हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव 31 जुलाई तक कराने के निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने निकाय और पंचायत चुनाव कराने को लेकर सख्त आदेश दिया है.

Published : May 22, 2026 at 12:36 PM IST
|Updated : May 22, 2026 at 7:19 PM IST
जयपुर: राजस्थान में लंबे समय से लंबित पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश देते हुए 31 जुलाई 2026 तक प्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव संपन्न कराने का आदेश दिया है.
यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजित पुरोहित की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया. अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग की ओर से दायर प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए यह समय सीमा तय की है.
इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराने के निर्देश दिए थे, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था. हालांकि, राज्य सरकार ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट में देरी का हवाला देते हुए चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था.
मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने 11 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए सरकार को नई समयसीमा दे दी गई है. अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए समय पर चुनाव कराना आवश्यक है और इसमें अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है.
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इन लोगों ने लगाई थी याचिका : इस पूरे प्रकरण में मूल याचिकाकर्ता के रूप में गिरिराज सिंह देवंदा ने समय पर चुनाव नहीं कराए जाने को चुनौती दी थी. वहीं, कांग्रेस नेता संयम लोढ़ा ने भी इस मुद्दे को लेकर याचिका दायर की थी.
अदालत के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग पर तय समयसीमा में चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने का दबाव बढ़ गया है. राजनीतिक हलकों में भी इस निर्णय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे प्रदेश में लंबे समय से लंबित स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता साफ हो गया है.
वहीं, प्रार्थना पत्र में राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर में कई पंचायत समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है. उनके कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव कराना बेहतर होगा और इससे वन स्टेट-वन इलेक्शन की धारणा को भी बल मिलेगा. इसके अलावा कोर्ट के आदेश की पालना के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन वर्तमान परिस्थितियां ऐसी है कि 15 अप्रैल तक चुनाव कराना संभव नहीं हो सका.
चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी, मौसम, कृषि और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता का हवाला देकर चुनाव आगे खिसकाने की अनुमति मांगी गई. जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ता प्रेमचंद देवदा ने कहा कि प्रदेश की सभी पंचायतों का कार्यकाल पूरा हो चुका है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सुरेश महाजन के मामले में दिए फैसले के तहत ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के बिना भी पंचायत चुनाव हो सकते हैं.
अदालत ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव कराने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन इस अवधि तक निकायों के लिए अंतिम मतदाता सूची ही जारी नहीं की गई. इसके अलावा हाईकोर्ट के 15 अप्रैल तक चुनाव कराने के आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी. इसलिए यह आदेश अंतिम हो गया है और इसकी पालना की जानी चाहिए. जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को 31 जुलाई तक का समय दिया है.
संयम लोढ़ा ने कही बड़ी बात : निकाय और पंचायत राज चुनाव को लेकर आए फैसले के बाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता संयम लोढ़ा ने सिरोही में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि मुझे इस बात की खुशी है कि हाईकोर्ट ने फिर से राजस्थान सरकार के षड्यंत्र को विफल किया है, जिसके जरिए वह अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए चुनाव टालने पर आमदा थे. आप सब ने देखा होगा कि स्कूलों के उत्सव, गर्मी खेती किस तरीके के आधार लेकर अगले साल तक इतना चुनाव डालना चाहते हैं, जबकि इसके कारण शुद्ध राजनीतिक है.
लोकसभा चुनाव में जो राजस्थान में बुरी गत हुई और उसके बाद अभी हाल में बांरा के उपचुनाव में भाजपा को जीती हुई सीट खोनी पड़ी. मुख्यमंत्री को इस बात की चिंता है कि पंचायत और निकाय चुनाव में करारी हार उनकी कुर्सी हड़पने का कारण बने, इसलिए वह चुनाव टाल रहे हैं. सरकार के सभी दलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने 20 जून तक ओबीसी कमिशन की रिपोर्ट लेने और 31 जुलाई तक चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं. वन नेशन वन इलेक्शन बीजेपी नेताओं की चाटुकारिता है जो किसी भी रूप से राजस्थान में संभव नहीं है.
नगर पालिका में प्रशासक लगाना और चुनाव टालना पूरी तरीके से गैरकानूनी है. राजस्थान के नौकरशाहों ने भी अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया. जो भी स्वायत शासन और पंचायत राज के आईएएस हैं, उनको सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए था कि क्या संवैधानिक प्रवधान है और क्या कानूनी प्रावधान है. लेकिन उन्होंने घुटने टेकने का काम किया और प्रदेश की जनता को डेढ़ साल तक अपने जनप्रतिनिधि को चुनने से वंचित रखा.

जूली बोले- पंचायत-निकाय चुनाव पर हाईकोर्ट का फैसला लोकतंत्र की जीत : नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनाव 31 जुलाई तक संपन्न कराने के आदेश का पुरजोर स्वागत किया है. जूली ने इसे लोकतंत्र और कांग्रेस पार्टी के संघर्ष की एक ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि इस फैसले से भाजपा सरकार की लोकतंत्र विरोधी मानसिकता पूरी तरह बेनकाब हो गई है.
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर जनता के बीच जाने से लगातार भाग रही थी. सरकार ने जानबूझकर चुनाव टालने की साजिश रची थी, क्योंकि उन्हें पता है कि जनता उनके कुशासन का जवाब देने के लिए तैयार बैठी है. अब न्यायालय के इस डंडे ने सरकार के इरादों पर पानी फेर दिया है और आज प्रदेश की जनता की जीत हुई है.
ढाई साल में काम नहीं, अब गांव जा रहे हैं : भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए जूली ने कहा कि पिछले ढाई साल में इस डबल इंजन सरकार ने प्रदेश को पूरी तरह विकास विहीन कर दिया है. धरातल पर कोई काम नहीं हुआ है. कानून-व्यवस्था और जन कल्याणकारी योजनाएं ठप पड़ी हैं. यही वजह है कि भाजपा के नेताओं में गांवों और कस्बों में जाने की हिम्मत नहीं बची. अब मुख्यमंत्री गांवों में जाकर लोगों के गुस्से को शांत करने की कोशिशों में लगे गए हैं.
भाजपा के लोग किस मुंह से मांगेंगे वोट : वे बोले, असलियत में ये लोग डरे हुए हैं कि पंचायत और निकाय चुनावों में जनता के बीच जाकर किस मुंह से और किस काम के नाम पर वोट मांगेंगे? अपनी इसी नाकामी और हार के डर को छिपाने के लिए भाजपा ने चुनाव टालने का फैसला कर सीधा-सीधा लोकतंत्र पर हमला किया था, लेकिन कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब सरकार को मुंह की खानी पड़ी है.
कोर्ट का फैसला भाजपा की तानाशाही को जवाब : जूली ने कहा कि प्रदेश में नगर निकाय और पंचायत राज चुनाव समय पर नहीं कराने के पीछे भाजपा की जो बदनीयत थी. उसे कांग्रेस ने हर स्तर पर बेनकाब किया है. कांग्रेस ने हर मंच पर भाजपा के इन लोकतंत्र-विरोधी मंसूबों को पुरजोर तरीके से उजागर किया था. सरकार जनता की आवाज को दबाना चाहती थी. न्यायालय के आदेश ने भाजपा की तानाशाही को करारा जवाब दे दिया है.
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला बुलंद : नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़े शब्दों में कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला और बुलंद हुआ है. अब हमारे कार्यकर्ता गांवों, ढाणियों और वार्डों में सीधे जनता के बीच जाएंगे और इस डरपोक व जनविरोधी सरकार की पोल खोलने का काम करेंगे. हम जनता को बताएंगे कि कैसे भाजपा अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनना चाहती थी.

