राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव टालने से जुड़ा मामला, हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का समय दिया था, लेकिन निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची जारी नहीं की गई.

Published : May 11, 2026 at 3:42 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव टालने से जुड़े मामले में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग के प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने यह आदेश पूर्व विधायक संयम लोढा व गिरिराज सिंह देवदा की याचिका में दायर दोनों प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई करते हुए दिए.
प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा. इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका.
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चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई, जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं.
अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई. इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी, इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए. दोनों पक्षों की बहस सुनकर अदालत में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.
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