हाईकोर्ट ने पंचायतों के मुख्यालय बदलने पर मांगा सरकार और तीन कलेक्टरों से जवाब
याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिए कि सरकार ने मनमाने ढंग से मुख्यालय बदले. इससे स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी उठानी होगी.

Published : December 13, 2025 at 8:38 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायतों के मुख्यालय बदलने से जुड़े अलग-अलग मामलों में राज्य सरकार और टोंक, धौलपुर व करौली जिलों के कलेक्टर समेत कई अन्य से जवाब मांगे. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने करौली की पंचायत सेंगरपुरा, टोंक की पंचायत चावडिया के अर्जुनलाल और धौलपुर की पंचायत चित्तौरा के मुन्नालाल शर्मा की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए.
याचिकाओं में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मालपुरा ने अदालत को बताया कि पंचायती राज विभाग ने 10 जनवरी को पंचायती राज अधिनियम की धारा 101 के तहत पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्सीमांकन, नवसृजन और पुनर्गठन के लिए जिला कलेक्टर से प्रस्ताव मांगे थे. राज्य सरकार ने धौलपुर व करौली कलेक्टर के भेजे प्रस्तावों को नहीं मानते हुए 20 नवंबर को मनमाने तरीके से संबंधित पंचायतों के मुख्यालय बदल दिए. इसके अलावा करौली जिले से जुड़े मामले में पंचायत मुख्यालय करीब 14 किमी दूर कर दिया. यह दूरी अधिकतम पांच किमी से अधिक नहीं हो सकती.
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ये दिए तर्क: याचिकाओं में कहा कि इन पंचायत मुख्यालयों में पहले से राज्य सरकार के सभी कार्यालय मौजूद हैं. इसके बावजूद सरकार ने मनमाने ढंग से अधिसूचना जारी कर मुख्यालय बदले. मुख्यालय बदलने से स्थानीय निवासियों को काफी परेशानी उठानी होगी. हर काम के लिए कई किलोमीटर जाना पड़ेगा. मौजूदा कार्यालय शिफ्ट करने से सरकार पर वित्तीय भार पड़ेगा. याचिका में पंचायत मुख्यालय बदलने की अधिसूचना निरस्त करने की गुहार लगाई गई. इस पर खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा.

