ETV Bharat / state

विधानसभा प्रश्नकाल: उद्योग, आयुर्वेद, जल जीवन मिशन और राजस्व पर तीखी बहस, पक्ष - विपक्ष में नोकझोंक

राजस्थान विधानसभा प्रश्नकाल में उद्योग, आयुर्वेद, जल जीवन मिशन और नर्मदा नहर जैसे मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष में जमकर नोकझोंक हुई.

Rajasthan Assembly Question Hour
पक्ष-विपक्ष में नोकझोंक (Source : Rajasthan Assembly)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 25, 2026 at 1:09 PM IST

10 Min Read
Choose ETV Bharat

जयपुर: विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रश्नकाल में बुधवार को उद्योग, आयुर्वेद, जल आपूर्ति और नर्मदा नहर परियोजना से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. विभिन्न विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े सवाल उठाए, जिन पर संबंधित मंत्रियों ने जवाब दिए. उद्यमियों को उद्योग के लिए सहायता देने के सवाल पर संतुष्टिपूर्ण जवाब नहीं मिलने पर मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और नेता प्रतिपक्ष में हल्की बहस हुई.

वहीं, भोपालगढ़ विधानसभा की आसोप उपतहसील को क्रमोन्नत के सवाल पर राजस्व मंत्री हेमंत मीणा और नेता प्रतिपक्ष में तीखी बहस हुई. सदन में हंगमा उस समय हो गया जब मीणा ने जवाब देते हुए पूर्ववर्ती सरकार को निशाने पर लिया और कहा कि कांग्रेस के समय तो जिला और जिलों को रेवड़ियों की तरह बांट दिया गया था.

किसने क्या कहा, सुनिए... (Source : Rajasthan Assembly)

उद्यमियों को विदेशी बाजार सहायता पर सवाल : अजेमर दक्षिण से विधायक अनीता भदेल ने पिछले बजट में उद्यमियों को विदेशी बाजार में व्यापार सहायता के लिए घोषित 30 करोड़ रुपये के प्रावधान पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि अब तक कितने उद्यमियों को कितनी राशि वितरित की गई और एसएमई पॉलिसी 2024 के तहत कितनी फर्मों ने आवेदन किया. साथ ही, अधिकतम 3 लाख रुपये की सीमा हटाने पर सरकार का क्या विचार है.

उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने बताया कि बाजार सहायता योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भाग लेने पर 75 प्रतिशत या अधिकतम तीन लाख रुपये की सहायता दी जाती है. एसएमई पॉलिसी में 358 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें 261 स्वीकृत, 192 को भुगतान हो चुका है, 80 लंबित और 17 निरस्त किए गए हैं. एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी के तहत 149 आवेदन आए, जिनमें 94 को भुगतान किया गया.

वहीं, 'वन जिला-वन उत्पाद' योजना में 351 आवेदन आए, 306 स्वीकृत हुए और 234 को भुगतान किया गया. मंत्री ने कहा कि यह नीति दिसंबर 2024 में शुरू हुई है, इसलिए खर्च धीरे-धीरे बढ़ेगा. अभी तक करीब 9 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि मार्च अंत तक 30 करोड़ में से कितना खर्च हो पाएगा और झालावाड़ में एक उद्यमी को 3.60 लाख रुपये देने पर आपत्ति जताई. मंत्री ने स्पष्ट किया कि 3 लाख की सीमा एक पॉलिसी पर लागू है और पात्रता के आधार पर भुगतान किया गया है. इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मंत्री सवाल का जवाब नही दे पा रहे हैं और इधर-उधर की बात कर घुमाने की कोशिश कर रहे हैं.

पढ़ें : बजट सत्र के बीच आज कैबिनेट बैठक, अहम विधेयकों को मंजूरी संभव

खेतड़ी में आयुर्वेद सुविधाओं पर चर्चा : खेतड़ी धायक धर्मपाल ने खेतड़ी क्षेत्र में संचालित आयुर्वेद चिकित्सालयों की संख्या, गोठड़ा और मेरड़ा में नए चिकित्सालय खोलने तथा वर्तमान औषधालय के लिए पृथक भवन निर्माण को लेकर सवाल किया. इस पर उपमुख्यमंत्री डॉ. पी.सी. बैरवा ने कहा कि आयुष नीति 2021 के तहत चरणबद्ध तरीके से प्रस्तावों पर विचार होता है. फिलहाल, नए ब्लॉक आयुर्वेद औषधालय खोलने का प्रस्ताव नहीं है. पूर्व में भामाशाह द्वारा निर्मित भवन में संचालित सुविधा जारी है. भविष्य में बजट उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर निर्णय लिया जाएगा.

जल जीवन मिशन में 112 योजनाएं अधर में : जमवारामगढ़ विधायक महेंद्र पाल मीणा ने जमवारामगढ़ क्षेत्र में जल जीवन मिशन (JJM) योजनाओं की स्थिति पर सवाल उठाया. मंत्री कन्हैया लाल चौधरी ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के समय 217 योजनाएं स्वीकृत हुई थीं. इनमें से 62 पूर्ण, 43 प्रगति पर हैं. शेष 112 में से 58 न्यायालयीन मामलों के कारण रुकी हैं, जबकि 41 में संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई प्रक्रियाधीन है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि कई योजनाएं अधूरी हैं और गांवों में पेयजल संकट बना हुआ है.

मंत्री ने जवाब दिया कि 90 प्रतिशत कार्य विभिन्न कारणों से प्रभावित हैं, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करने और सक्षम वकील नियुक्त कर मामलों का समाधान किया जा रहा है. उधर, सांचौर विधायक जीवाराम चौधरी ने नर्मदा नहर परियोजना में रिक्त पदों और टेल क्षेत्र तक पानी नहीं पहुंचने का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पर्याप्त पानी होने के बावजूद अंतिम छोर के किसानों को लाभ नहीं मिल रहा. जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर टेल तक पानी पहुंचाने के लिए 1.96 करोड़ रुपये की डीपीआर तैयार की गई है और 26 दिसंबर 2025 को कार्यादेश जारी किया गया. अतिरिक्त बरसाती पानी के संरक्षण के लिए 2 करोड़ रुपये की घोषणा भी की गई है.

आसोप उपतहसील पर तीखी बहस : प्रश्नकाल के दौरान भोपालगढ़ से विधायक विधायक गीता बरबड़ ने आसोप उप तहसील के क्रमोन्नयन से जुड़ा सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि क्या उप तहसील आसोप का सर्वे जनसंख्या के आधार पर कराया गया है ? साथ ही क्या सरकार पटवार मंडलों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है? इस पर राजस्व मंत्री हेमंत मीणा ने जवाब देते हुए कहा कि राजस्व इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक पावर कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद परीक्षण कर आवश्यक निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पिछली सरकार ने राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से कई जिलों की घोषणा की थी, जिनका भी परीक्षण किया जाएगा. मंत्री के इस बयान पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली.

पढ़ें : विधानसभा में गूंजी गैंगस्टर्स की 'धमकियां', भाटी की सलाह-एक अपराधी को ठोकेंगे तो 100 में पैदा होगा खौफ, आधे घंटे होगी चर्चा

क्रमोन्नयन का मुद्दा, बिजली आपूर्ति पर गरमाई बहस : वहीं, विधायक कुलदीप धनकड़ ने पावटा-प्रागपुरा नगर पालिका को नगर परिषद में क्रमोन्नत करने का सवाल उठाया. इस पर नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने जवाब दिया कि नगरपालिका और नगर परिषद के क्रमोन्नयन के लिए अलग-अलग प्रावधान निर्धारित हैं. यदि पावटा-प्रागपुरा निर्धारित मापदंडों को पूरा करेगा तो उसका क्रमोन्नयन किया जाएगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन नगर निकायों की सीमा वृद्धि हुई है और जनसंख्या में बढ़ोतरी हुई है, उन्हें अनुदान भी बढ़ी हुई जनसंख्या के आधार पर दिया जाएगा.

वहीं, नीमकाथाना विधायक सुरेश मोदी ने सरकार से सवाल किया कि किसानों को ढाई महीने तक पर्याप्त बिजली नहीं मिली. सरकार 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का दावा करती है, लेकिन संबंधित ट्रांसफार्मर को बदलने में 72 दिन क्यों लगे? उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मंशा पर भी जवाब मांगा. इस पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने स्पष्ट किया कि 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने का प्रावधान कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के सामान्य ट्रांसफार्मरों पर लागू होता है. जिस ट्रांसफार्मर की बात की जा रही है, वह 400 केवी से जुड़े 220 और 132 जीएसएस सबस्टेशन का बड़ा ट्रांसफार्मर था, जिसकी क्षमता बढ़ाकर 200 एमवीए की गई है.

मंत्री ने कहा कि बड़े प्रसारण तंत्र के ट्रांसफार्मर को बदलने और शिफ्ट करने में स्वाभाविक रूप से समय लगता है. ऐसे ट्रांसफार्मर सामान्यतः फेल नहीं होते और खराब होने पर उन्हें उपलब्ध कराने में भी समय लगता है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में दोनों फीडरों की सप्लाई दिन में दी जा रही है और अभी किसी प्रकार की समस्या नहीं है. किसानों को दिन में 6 घंटे और रात में 6 घंटे बिजली उपलब्ध कराई जा रही है. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि जीएसएस का लोड पहले से ज्ञात होता है. उन्होंने पूछा कि इस क्षेत्र में कितने किसानों को रिकॉर्ड के अनुसार 6 घंटे से कम बिजली मिली है, इसकी जानकारी सदन को दी जाए और प्रभावित किसानों को अवगत कराया जाए ? इस पर मंत्री हीरालाल नागर ने जवाब दिया कि कहीं भी 6 घंटे से कम बिजली नहीं दी जा रही है और किसी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित नहीं हुई है. इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

पढ़ें : गहलोत बोले- '2 साल बनाम 5 साल' का मजाक बना रखा है, राठौड़ ने कहा- सदन से दुम दबाकर भागे

शिक्षा और खेल सुविधाओं के मुद्दे उठे : राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल के दौरान ओसियां क्षेत्र में कन्या महाविद्यालय की स्थापना और छबड़ा-छीपाबड़ौद में स्टेडियम निर्माण को लेकर सवाल उठाए गए. ओसियां विधानसभा क्षेत्र के हंतुडी में कन्या महाविद्यालय खोलने को लेकर सवाल उठाया गया. इस पर उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने जवाब देते हुए कहा कि ओसियां में वर्तमान में चार महाविद्यालय संचालित हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि हंतुडी में अलग से कन्या महाविद्यालय खोलने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, साथ ही तिवरी-मथानिया के कन्या महाविद्यालय को पीजी कॉलेज में क्रमोन्नत करने का भी कोई विचार नहीं है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नए महाविद्यालय खोलने या क्रमोन्नयन का निर्णय वित्तीय संसाधनों तथा गुण-दोष (गुण-अवगुण) के आधार पर किया जाएगा. वहीं, छबड़ा में छीपाबड़ौद क्षेत्र में स्टेडियम निर्माण को लेकर विधायक प्रताप सिंह सिंघवी ने प्रश्न करते हुए पूछा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना के तहत छबड़ा-छीपाबड़ौद में कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए हैं तथा स्टेडियम निर्माण की क्या योजना है, कितनी राशि खर्च होगी और कब तक कार्य पूर्ण होगा ?

इस पर खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि यह योजना खेल विभाग की नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास विभाग की योजना है. अभी तक स्टेडियम निर्माण के लिए कोई स्वीकृति जारी नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि यदि नगर पालिका प्रस्ताव भेजती है तो इंटीग्रेटेड स्टेडियम योजना 2015 के तहत आवेदन किया जा सकता है, जो ब्लॉक स्तर पर लागू होती है. इसके अलावा खेल सांसद योजना के अंतर्गत 50 प्रतिशत योगदान (कंट्रीब्यूशन) पर खेल विभाग स्टेडियम निर्माण करवा सकता है.