हाईकोर्ट के दो फैसले: निजी स्कूलों को अब प्री-प्राइमरी से पहली कक्षा तक देनी होंगी 25% आरटीई सीटें, अधिकारियों से मांगा जवाब
आरटीई केस में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र से फीस की राशि राज्य को दिलाई जाए.

Published : January 8, 2026 at 8:49 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को एक ओर राज्य के निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से लेकर पहली कक्षा तक 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश देना अनिवार्य कर दिया, तो दूसरी ओर एयरपोर्ट टर्मिनल-2 से जुड़ी एक महत्वपूर्ण 80 फीट चौड़ी सेक्टर रोड से अतिक्रमण हटाने के मामले में भी यूडीएच सचिव समेत चार वरिष्ठ अधिकारियों से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है.
एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने आरटीई के मामले में अभ्युत्थानम सोसायटी व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते राज्य सरकार और निजी स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया है. अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल पहली कक्षा में अतिरिक्त सीटों पर सामान्य प्रवेश दे रहे हैं तो उसी अनुपात में 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत भी प्रवेश दिए जाएंगे. अदालत ने मामले में गत 4 नवंबर को सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.
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जनहित याचिका में राज्य सरकार के साल 2020 की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी. अधिसूचना में कहा गया था कि निजी स्कूलों को आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश देने पर ही फीस का पुनर्भरण किया जाएगा. अधिवक्ता रिद्धि ने बताया कि कई स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं होने के कारण उनमें पहली कक्षा से पहले ही प्रवेश हो जाता है. जिसके चलते स्कूल आरटीई में प्रवेश नहीं देते. वहीं स्कूल प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्कूलों के संसाधन सीमित हैं और राज्य सरकार ने फीस के पुनर्भरण को लेकर 2009 से लेकर अब तक कोई नियम नहीं बनाए हैं.
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुरेन्द्र सिंह नरूका ने कहा कि प्री प्राइमरी व पहली कक्षा दोनों लेवल पर आरटीई में प्रवेश हो तो प्री प्राइमरी में होने वाले प्रवेशों के लिए भी केन्द्र सरकार से निर्धारित फीस की पुनर्भुगतान राशि राज्य को दिलाई जाए. दूसरी ओर केन्द्र सरकार की ओर से कहा गया था कि आरटीई में प्रवेश की व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों की है, केन्द्र की नहीं. सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने विस्तृत दिशा-निर्देश देते हुए निजी स्कूलों और राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है.
अतिक्रमण मामले में अधिकारियों से मांगा जवाब: इसी प्रकार जयपुर के एयरपोर्ट टर्मिनल-2 से मनोहरपुरा कच्ची बस्ती तक की 80 फीट की सेक्टर रोड पर अतिक्रमण से जुड़े मामले में यूडीएच सचिव, जेडीए सचिव, जेडीए जोन-4 के उपायुक्त और प्रवर्तन अधिकारी से जवाब मांगा है. अदालत ने इन अधिकारियों से तीन सप्ताह में बताने को कहा है कि जब 2025 के मास्टर प्लान में यह रोड 80 फीट चौडाई में स्वीकृत है तो उस पर हो रहे अतिक्रमण क्यों नहीं हटाए गए?. एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा व जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश शंकर कॉलोनी विकास समिति, जगतपुरा की जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए.

