एग्जाम स्ट्रेस से बचाने के लिए शिक्षा विभाग की पहल, योग, आभार और 'खुशियों का पिटारा' जैसे नवाचार
6 से 10 वर्ष के छात्रों को खेल-खेल में इमोशन डेवलपम करने का प्रयास किया जा रहा है.

Published : February 23, 2026 at 4:53 PM IST
जयपुर : आज के दौर में नंबर और रिजल्ट को ही कामयाबी का पैमाना मान लिया जाता है. ऐसे माहौल में शिक्षा विभाग बच्चों को ये समझा रहा है कि असली सफलता सिर्फ अंकों से नहीं, बल्कि मन के संतुलन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास से मिलती है. इसके लिए शिक्षा विभाग योग, बातचीत, आभार व्यक्त सत्र और 'खुशियों का पिटारा' जैसे छोटे-छोटे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि छात्रों का डर कम हो, परीक्षा का तनाव न हो, बल्कि छात्र इसे सीखने और खुद को मजबूत बनाने का मौका मानें.
वार्षिक परीक्षाओं का समय हर छात्र के जीवन का सेंसेटिव दौर होता है. बेहतर प्रदर्शन की अपेक्षा, परिवार की उम्मीदें और भविष्य की चिंता कई बार बच्चों में अनावश्यक तनाव और घबराहट को जन्म देती है. ऐसे समय में केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है. इसी आवश्यकता को समझते हुए राजस्थान शिक्षा विभाग स्कूलों में छात्रों की मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता देते हुए पहल कर रहा है. शिक्षा निदेशालय बीकानेर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सुरक्षित और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए योग एक्टिविटी, 'आभार व्यक्त' सत्र और 'खुशियों का पिटारा' जैसे नवाचार किए हैं ताकि छात्रों को इमोशनल रूप से सशक्त बनाया जा सके.
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उम्र के अनुसार अलग-अलग स्ट्रेटजी : शिक्षा विभाग ने छात्रों की आयु और मनोवैज्ञानिक विकास को ध्यान में रखते हुए दो श्रेणियों में विशेष एक्टिविटी संचालित करने के निर्देश दिए हैं. 6 से 10 वर्ष के छात्रों को खेल-खेल में इमोशन डेवलपम करने का प्रयास किया जा रहा है. शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि प्राइमरी क्लासेज के छात्रों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक और रचनात्मक बनाया गया है. कहानी, कविताएं और छोटे-छोटे केस स्टडी के माध्यम से बच्चों को चिंतन और अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित किया जा रहा है.

'खुशियों का पिटारा' : ये एक खेल-आधारित शिक्षण सामग्री किट है, जिसमें खिलौने और कठपुतलियां, पहेलियां और चित्र कार्ड प्रेरक कहानियां और पोस्टर के माध्यम से बच्चों की पसंद-नापसंद, लर्निंग स्पीड, सोशल बिहेवियर को समझा जा रहा है. जिन बच्चों में ज्यादा सेंसटिविटी या बिहेवियरल करैक्टेरिस्टिक दिखाई देती है, उनके लिए शिक्षक-अभिभावक मीटिंग कर समाधान निकाल रहे हैं. यही नहीं प्रार्थना सभाओं और बाल सभाओं में मंच साझा करने के अवसर देकर बच्चों को सेल्फ एक्सप्रेशन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.
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किशोर मन (11 से 17 वर्ष) की समझ के साथ मार्गदर्शन : उन्होंने बताया कि किशोरावस्था जीवन का वो चरण है, जहां शारीरिक और मानसिक बदलाव तेजी से होते हैं. इसे ध्यान में रखते हुए स्कूलों में विशेष कैंप, जीवन कौशल सत्र और प्रेरक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं. आईसीटी लैब और स्मार्ट टीवी पर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रेरक वीडियो, रिकॉर्डेड कोर्स से सब्जेक्ट्स का दोहराव, इमोशनल एक्सप्रेशंस के लिए ड्राइंग एंड क्रिएटिव राइटिंग, संगीत और ग्रुप डिस्कशन, स्कूलों में कबड्डी, वॉलीबॉल और खो-खो जैसे पारंपरिक खेलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे टीम भावना और अनुशासन विकसित हो सके.

'आभार व्यक्त' एक्टिविटी : हर दिन प्रार्थना सभा में 'आभार व्यक्त' सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिसमें छात्र उन चीजों के लिए धन्यवाद प्रकट करते हैं, जिनसे उन्हें खुशी मिलती है. ये प्रैक्टिस उन्हें पॉजिटिव सोच की ओर प्रेरित करती है. इस सत्र में न्यूजपेपर पढ़ने और चिंतन जैसी छात्रों में सोच भी विकसित हो रही हैं. शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि विद्यालय स्तर पर शिक्षकों को छात्रों के व्यवहार में होने वाले छोटे बदलावों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार के तनाव या इमोशनल असंतुलन के संकेत मिलने पर परामर्श और संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान किया जा सके. यही नहीं विशेष परिस्थितियों में अभिभावकों से भी संपर्क स्थापित कर मिलकर प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं. यही नहीं बच्चों को इमोजी के माध्यम से अपनी मन:स्थिति व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
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आईसीटी लैब बना माध्यम : स्कूलों में स्थापित आईसीटी लैब स्ट्रेस मैनेजमेंट की प्रभावी सीख का नया माध्यम बन रही हैं. प्रेरणादायक वीडियो और मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित सामग्री छात्रों को न केवल प्रेरित कर रही है, बल्कि परीक्षा के दबाव को संतुलित करने में भी सहायता प्रदान कर रही है. शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, अंतिम लक्ष्य नहीं. शिक्षा विभाग की ओर से मेंटल हेल्थ को लेकर किए जा रहे नवाचार छात्रों के समग्र विकास की दिशा में एक संवेदनशील और सशक्त कदम हैं.

