हाईकोर्ट का कड़ा रुख: बीच सत्र शिक्षकों के तबादलों पर सवाल, JJM घोटाला जांच पर भी जवाब तलब
हाईकोर्ट ने आरपीएससी सचिव को तलब किया है. वहीं, कुलपति नियुक्ति मामले में याचिका कर्ता पर 5 लाख रुपए जमा करने की शर्त लगाई है.

Published : January 7, 2026 at 8:46 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने एक ओर जहां शैक्षणिक सत्र के बीच में बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले करने को विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ बताया है.अदालत ने सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण को भी आड़े हाथों लिया. वहीं, दूसरी ओर जल जीवन मिशन घोटाले की जांच को केवल दो फर्मों तक सीमित रखने के आरोपों पर भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार से जवाब मांगा है.
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से एक साथ बड़ी संख्या में शिक्षकों के तबादले करने पर सवाल उठाए हैं. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि बीच सत्र शिक्षकों के तबादले करना न सिर्फ गलत है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के हितों के भी खिलाफ है. वहीं, अदालत ने एक समान मामले में अलग-अलग तरह के फैसले देने पर सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण को आड़े हाथों लिया. अदालत ने कहा कि अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्य पारदर्शिता रखें. वहीं, अदालत ने कार्मिक सचिव को कहा है कि अधिकरण के अध्यक्ष व सदस्यों के प्रशिक्षण की उचित व्यवस्था करें, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़े. जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश प्रिंसिपल हरगोविंद मीणा के ट्रांसफर आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए दिए.
अदालत ने कहा कि शिक्षा कैलेंडर की जानकारी होने के बावजूद सरकार ने शैक्षणिक सत्र के बीच सितंबर में प्रिंसिपल के सामूहिक ट्रांसफर कर दिए. ऐसा करना बताता है कि शिक्षा प्रणाली प्रशासकों की मनमानी से चल रही है न कि छात्रों की जरूरत के अनुसार. अदालत ने कहा कि 22 सिंतबर 2025 को शैक्षणिक सत्र के बीच में ही सीनियर सैकंडरी स्कूल के 4,527 प्रिंसिपल के सामूहिक ट्रांसफर करके न केवल शिक्षकों बल्कि इन स्कूलों और उनके छात्रों को भी परेशान किया. याचिका में अधिवक्ता रामरख शर्मा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता प्रिंसिपल हरगोविंद मीणा का गत अप्रैल माह में तबादला किया गया था. वहीं पांच माह बाद सितंबर में उसका तबादला करीब चार सौ किलोमीटर दूर भरतपुर जिले की एक स्कूल में कर दिया गया.सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण से भी उसे राहत नहीं मिली.
जल जीवन मिशन घोटाला: ईडी व सरकार से जवाब मांगा: एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने 'पब्लिक अगेंस्ट करप्शन' की जनहित याचिका पर सुनवाई में ईडी और सरकार से जवाब मांगा. याचिका में आरोप लगाया गया है कि हजारों करोड़ के इस घोटाले में केवल दो ठेका फर्मों के खिलाफ ही जांच सीमित रखी गई है, जबकि कई अन्य प्रभावशाली लोगों और फर्मों को बचाया जा रहा है. ईडी की ओर से एएसजी भरत व्यास ने कहा कि ईडी ने कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर उन्हें गिरफ्तार भी किया है. याचिकाकर्ता की ओर से लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं. जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के आरोपों का जवाब देने के लिए मामले की सुनवाई तीन सप्ताह बाद करना तय किया है. इस मामले में पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत कई आरोपी गिरफ्तारी के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर रिहा हो चुके हैं.
यह भी पढ़ें: कांस्टेबल भर्ती की महिला अभ्यर्थी का ऊंचाई और वजन पुन: मापने के आदेश
सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती में आरपीएससी सचिव को तलब: हाईकोर्ट ने सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2024 के विवादास्पद परिणाम पर सवाल उठाते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के सचिव को 8 जनवरी को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है. जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने यह आदेश सृष्टि सिंघल व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया. अदालत ने नोटिस जारी होने के बाद भी आयोग की ओर से कोई पेश न होने पर नाराजगी जताई. याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बताया कि 180 पदों के लिए हुई इस भर्ती में मुख्य परीक्षा में लगभग 3,000 अभ्यर्थी शामिल हुए, लेकिन आयोग ने केवल 4 को ही सफल घोषित किया.
आरोप लगाया गया कि कई अभ्यर्थियों ने कहीं अधिक कठिन मानी जाने वाली राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में 40% से अधिक अंक प्राप्त किए थे, फिर भी उन्हें इस परीक्षा में असफल कर दिया गया. याचिका में परीक्षा परिणाम को मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ बताते हुए, त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर व कठोर अंकन की आशंका जताई गई है. याचिकाकर्ता ने परिणाम रद्द कर नए सिरे से मूल्यांकन कर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग की है.
कुलपति नियुक्ति मामला, याचिका कर्ता पर 5 लाख रुपए जमा करने की शर्त: राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर प्रोफेसर अल्पना कटेजा की नियुक्ति को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए शर्त रखी है. जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता प्रोफेसर महिपाल सिहाग को निर्देश दिया कि यदि वह सुनवाई चाहते हैं तो पहले पांच लाख रुपए अदालत में जमा कराएं. याचिका में अधिवक्ता सविता सिहाग ने आरोप लगाया था कि कुलपति पद के लिए आवेदन करते समय प्रोफेसर कटेजा ने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाई, जो नियमों का उल्लंघन है. इसलिए उनका चयन रद्द किया जाना चाहिए.
प्रोफेसर कटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.एन. माथुर ने प्रारंभिक आपत्ति जताई. उन्होंने बताया कि वह शिकायत पहले ही खारिज हो चुकी है और उसका पुनर्विचार लंबित है. साथ ही, उन्होंने प्रतिआरोप लगाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता स्वयं एक आपराधिक मामले में आरोपी हैं और उन्होंने यह जानकारी अदालत को नहीं दी. उन्होंने याचिका को तथ्य छिपाने का आरोप लगाते हुए खारिज करने की मांग की.

