राजस्थान हाईकोर्ट : स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम पर नोटिस, SI पेपर लीक में चार्जशीट कोर्ट में पेश करने की मांग
याचिका में कहा गया कि देशभर में स्वास्थ्य लागत के कारण हर साल लगभग 7% आबादी गरीबी रेखा के नीचे चली जाती है.

Published : January 6, 2026 at 8:23 PM IST
|Updated : January 6, 2026 at 9:01 PM IST
जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022 को लागू करने के लिए अब तक आवश्यक नियम क्यों नहीं बनाए गए हैं. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश नरेंद्र कुमार गुप्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. कोर्ट ने मुख्य सचिव और अतिरिक्त स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. दूसरी ओर एसआई पेपर लीक मामले में ईडी द्वारा दायर चार्जशीट को अदालत में पेश करने की मांग की याचिका पर कोर्ट बुधवार को सुनवाई करेगी. इधर एक अन्य घटनाक्रम के तहत राजस्थान हाईकोर्ट में हर माह के दो शनिवार को कार्य दिवस घोषित करने के खिलाफ वकीलों के विरोध को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने जजों की कमेटी गठित करने की बात कही है.
याचिका में अधिवक्ता प्रेम किशन शर्मा ने बताया कि यह अधिनियम बने हुए ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसे लागू करने के नियम अभी तक अधिसूचित नहीं हुए हैं. इस कारण आम जनता को कानून के कल्याणकारी प्रावधानों का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
याचिका के मुताबिक नियमों के अभाव में स्वास्थ्य सेवाओं की सीमा और अस्पतालों तथा प्रशासन की जिम्मेदारियां स्पष्ट नहीं हैं. सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया कि प्रदेश में 50% से अधिक मरीज महंगे निजी अस्पतालों में इलाज करवाते हैं, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. देशभर में स्वास्थ्य लागत के कारण हर साल लगभग 7% आबादी गरीबी रेखा के नीचे चली जाती है. याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से आमजन को बड़ी राहत मिलेगी. खंडपीठ ने मामले में अधिकारियों से जवाब मांगा है और आगे की सुनवाई का इंतजार कर रही है.
एसआई पेपर लीक मामला; ईडी की चार्जशीट कोर्ट में पेश करने की मांग: इसी प्रकार एसआई भर्ती-2021 के पेपर लीक मामले की सुनवाई में प्रार्थी पक्ष ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर की गई चार्जशीट को हाईकोर्ट में पेश करने की मांग की है. प्रार्थी कैलाश चंद्र शर्मा ने यह प्रार्थना पत्र हाईकोर्ट की पीठ के समक्ष पेश किया है, जिस पर बुधवार को सुनवाई होगी. मामले से जुड़े अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने बताया कि प्रार्थना पत्र में बताया कि आरपीएससी की ओर से आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं. वहीं आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा ने भी ईडी को दिए बयानों में माना है कि उसने सदस्य बनने के लिए 1.20 करोड़ रुपए की डील की थी और इसके लिए दो बार में 40 लाख रुपए नकद डूंगरपुर के जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोडनिया के सहयोगी को दिए थे. कटारा को आरपीएससी सदस्य बनाने के लिए कई प्रभावशाली लोगों ने भी सिफारिश की थीं. कटारा ने ईडी को दिए बयानों में कहा है कि कई प्रतियोगी परीक्षाओं के साक्षात्कार के दौरान उन्हें कई प्रभावशाली लोगों की ओर से मदद की सिफारिश की जाती थी. यह सिफारिशें चेयरमैन व सदस्यों के पास भी आती थी. ऐसे में स्पष्ट है कि आरपीएससी की ओर से आयोजित की गई भर्ती परीक्षाओं के साक्षात्कार में गड़बड़ी हुई है, इसलिए ईडी की ओर से जांच के बाद पेश चार्जशीट को अदालत में पेश किया जाए.
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शनिवार को कार्यदिवस मामले में हाईकोर्ट प्रशासन कमेटी गठित करेगा: राजस्थान हाईकोर्ट में हर माह के दो शनिवार को कार्य दिवस घोषित करने के खिलाफ वकीलों के विरोध को देखते हुए हाईकोर्ट प्रशासन ने जजों की कमेटी गठित करने की बात कही है. हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर और जोधपुर की हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन व लॉयर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के साथ इस संबंध में बैठक की. बैठक में बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के चेयरमैन भुवनेश शर्मा भी मौजूद रहे.
बैठक में बार पदाधिकारियों ने शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने को अव्यवहारिक और परेशानियां पैदा करने वाला बताया. हाईकोर्ट बार अध्यक्ष राजीव सोगरवाल ने कहा कि मलीमत कमेटी की सिफारिशों के अनुसार हाईकोर्ट में साल के 210 कार्यदिवस निर्धारित हैं. ऐसे में इसमें बदलाव के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी जरूरी है. जोधपुर बार पदाधिकारियों ने इसे एक तरफ फैसला बताते हुए वापस लेने की मांग की. वहीं एक पूर्व अध्यक्ष ने यह भी सुझाव दिया कि रोजाना होने वाली सुनवाई का समय आधा घंटा बढा दिया जाए. हाईकोर्ट बार महासचिव दीपेश शर्मा ने बताया कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने इस संबंध में एक कमेटी गठित कर उससे 21 जनवरी तक सिफारिश लेने का आश्वासन दिया है.

