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हाईकोर्ट से पूर्व विधायक को झटका, जमानत खारिज, जेल प्रहरी भर्ती में आयु छूट पर सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पूर्व विधायक बलराम यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी.

Rajasthan Highcourt
राजस्थान हाईकोर्ट (ETV Bharat File Photo)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 30, 2026 at 8:26 PM IST

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Updated : June 30, 2026 at 10:08 PM IST

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जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को दो अलग-अलग मामलों में अहम आदेश दिए. पहले मामले में कोर्ट ने खेल सामग्री खरीद घोटाले में जेल में बंद बहरोड़ के पूर्व विधायक बलजीत यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी. वहीं, दूसरे मामले में जेल प्रहरी भर्ती-2024 में आयु सीमा में छूट नहीं देने पर कर्मचारी चयन बोर्ड और कारागार विभाग के महानिदेशक से जवाब मांगा है.

जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने पूर्व विधायक बलजीत यादव को राहत देने से इनकार कर दिया. याचिका में कहा गया कि ईडी ने एसीबी में दर्ज मूल प्रकरण के आधार पर कार्रवाई की है, जिस पर हाईकोर्ट का स्टे है. मामला राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है. वरिष्ठ आईएएस की अध्यक्षता वाली कमेटी ने पहले क्लीन चिट दी थी. तीन करोड़ के घोटाले का आरोप है, जबकि सामग्री की डिलीवरी हुई है.

इसका विरोध करते हुए ईडी की ओर से एएसजी भरत व्यास ने कहा कि आरोपी के निर्देश पर चार फर्मों के टेंडर मंजूर हुए. बाजार मूल्य से कई गुणा अधिक कीमत पर खरीदारी की गई. सभी आपूर्ति फर्म आरोपी के रिश्तेदारों या परिचितों से जुड़ी थीं. बहस के बाद कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी. वर्ष 2021-22 में बहरोड़ की 32 स्कूलों के लिए बैडमिंटन व क्रिकेट किट खरीद में एमएलए फंड से करीब तीन करोड़ खर्च कर दुरुपयोग का आरोप है. ईडी ने फरवरी में बलजीत यादव को गिरफ्तार किया था.

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जेल प्रहरी भर्ती: आयु छूट पर जवाब-तलब, एक पद सुरक्षित- जस्टिस गणेश राम मीणा ने जेल प्रहरी सीधी भर्ती-2024 में आयु सीमा में छूट नहीं देने पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के सचिव और कारागार विभाग के महानिदेशक से जवाब मांगा है. साथ ही एसटी वर्ग में एक पद सुरक्षित रखने के आदेश दिए हैं. यह अंतरिम आदेश मीठालाल मीणा की याचिका पर दिया गया.

अधिवक्ता सुनील कुमार सिंगोदिया ने बताया कि चयन बोर्ड ने 11 दिसंबर 2024 को विज्ञापन जारी किया था. 1 जनवरी 2026 को अधिकतम आयु 26 साल रखी गई, विशेष श्रेणियों में 5 साल की छूट दी गई. याचिकाकर्ता लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता व मापदंड परीक्षा में सफल रहा, लेकिन ओवरएज मानकर चयन नहीं किया. याचिका में कहा गया कि 2024 से पहले 2018 में भर्ती हुई थी. कार्मिक विभाग के 23 सितंबर 2008 के परिपत्र के अनुसार, यदि अभ्यर्थी पिछली भर्ती के समय आयु सीमा में था और 3 साल तक कोई भर्ती नहीं हुई तो 3 वर्ष की छूट मिलेगी. बोर्ड ने इसे अनदेखा किया. सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने जवाब मांगा है.

एफएमजीई फर्जी प्रमाण पत्र से जुडे 17 आरोपियों को जमानत नहीं : राजस्थान हाईकोर्ट ने विदेश से एमबीबीएस कर भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी एफएमजीई स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट हासिल करने से जुड़े मामले में 17 आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है. जस्टिस रवि चिरानिया ने यह आदेश शुभम गुर्जर व अन्य की ओर से दायर जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए दिए.

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि हर मामले को अलग-अलग देखा जाना चाहिए. कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का अपराध असंज्ञेय होने के कारण ऐसे मामलों में सीधे एफआई आर दर्ज नहीं हो सकती. इसके अलावा कुछ याचिकाकर्ताओं ने स्थाई पंजीयन के लिए आवेदन ही नहीं किया और एक याचिकाकर्ता तो पुनः परीक्षा भी पास कर चुका. जिसका विरोध करते हुए राजकीय अधिवक्ता राजेश चौधरी ने कहा कि आरोपियों ने फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए और आरएमसी के तत्कालीन रजिस्ट्रार से मिलीभगित कर अपना पंजीयन करवा लिया. आरोपियों ने न केवल फर्जी प्रमाण पत्र से रजिस्ट्रेशन कराया, बल्कि अस्पतालों में इंटर्नशिप भी की. ऐसे में आरोपियों को जमानत नहीं दी जाए.

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बीते दिनों एसओजी ने फर्जी दस्तावेजों से डॉक्टर बनने के इस घोटाले का पर्दाफाश किया कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इन आरोपियों ने कजाकिस्तान सहित अन्य देशों से एमबीबीएस की पढाई की थी, लेकिन देश में प्रैक्टिस के लिए जरूी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं की. इन पर आरोप है कि संगठित गिरोह को लाखों रुपए का भुगतान कर फर्जी पासिंग सर्टिफिकेट बनवाए और उसका इस्तेमाल कर राजस्थान मेडिकल कौंसिल में अपना पंजीकरण कराया. इसके बाद अस्पताल में इंटर्नशिप के दौरान मरीजों का इलाज भी शुरू कर दिया.

Last Updated : June 30, 2026 at 10:08 PM IST