शिक्षा विभाग में 'रिक्तियों का जाल'...1.22 लाख पद खाली, पदोन्नति अटकी तो भर्ती भी थमी
राजस्थान के शिक्षा महकमे में शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

Published : February 20, 2026 at 5:01 PM IST
जयपुर: 1 फरवरी 2026 तक शाला दर्पण पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान शिक्षा विभाग में 1 लाख 22 हजार 409 पद रिक्त हैं. चौंकाने वाली बात ये है कि जहां एक ओर उच्च पदों पर हजारों रिक्तियां हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों से लंबित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की प्रक्रिया ने पदोन्नति की चेन को जाम कर रखा है. इसी कारण अनुभवी शिक्षक पदोन्नति के इंतजार में हैं, बेरोजगार युवाओं को नई भर्ती का इंतजार है और स्कूल विषय विशेषज्ञों के अभाव में जूझ रहे हैं.
राजस्थान की स्कूल शिक्षा व्यवस्था पर इस जाम हुई पदोन्नति और थमी भर्ती का सीधा असर छात्रों पर पड़ रहा है. हजारों स्कूल ऐसे हैं जहां विज्ञान, गणित, अंग्रेज़ी जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. कई सीनियर सेकेंडरी स्कूल कागजों में क्रमोन्नत तो हो गए, लेकिन वहां व्याख्याता और वरिष्ठ अध्यापक के पद भरे नहीं गए, परिणामस्वरूप छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. इससे न केवल सीखने की गुणवत्ता गिर रही है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, बोर्ड परिणाम और ड्रॉपआउट दर पर भी असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में 1.22 लाख रिक्त पद सिर्फ प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश की पूरी शिक्षा व्यवस्था के लिए किसी चेतावनी से कम नहीं.
पदोन्नति चेन शुरू हो : राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने बताया कि विभाग में पदोन्नति की चेन पूरी तरह जाम है. वरिष्ठ अध्यापक और व्याख्याता के हजारों पद खाली हैं. समय पर डीपीसी हो जाए तो असंतुलन खत्म होगा और नई भर्तियों के द्वार खुलेंगे. यदि ये 'पदोन्नति चेन' चालू हो जाए, तो ऊपर के पद भरेंगे और नीचे पद रिक्त होंगे, जिससे सीधी भर्ती का रास्ता खुलेगा.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में तृतीय श्रेणी शिक्षकों का केस चल रहा है जिस पर सरकार की ओर से उदासीनता बरती जा रही है. आए दिन अलग-अलग शपथ पत्र दिए जा रहे हैं. इस वजह से पदोन्नति की सुनवाई पूरी नहीं हो पा रही है और इसका कहीं ना कहीं खामियां सा छात्रों को भी भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं मिल पा रहे.

स्कूल क्रमोन्नत हुए, लेकिन शिक्षक नहीं मिले : विपिन शर्मा ने बताया कि सरकार की ओर से विद्यालयों को क्रमोन्नत किया गया. आज 19000 के करीब सीनियर सेकेंडरी स्कूल है, लेकिन वहां पद सृजित नहीं हुए, स्टाफिंग पैटर्न नहीं हो पाया है. ऐसे में संगठन की मांग है कि सरकार शिक्षा विभाग में विशेष कार्य योजना बनाते हुए पदोन्नति के कार्य को पूरा करें, ताकि शिक्षकों को लाभ मिले, युवा बेरोजगारों को लाभ मिले और स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को भी लाभ मिले.
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बेरोजगारों की चिंता : बेरोजगार यूनियन अध्यक्ष हनुमान किसान का कहना है कि सरकार विधानसभा में अलग-अलग आंकड़े पेश करती रही है, जबकि वास्तविकता ये है कि 1 लाख से ज्यादा पद रिक्त है. हाल ही में आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा में सामान्य शिक्षा लेवल-2 और विशेष शिक्षा में शून्य पद घोषित होने पर युवाओं में नाराजगी है. उन्होंने सवाल किया कि जब लाखों पद खाली हैं तो बड़ी भर्ती क्यों नहीं निकाली जा रही? आखिर क्यों सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का सपना देख रहे युवाओं के सपनों ओर पानी फेरा जा रहा है?

वित्त विभाग से मांगी है स्वीकृति : शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के अनुसार शिक्षकों के पदों के लिए वित्त विभाग से स्वीकृति मांगी गई है. फिलहाल, समानीकरण (रैशनलाइजेशन) पर फोकस है, क्योंकि कुछ विद्यालयों में छात्र कम और शिक्षक ज्यादा है, जबकि कुछ में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की कमी है. उन्होंने ये भी दावा किया कि थर्ड ग्रेड को छोड़ अधिकांश डीपीसी पूरी हो चुकी हैं. पिछली सरकार की तुलना में मौजूदा सरकार ने दो वर्षों में 50,000 से ज्यादा कर्मचारियों-शिक्षकों की डीपीसी की है और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की ओर से घोषित चार लाख सरकारी नौकरियों में से लगभग 50% शिक्षा विभाग से जुड़े होंगे. अनुमान है कि करीब 1.50 से 1.75 लाख तक नए टीचर्स और अन्य कर्मचारी मिलेंगे. इससे आने वाले समय में पद खाली नहीं रहेंगे.
बहरहाल, सवाल ये है कि जब 1.22 लाख से ज्यादा पद रिक्त हैं तो नई भर्ती सीमित क्यों? डीपीसी में देरी क्यों? और क्या समानीकरण से ही समाधान संभव है? हालांकि, यदि सरकार समयबद्ध डीपीसी पूरी कर दे, तो वरिष्ठ पद भरेंगे, निचले पद रिक्त होंगे और हजारों बेरोजगार युवाओं को अवसर मिल सकेंगे.

