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विधानसभा प्रश्नकाल : जनहित मुद्दों पर सरकार से तीखे सवाल, आंकड़ों को लेकर नोकझोंक

राजस्थान विधानसभा प्रश्नकाल. पेयजल, परवन परियोजना, सहकारी समितियां और छात्रावासों पर सरकार से तीखे सवाल...

Rajasthan Assembly Session
अशोक चांदना और कन्हयालाल चौधरी (Source : Rajasthan Assembly)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 27, 2026 at 1:17 PM IST

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जयपुर: राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल में शुक्रवार को पेयजल, परवन वृहद परियोजना, सहकारी समितियों में अनियमितताओं, आयुर्वेद चिकित्सकों के रिक्त पदों और अंबेडकर छात्रावासों की स्थिति को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने रहे. हिंडोली-नैनवा पेयजल योजना पर कांग्रेस विधायक अशोक चांदना ने आंकड़ों में अंतर बताते हुए सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया. उन्होंने कार्य प्रगति प्रतिशत को लेकर सवाल उठाए, जिस पर जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने फिजिकल रिपोर्ट पेश करने का आश्वासन दिया. वहीं, परवन परियोजना पर भी देरी और गुणवत्ता को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया. सहकारी समितियों और छात्रावासों के मुद्दों पर भी मंत्रियों ने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिलाया. सदन में कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली.

हिंडोली-नैनवा पेयजल योजना पर मंत्री अटके : हिंडोली विधायक अशोक चांदना ने पीएचईडी विभाग से जुड़े सवाल उठाते हुए आंकड़ों में गड़बड़ी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि 301.49 करोड़ रुपये के कार्य को 41% बताया जा रहा है, जबकि वर्तमान सरकार के दो वर्षों में 163.79 करोड़ के कार्य को 35% बताया जा रहा है. चांदना ने कहा- यह कौन सी गणित है ? सदन को गुमराह किया जा रहा है. इसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक वर्क ऑर्डर जारी नहीं हुए और चार साल तक देरी क्यों हुई, इसका जवाब दिया जाए.

किसने क्या कहा, सुनिए.... (Source : Rajasthan Assembly)

जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि फिजिकल प्रोग्रेस रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की जाएगी. उन्होंने बताया कि हिंडोली-नैनवा पेयजल योजना से 286 गांवों को लाभान्वित करने और करीब 82 हजार लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है. मंत्री ने स्वीकार किया कि ठेकेदार स्तर पर गड़बड़ियां हुईं. कुछ मामलों में क्षमता से अधिक कार्य लेने के कारण विवाद और कोर्ट केस भी हुए. उन्होंने आश्वासन दिया कि एक वर्ष के भीतर कार्य पूरा कर लिया जाएगा.

आयुर्वेद चिकित्सालय और रिक्त पदों का मुद्दा : उदयपुर में आयुर्वेद चिकित्सकों के रिक्त पदों को लेकर विधायक ताराचंद जैन ने सवाल उठाया. उपमुख्यमंत्री डॉ. पीसी बैरवा ने बताया कि उदयपुर जिला आयुर्वेद चिकित्सालय 75 बेड का है और मदन मोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय से संबद्ध है. उन्होंने कहा कि आयुष नीति 2021 के तहत जिला स्तर पर आयुष चिकित्सालय खोलने का प्रावधान है और भविष्य में आवश्यकता के आधार पर विस्तार किया जाएगा.

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उधर, सागवाड़ा क्षेत्र में किसानों को अनुदान और तारबंदी की निरस्त पत्रावलियों पर विधायक शंकर लाल डेचा ने सवाल उठाया. कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि समूह सहमति न होना, खेत में फसल खड़ी होना, आर्थिक स्थिति, खसरा नंबर में त्रुटि या आवेदक की मौत जैसी वजहों से आवेदन निरस्त होते हैं. उन्होंने कहा कि डूंगरपुर जिले में 800 के लक्ष्य के विरुद्ध 1182 किसानों को स्वीकृति दी जा चुकी है और बजट की कमी नहीं है.

परवन वृहद परियोजना- देरी और गुणवत्ता पर सवाल : परवन वृहद परियोजना को लेकर विधायक प्रमोद जैन भाया ने सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी. उन्होंने सीडब्ल्यूसी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की तिथियां, पहली प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति, शिलान्यास की तारीख और देरी के कारणों पर जवाब मांगा. जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि योजना वर्ष 2013 में स्वीकृत हुई थी. पर्यावरणीय मंजूरी, भूमि विवाद, अदालती प्रकरण और कोविड काल के कारण कार्य प्रभावित रहा.

मंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2023-24 में सरकार बनने के बाद काम में तेजी आई और दो वर्षों में 26% प्रगति हुई, जबकि पूर्ववर्ती सरकार के समय 7% कार्य हुआ था. भाया ने आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से परियोजना में देरी हुई क्योंकि इसका शिलान्यास राहुल गांधी ने किया था. उन्होंने पाइप की गुणवत्ता बदलकर करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच की मांग की. मंत्री ने बताया कि 27 अक्टूबर 2021 को कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया था और सात सदस्यीय इंजीनियर समिति गठित की गई थी. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया.

अंबेडकर छात्रावास और सहकारी समितियों पर कार्रवाई : विधायक देवी सिंह शेखावत ने नारायणपुर स्थित राजकीय अंबेडकर छात्रावास में कम छात्र संख्या का मुद्दा उठाया. सामाजिक न्याय मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि जहां क्षमता से कम छात्र हैं, वहां संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे. वहीं, सीकर जिले की सहकारी समितियों में अनियमितताओं पर सरकार ने स्वीकार किया कि दो समितियों की ऑडिट लंबित है. चौकड़ी ग्राम सेवा सहकारी समिति में 1.10 करोड़ रुपये के गबन का मामला सामने आया है. संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर वसूली की कार्रवाई की जा रही है.