 20 साल की सजा सुनाई है. इसके साथ ही पीठासीन अधिकारी विकास कुमार खंडेलवाल ने अभियुक्त पर 1.20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.