ग्रीन नंबर प्लेट बनी चुनौती, ANPR कैमरे नहीं पढ़ पा रहे ईवी नंबर, कानून व्यवस्था पर सवाल
ग्रीन नंबर प्लेट को लेकर रायपुर यातायात विभाग में समस्या खड़ी हो गई है. पेश है यह विशेष रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 18, 2026 at 8:50 PM IST
रायपुर: प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच अब उनकी ग्रीन नंबर प्लेट यातायात विभाग के लिए नई परेशानी बनती जा रही है. ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे कई जगह इन नंबर प्लेट को सही तरीके से रीड नहीं कर पा रहे हैं. इस वजह से चालानी कार्रवाई प्रभावित हो रही है और आपराधिक मामलों में वाहनों की पहचान करना भी चुनौती बनता जा रहा है.
ग्रीन नंबर प्लेट और ईवी बनी चुनौती
इस गंभीर तकनीकी खामी को लेकर रायपुर पुलिस ने परिवहन विभाग को पत्र लिखा है, वहीं परिवहन विभाग ने भी केंद्रीय मंत्रालय से समाधान की मांग की है. सवाल उठ रहा है कि क्या तकनीकी खामियों के चलते ईवी कानून व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनती जा रही है,
ग्रीन प्लेट पर अटका निगरानी सिस्टम
प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ईवी की ग्रीन नंबर प्लेट अब ट्रैफिक पुलिस और निगरानी तंत्र के लिए सिरदर्द बनती जा रही है. शहर में लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे कई स्थानों पर इन ग्रीन प्लेट्स को स्पष्ट रूप से पढ़ नहीं पा रहे हैं. इसका सीधा असर चालानी कार्रवाई पर पड़ रहा है. रेड लाइट जंप, ओवरस्पीडिंग या अन्य यातायात उल्लंघनों की स्थिति में सिस्टम नंबर प्लेट कैप्चर नहीं कर पा रहा, जिससे ई-चालान जारी करने में दिक्कत आ रही है. कई मामलों में गलत नंबर रीड होने की शिकायत भी सामने आई है.
पुलिस ने जताई चिंता, लिखा पत्र
इस मामले में तत्कालीन रायपुर एसएसपी डॉ. लाल उम्मेद सिंह ने परिवहन विभाग को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया था. उन्होंने स्पष्ट किया था कि ANPR कैमरे ग्रीन प्लेट को सही तरीके से रीड नहीं कर पा रहे हैं, जिससे न केवल चालानी कार्रवाई प्रभावित हो रही है बल्कि आपराधिक मामलों में वाहनों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है.
ई रिक्शा का नंबर प्लेट रीड करने में हो रही परेशानी
रायपुर यातायात एडीसीपी विवेक शुक्ला ने बताया कि विशेषकर ई-रिक्शा के मामलों में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है. आईटीएमएस के माध्यम से संचालित ANPR कैमरों में नंबर प्लेट पढ़ने की जो सुविधा है, वह इन वाहनों पर प्रभावी नहीं हो पा रही है. इस संबंध में वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है ताकि ई-रिक्शा और अन्य ईवी की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित की जा सके.
अपराधियों के दुरुपयोग की आशंका
यातायात अधिकारियों का कहना है कि यदि कैमरों के माध्यम से नंबर ट्रेस नहीं हो पाएंगे तो इसका दुरुपयोग भी संभव है. किसी आपराधिक घटना के बाद वाहन की पहचान में देरी कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है.
प्रत्येक वाहन की स्पष्ट पहचान कैमरे के माध्यम से हो सके, यह बेहद आवश्यक है. यदि तकनीकी कारणों से नंबर प्लेट पढ़ना संभव नहीं हो पा रहा है तो अपराधी इसका फायदा उठा सकते हैं-विवेक शुक्ला,एडीसीपी, यातायात विभाग, रायपुर
परिवहन विभाग ने केंद्र से मांगा समाधान
पूरे मामले को लेकर अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने बताया कि इस विषय को मंत्रालय को भेज दिया गया है. चूंकि नंबर प्लेट के डिजाइन और नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए इस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है. दिल्ली स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है ताकि आवश्यक तकनीकी सुधार या डिजाइन में बदलाव किया जा सके.
बड़ा सवाल: प्लेट बदले या सिस्टम अपग्रेड हो?
अब सवाल यह है कि क्या ग्रीन नंबर प्लेट के डिजाइन में बदलाव की जरूरत है, या फिर निगरानी सिस्टम और ANPR तकनीक को अपग्रेड करने का वक्त आ गया है? एक ओर सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर तकनीकी खामियां कानून व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के सामने नई चुनौती बनती दिख रही है या फिर हाई-रेजोल्यूशन और एडवांस्ड AI आधारित कैमरों की जरूरत है? जब तक इन सवालों का ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक ग्रीन नंबर प्लेट यातायात विभाग के लिए परेशानी का सबब बनी रह सकती है.

