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एसीबी डीआईजी पेश, हाईकोर्ट ने कहा- करें कार्रवाई, थानों में जब्त वाहनों के निस्तारण पर मांगा जवाब

हाईकोर्ट ने घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी को कार्रवाई करने को कहा. थानों में लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण को लेकर मांगा जवाब.

Rajasthan High Court
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 23, 2026 at 8:53 PM IST

5 Min Read
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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी को कार्रवाई करने को कहा है. जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश टीएन शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए. वहीं, सरकार से रिपोर्ट पेश कर बताने को कहा है कि शहर के विभिन्न थानों में लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं.

सुनवाई के दौरान एसीबी के डीआईजी और मामले में गठित सीआईटी के मुखिया आनंद शर्मा अदालत में पेश हुए. उनकी ओर से प्रकरण की प्रगति रिपोर्ट अदालत में पेश की गई और अदालत से समय मांगा. इस पर अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि अब तक प्रकरण में ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. इतना समय बीतने के बाद भी जांच पूरी नहीं की गई है. इसके साथ ही अदालत ने अदालत ने मामले की सुनवाई 9 मार्च को रखते हुए कहा है कि इस दौरान एसीबी मामले में कार्रवाई करे.

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीसी भंडारी ने बताया कि अदालती आदेश के बाद याचिकाकर्ता ने 27 शिकायत रिकॉर्ड सहित एसीबी में पेश की है, लेकिन अभी तक किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई. एसीबी ने सिर्फ एक मामले में चार माह पहले एफआईआर दर्ज की और चार दिन पहले की शिकायतकर्ता के बयान लिए गए. अदालत ने गत दिनों भी एसीबी डीआईजी को कार्रवाई करने को कहा था, लेकिन अभी भी उनकी ओर से समय ही मांगा जा रहा है.

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याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मामले में एसीबी जानबूझकर कार्रवाई नहीं कर रही है. याचिकाकर्ता तथ्यों और दस्तावेजों के साथ एसीबी को शिकायत देता आ रहा है. आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार तो एक प्रकरण में अधिकारी ने कार्यादेश पर व्हाइटनर लगाकर समयावधि को कई बार बढ़ाया. इसके बावजूद भी एसीबी ऐसे मामलों में भी कुछ नहीं कर रही है.

थानों में जब्त वाहनों के निस्तारण के लिए क्या कदम उठाए गए ? : हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट पेश कर बताने को कहा है कि शहर के विभिन्न थानों में लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं. जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने यह आदेश महेश झालानी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए. अदालत ने अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह को कहा कि वे मामले में खान विभाग की ओर से पक्ष रख रहे हैं. प्रकरण के त्वरित निस्तारण के लिए वे अन्य विभागों की ओर से भी अदालत में पक्ष रखे.

याचिका में अधिवक्ता सतीश खंडेलवाल ने अदालत को बताया कि प्रदेश के सभी थानों में अरबों रुपए के वाहन कई सालों से जब्त पडे हुए हैं. जबकि सुप्रीम कोर्ट सभी राज्यों को इन वाहनों का तय समय में निस्तारण के आदेश दे चुका है. इसके अलावा पालना नहीं होने पर सुप्रीम कोर्ट कठोर कार्रवाई की चेतावनी भी दे चुका है. याचिका में कहा गया विभिन्न थानों में सालों से खुले में वाहन पड़े हैं.

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सालों तक लावारिस पड़े रहने के कारण अधिकांश वाहन कबाड़ में तब्दील हो रहे हैं. वहीं, बाद में ये वाहन न केवल रोड पर चलने लायक रहते हैं, बल्कि इनसे दुर्घटनाएं होने का खतरा भी रहता है. याचिका में गुहार की गई है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में इन वाहनों का तय समय पर निस्तारण करने की व्यवस्था की जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार से रिपोर्ट पेश कर शहर के थानों में लावारिस पड़े वाहनों के निस्तारण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है.

10 साल की सेवा पूरी होने पर एसीडीपीओ का वेतनमान देने के आदेश : वहीं, एक अन्य मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता महिला पर्यवेक्षकों को 10 साल की सेवा पूरी होने पर सुप्रीम कोर्ट के मंजू रानी के फैसले के आधार पर एसीडीपीओ पद पर पदोन्नत कर चयनित वेतनमान देने को कहा है. जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सुनीता व 38 अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए.

याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता हनुमान चौधरी और अधिवक्ता तरुण चौधरी ने बताया कि याचिकाकर्ता साल 2010 में महिला पर्यवेक्षक पद पर नियुक्त हुई थी. पूर्व में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने महिला पर्यवेक्षक को 10 साल के अनुभव पर एसीडीपीओ और उसके 9 साल बाद सीडीपीओ का चयनित वेतनमान देने के निर्देश दिए थे. इस आदेश के खिलाफ दायर अपील को खंडपीठ ने खारिज कर दिया था.

वहीं, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी एकलपीठ के आदेश को सही मानते हुए एसएलपी खारिज कर दी थी. याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता से जुडा अनुभव का यह विवाद सुप्रीम कोर्ट पहले की तय कर चुका है. ऐसे में उनका भी प्रकरण समान है. इसलिए उन्हें भी एसीडीपीओ के पद पर पदोन्नति कर चयनित वेतनमान का लाभ दिया जाए. जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को पदोन्नत कर चयनित वेतनमान देने को कहा है.