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मरीज की मौत के बाद एक्शन! प्राइमस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड, भारी जुर्माना भी लगा

अस्पताल को 7 से 10 दिनों के भीतर बंद करने के निर्देश जारी किये गये हैं.

PRIMUS HOSPITAL LICENSE SUSPENDED
रायपुर प्राइमस अस्पताल पर एक्शन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 24, 2026 at 2:21 PM IST

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देहरादून: रायपुर थाना क्षेत्र स्थित प्राइमस अस्पताल में इलाज के दौरान हुई मौत के बाद प्रशासन ने लाइसेंस सस्पेंड कर एक लाख का जुर्माना लगाया है. अस्पताल प्रबंधन ने खुद बंद करने की बात कही है,.अन्यथा 7–10 दिन में सख्त कार्रवाई की जाएगी.

देहरादून के रायपुर थाना क्षेत्र में स्थित प्राइमस अस्पताल में 17 सितंबर को इलाज के दौरान एक व्यक्ति की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. घटना के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उसका पंजीकरण सस्पेंड कर दिया. साथ ही अस्पताल पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

रायपुर प्राइमस अस्पताल पर एक्शन (ETV Bharat)

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की संयुक्त टीम ने अस्पताल में विस्तृत जांच की थी. जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं. अधिकारियों के अनुसार अस्पताल में मरीजों का रिकॉर्ड व्यवस्थित तरीके से नहीं रखा जा रहा था. इतना ही नहीं, इलाज करने वाले डॉक्टरों का विवरण और संबंधित दस्तावेज भी सही ढंग से उपलब्ध नहीं थे. रिकॉर्ड प्रबंधन की इस लापरवाही को स्वास्थ्य विभाग ने बेहद गंभीर माना.

जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया. इसके अलावा एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया, जिसकी राशि अस्पताल प्रशासन द्वारा जमा कर दी गई है. हालांकि, इस मामले में अभी नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) की जांच भी जारी है. अंतिम निर्णय उसके निष्कर्षों पर निर्भर करेगा.

देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने बताया अस्पताल प्रशासन ने विभाग को पत्र लिखकर स्वयं अस्पताल बंद करने की इच्छा जताई है. उन्होंने कहा पंजीकरण सस्पेंड होने के बाद अस्पताल का संचालन वैध नहीं है. विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि अस्पताल पूरी तरह से बंद हो जाए. किसी भी तरह की स्वास्थ्य सेवाएं वहां से संचालित न हों.

सीएमओ ने स्पष्ट किया कि यदि अगले 7 से 10 दिनों के भीतर अस्पताल प्रबंधन स्वयं अस्पताल बंद नहीं करता है तो स्वास्थ्य विभाग अपनी टीम भेजकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेगा. इसमें सीलिंग की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है. घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं. प्रशासन का कहना है कि जिले में संचालित सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की समय-समय पर जांच की जाती है. जहां भी अनियमितताएं पाई जाती हैं, वहां सख्त कार्रवाई की जाती है.

फिलहाल, मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विभाग सतर्कता बरत रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे.

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