बकरों का शाही बाजार, सुलेमान और समर के नखरे पड़े भारी, आम आदमी से दूर हुई कुर्बानी!
रायसेन में बकरों के बाजार पर महंगाई की मार, आसमान पर पहुंची वीआईपी डाइड वाले बकरों की कीमतें. अमित दूबे की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : May 25, 2026 at 11:16 AM IST
|Updated : May 25, 2026 at 12:16 PM IST
रायसेन: ईद-उल-अज़हा (बकरीद) के त्योहार को लेकर रायसेन जिला मुख्यालय पर बकरा मंडी सज चुकी है. लेकिन इस बार बाजार में रौनक से ज्यादा महंगाई की तपिश महसूस हो रही है. बकरों की आसमान छूती कीमतों ने इस बार आम और गरीब परिवारों के लिए त्योहार की खुशियों को फीका कर दिया है. दाम सुनकर ही लोग वापस लौट रहे हैं.
सुलेमान और समर बने आकर्षण का केंद्र
इस बार मंडी में सबसे ज्यादा चर्चा बकरों की खास नस्लों, उनके अनोखे नामों और उनके 'शाही' खान-पान की है. बाजार में 'कोटा' नस्ल का 'सुलेमान' और भारी-भरकम दुम्बा नस्ल के बकरे आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जिनकी कीमत ₹1.20 लाख से लेकर ₹1.50 लाख तक बताई जा रही है. वहीं, समर नाम का एक और बकरा अपनी वीआईपी क्वालिटी के कारण ₹1 लाख से ऊपर की बोलियों में ट्रेंड कर रहा है.
बकरों को दी जा रही VIP डाइट
पशुपालकों और व्यापारियों का कहना है कि, बकरों की कीमतों में इस रिकॉर्ड तोड़ इजाफे की मुख्य वजह उनका महंगा पालन-पोषण है. व्यापारी फैजान और सलमान ने बताया. "हम इन्हें सिर्फ घास-फूस नहीं खिलाते, सुलेमान और समर जैसे बकरों की डाइट में रोजाना चना, मक्का, गेहूं, हरी पत्तियों के साथ-साथ काजू-बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स और दूध भी शामिल होता है. जब उनकी परवरिश ही इतनी वीआईपी है, तो दाम बढ़ना लाजिमी है.''
लाखों रुपए पहुंची बकरों की कीमत
बकरों की इस शाही डाइट और महंगाई ने आम खरीदारों के पसीने छुड़ा दिए हैं. मंडी आए स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, जहां पहले 20-25 हजार रुपये में अच्छा बकरा मिल जाता था, वहीं अब बाजार में छोटे बकरों के दाम भी बजट से बाहर हैं. ऐसे में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए इस बार सुन्नत-ए-इब्राहिमी (कुर्बानी) का फर्ज अदा करना एक बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है.

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मंडी में बकरों की जमुनापारी, कश्मीरी नस्ल मौजूद
रायसेन दुर्ग की तलहटी पर लगे इस बाजार में हजारों लोग अपने बकरे यहां बचने के लिए लेकर आए और हजारों लोग इन बकरों को खरीदने के लिए भी पहुंचे. पर कुछ का सौदा पूरा हो सका और कुछ का सौदा ना हो सका. बाजार में कई नस्ल के बकरे मौजूद थे. जिनमें जमुनापारी, कश्मीरी जैसी नस्ल मौजूद थीं पर दाम अधिक होने से लोग बिना खरीदारी किये बगैर ही घर की और रवाना होने लगे.
कई लोग ये देखने के लिए भी मौजूद थे की कौन सा बकरा कितनी उची कीमत तक बिकेगा. फिलहाल गरीब तबके के लोगों ने बाजार से दूरी बना रखी है क्योंकि अभी बाजार उनकी पहुंच से दूर है. उन्हें उम्मीद है की कीमत कम होगी और वह भी कुर्बानी के लिए बकरा खरीद पाएंगे.
ग्राहकों के इंतजार में व्यापारी
स्थानीय बकरा व्यापारी हनुमान बताते हैं कि, ''बकरे की देखरेख बच्चों की तरह होती है उन्हें खाने पीने के लिए सुखा अनाज हरी पत्तियों के साथ काजू बदाम भी कुछ हद तक खिलाए जाते हैं. जिससे कि उनका डाइजेशन अच्छा रहता है. वह स्वस्थ होते हैं उन्हें बीमारी नहीं होती. यही कारण रहता है कि उनके लाए हुए बकरे की कीमत 80000 से ऊपर है. वह उम्मीद लगा रहे हैं कि जल्द ही उनके बकरे के लिए कोई अच्छा खरीदार मिल जाएगा.''

