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बजट सत्र से पहले ही पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी जंग, गर्ग बोले- कांग्रेस अध्यक्ष सदन में आने की हिम्मत नहीं कर पा रहे

28 जनवरी से शुरू हो रहे राजस्थान विधानसभा बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी सियासी जंग के संकेत दिख रहे हैं.

राजस्थान विधानसभा
राजस्थान विधानसभा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 8, 2026 at 10:55 AM IST

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Updated : January 8, 2026 at 11:32 AM IST

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जयपुर : 16वीं राजस्थान विधानसभा का सत्र 28 जनवरी से प्रारंभ होने जा रहा है. सत्र से पहले ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. विपक्ष ने सदन में सरकार को घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है. वहीं, सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर आरोप का मजबूती से जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है. आगामी विधानसभा सत्र को लेकर दोनों पक्षों के बयानों से साफ है कि सदन में तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिलेगा.

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा में कांग्रेस की मजबूत तैयारी की बात कही और बजट से कोई उम्मीद नहीं होने की बात रखी. जूली के इस बयान पर सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने पलटवार किया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का 2023 का आखिरी बजट लोकलुभावन दिया था, उसकी अपेक्षा भाजपा सरकार ने पिछले दो बजट शानदार दिए हैं. भाजपा सरकार ने अपने दोनों बजटों में जनहित, विकास और प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ठोस प्रावधान किए हैं. सरकार की नीतियों और योजनाओं से आमजन को लाभ मिला है और विकास कार्य धरातल पर नजर आ रहे हैं. इसके विपरीत विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है.

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कांग्रेस बताए अध्यक्ष कहां है ? : कांग्रेस पर निशाना साधते हुए जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष तो खुद विधानसभा में आते ही नहीं हैं, जनता पूछ रही है विपक्ष के नेता कहां हैं? ऐसे में उनके नेतृत्व में विपक्ष सरकार पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार भी खो चुका है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रह गए हैं और सदन में आकर मुद्दों पर चर्चा करने से बचते हैं. मुख्य सचेतक ने कांग्रेस नेताओं की बयानबाजी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, 'थोथा चना बाजे घना', यही स्थिति आज कांग्रेस नेताओं की है. विधानसभा में सरकार का सामना करने का साहस नहीं दिखाते. जोगेश्वर गर्ग ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार आगामी विधानसभा सत्र में पूरी तैयारी के साथ जाएगी. विपक्ष की ओर से उठाए गए हर सवाल का तथ्यात्मक और मजबूती से जवाब दिया जाएगा. उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार की नीतियां, बजट और विकास कार्य सदन में विपक्ष की पोल खोल देंगे.

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विपक्ष जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रहा : सत्र से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के तेवर यह संकेत दे रहे हैं कि विधानसभा में हंगामेदार कार्यवाही देखने को मिल सकती है. बजट घोषणाओं, चुनावी वादों और विकास कार्यों को लेकर होने वाली बहस सत्र का मुख्य केंद्र रहने की संभावना है. सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. विधानसभा मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल भ्रम फैलाने और जनता को गुमराह करने की राजनीति कर रहा है. जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि सरकार ने जो भी घोषणाएं की हैं, उन पर नियमानुसार और चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है. मुख्य सचेतक ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता योजनाओं को धरातल पर उतारना है और गुणवत्ता के साथ विकास कार्य करना है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बजट घोषणाओं की समीक्षा करना और उनकी व्यावहारिक देखना एक जिम्मेदार सरकार का काम है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधानसभा सत्र के दौरान सत्ता पक्ष विपक्ष के हर सवाल और आरोप का तथ्यों के साथ मजबूती से जवाब देगा.

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बिना तैयारी और दूरदृष्टि के घोषणाएं हो रही : नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे कि यह बीजेपी की ऐसी सरकार है, जिसने अपने कार्यकाल के दो वर्षों में बड़े-बड़े बजट भाषण और घोषणाएं तो की, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन नहीं हो पाया. यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है कि बजट घोषणाओं को बाद में 'फिजिबिलिटी' यानी व्यवहारिकता का हवाला देकर निरस्त कर दिया गया. इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार बिना तैयारी और दूरदृष्टि के घोषणाएं कर रही है. टीकाराम जूली ने आगे आरोप लगाया था कि बीजेपी के चुनावी वादे आज भी अधूरे पड़े हैं. सरकार के दो साल पूरे होने के बावजूद करीब 25 प्रतिशत बजट घोषणाएं अभी तक शुरू ही नहीं हुई हैं. उन्होंने इसे सरकार की नाकामी और प्रशासनिक उदासीनता करार दिया. जूली ने कहा कि विपक्ष इन सभी मुद्दों को विधानसभा सत्र में जोरदार तरीके से उठाया जायेगा और सरकार से जवाब मांगेगा. उन्होंने यह भी कहा कि जनता से किए गए वादों का हिसाब सरकार को सदन में देना ही होगा.

Last Updated : January 8, 2026 at 11:32 AM IST