अनोखा अंडरपास : तालाब और झरने का मजा एक साथ, देखिए सहूलियत कैसे बनीं मुसीबत
कोरबा में रेलवे का अंडरपास इन दिनों लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है.ऐसा क्यों है देखिए राजकुमार शाह की रिपोर्ट

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 8, 2026 at 6:39 PM IST
कोरबा : बारिश के मौसम में नदी नाले उफान पर होते हैं. कई बार शहर में भी भारी बारिश के कारण जलभराव की समस्या आती है.लेकिन आज हम आपको इंजीनियरिंग की ऐसी मिसाल दिखाने जा रहे हैं,जिसे आप देखने के बाद कहेंगे कि क्या ऐसा भी होता है.जिस जगह के बारे में हम बात कर रहे हैं वो रेलवे के अधीन बना एक अंडरपास है. इस अंडरपास को रेलवे की अनुषंगी कंपनी इरकॉन और छत्तीसगढ़ ईस्ट वेस्ट रेलवे लिमिटेड के क्वॉलिफाइड इंजीनियर्स ने मिलकर तैयार किया है. लेकिन ये अंडरपास बारिश के मौसम में स्वीमिंग पूल में तब्दील हो जाता है. यानी जिस अंडरपास को बारिश के दौरान यातायात सुगमता के लिए बनाया गया है, वो खुद लोगों के आवागमन के बीच सबसे बड़ा बाधा बन चुका है.
निर्माण पूरा होने के बाद सुधारी जा रही गलती
आपको बता दें कि अंडरपास का निर्माण होने के बाद जब इसमें पानी भर गया, तब बने बनाए स्ट्रक्चर में किसी तरह ड्रेनेज सिस्टम को एडजस्ट किया जा रहा है. जिससे निर्माण की गुणवत्ता अब सवालों के घेरे में है. बिना प्लानिंग के हुआ ये निर्माण इन दिनों कोरबा में चर्चा का विषय बना है. अंडरपास की कम चौड़ाई और खराब ड्रेनेज सिस्टम इसकी सबसे बड़ी खामी है.पानी खाली होने के बाद भी इस अंडरपास में वाहनों की कतार लग जाती है.क्योंकि इस अंडरपास के दोनों ओर तालाब बन जाता है. यही जिस सड़क को ये अंडरपास जोड़ता है वो कीचड़ में तब्दील हो जाता है.

कहां पर है अंडरपास ?
गेवरा रोड- पेंड्रा रोड रेल परियोजना के अंतर्गत कोरबा के जिला मुख्यालय से कोयलांचल क्षेत्र दीपका सहित छोटे-मोटे कई गांवों को जोड़ने वाला कुचैना अंडरपास काफी सुर्खियां बटोर रहा है. बारिश में स्वीमिंग पूल का मजा देने वाला ये अंडरपास अब लोगों की नजरों में चढ़ चुका है.कुचैना अंडरपास कई स्थानों से लीक करता है,जिससे इस अंडरपास में पानी भरा रहता है.
क्या है स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना ?
इस अंडरपास से रोज आवागमन करने वाले स्थानीय निवासी अनीष कहते हैं कि अंडरपास में पानी भरा जा रहा है. जिससे आवागमन बाधित हो रहा है. एक दिन पहले भी मैं यहां फंस गया था.
स्पष्ट तौर पर यह दिख रहा है कि बिना प्लानिंग के इस अंडरपास को बना दिया गया है. इंजीनियरों को पहले प्लानिंग करनी चाहिए थी और फिर इसका निर्माण करना चाहिए था. अंडरपास बना दिया, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम ही नहीं है - अनीष,स्थानीय

स्थानीय व्यापारी राधे कुमार का कहना है कि अंडरपास की खामियों विरोध हमने तब भी किया था. इसकी खामियों से अधिकारियों को अवगत कराया था.
आज भी जो निर्माण कार्य किया जा रहा है, पानी निकालने के लिए जो पाइप खोदकर डाली गई है वो बेहद पतली है, इससे पानी को निकालना संभव नहीं होगा. समस्या बनी रहेगी, इस विषय से भी हमने काम करने पहुंचे अधिकारियों को अवगत कराया है- राधे कुमार,स्थानीय
'रेलवे ने दिया नया झरना'
स्थानीय पार्षद आरती सिंह का कहना है कि अंडरपास का निर्माण जब से शुरू हुआ है. तब से यह हमारे लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. लोग लगातार शिकायत करते हैं, हम तो आम लोगों की बात अधिकारियों तक पहुंचाते हैं लेकिन कोई सुधार नहीं होता.
इस अंडरपास में पानी भर जा रहा है. कोरबा में वैसे तो कई झरने हैं. लेकिन यह नया झरना क्षेत्रवासियों को दिया गया है, जो सिर्फ और सिर्फ परेशानी लेकर आया है- आरती सिंह, पार्षद
क्षेत्र के अन्य पार्षद नवीन कुकरेजा का कहना है कि अंडरपास लोगों के लिए कोई सुविधा लेकर नहीं आया है. उल्टा यह मुसीबत लेकर आया है, पढ़े-लिखे इंजीनियरों की पढ़ाई पर सवालिया निशान है.

हमने कभी नहीं सुना कि किसी स्ट्रक्चर का निर्माण कर दिया जाए और नाली का निर्माण न किया जाए. इस अंडरपास में ड्रेनेज सिस्टम नहीं है. जब पूरा स्ट्रक्चर खड़ा कर दिया गया है, तब ड्रेनेज सिस्टम का इंतजाम किया जा रहा है. यह भ्रष्टाचार और लापरवाही का जीता जागता नमूना है- नवीन कुकरेजा, पार्षद
एनटीपीसी का डंप प्लानिंग में शामिल नहीं था, इसलिए भर रहा पानी
पानी भरने के बाद मौके पर ड्रेनेज सिस्टम का इंतजाम करने पहुंचे इरकॉन के इंजीनियर शैलेंद्र का कहना है कि जब यह अंडर पास बन रहा था. तब इसके बगल में निर्मित एनटीपीसी के इस राखड़ डंप की जानकारी हमें नहीं थी. वहां से इतनी अधिक मात्रा में पानी आएगा इस बात का हमें पता नहीं था. इसलिए एनटीपीसी के डंप के कारण परेशानी हो रही है.
अंडरपास में पानी भर रहा है, जिसके लिए हम ड्रेनेज सिस्टम का इंतजाम कर रहे हैं. हालांकि यह काम एनटीपीसी के द्वारा किया जाना था, लेकिन उन्होंने तत्काल कोई सुधार कार्य करने से मना कर दिया, हाथ खड़े कर दिए. इसके बाद हम यहां पहुंचे हैं और तात्कालिक मरम्मत कार्य कर रहे हैं. जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कर ड्रेनेज सिस्टम का इंतजाम कर दिया जाएगा-शैलेंद्र ,इंजीनियर
सिर्फ एक नहीं कई अंडरपास में इस तरह की परिस्थितियों हमने संज्ञान में लिया
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के सीनियर पीआरओ संतोष कुमार से ईटीवी भारत ने इस विषय पर सवाल पूछा, जिस पर उन्होंने बताया कि यह सिर्फ कुचैना अंडरपास की बात नहीं है. कई स्थानों पर अंडरपास में पानी भर रहा है.
बरसात के मौसम में ऐसा होता है. यह रेलवे के संज्ञान में है, जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं. एजेंसी को समस्या का समाधान करने को कहा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही सुधारात्मक उपाय कर लिए जाएंगे- संतोष कुमार, सीपीआरओ,रेलवे
एक दूसरे पर गलती का सेहरा
आपको बता दें कि जब अंडरपास मौके पर मौजूद कंपनी के इंजीनियर एनटीपीसी पर ठीकरा फोड़ रहे हैं, जबकि एनटीपीसी के अधिकारी दबी जुबानी रेलवे के अधीन कार्यरत कंपनियों की जिम्मेदारी बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं. कारण चाहे जो भी हो, फिलहाल लोग परेशान हो रहे हैं. अधिक बरसात होने पर कोयलांचल क्षेत्र की लगभग 2 लाख की आबादी मुख्यालय से पूरी तरह से कट रही है. लोग पानी उतरने का इंतजार करते हैं, कई बार इमरजेंसी स्थिति में वह घंटों तक यहां फंसे रह जाते हैं.
क्यों कोयलांचल के लोगों के लिए जरुरी है ये अंडरपास ?
कुचैना अंडरपास कोयलांचल क्षेत्र दीपका और आसपास के इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. यह जिला मुख्यालय सहित कुसमुंडा से दीपका क्षेत्र के लगभग 2 लाख की आबादी को जोड़ता है. इस अंडरपास में पानी भर जाने या कट जाने का मतलब यह होगा कि पूरा का पूरा क्षेत्र जिला मुख्यालय से कट चुका है. खासतौर पर इमरजेंसी स्थिति में हालात और नाजुक बन रही है. पूर्व में दीपका क्षेत्र की ओर सफर करने के लिए जो सड़क थी. उसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, आम लोगों के आवागमन के लिए अब यही एकमात्र विकल्प है. जिससे होते हुए लोग अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं.
गेवरा रोड-पेंड्रा रोड का हिस्सा है अंडरपास
कुचैना अंडरपास रेलवे की छत्तीसगढ़ में महत्वाकांक्षी रेल परियोजना गेवरा रोड-पेंड्रा रोड का हिस्सा है. इस रेल परियोजना की लंबाई गेवरा से पेंड्रा रोड तक कुल 135 किलोमीटर है. इस रेल कॉरिडोर का 90 फीसदी काम लगभग पूरा हो चुका है. अनुमानित लागत 5000 करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है. कुचैना अंडरपास इस परियोजना का हिस्सा है, इसलिए अधिकारी केवल इस अंडरपास के लागत के विषय में स्पष्ट तौर पर जानकारी नहीं दे पा रहे हैं. कई एजेंसियां काम कर रही हैं. इसलिए जानकारी दे पाना जटिल काम है. गेवरा से होते हुए रेलवे लाइन कुसमुंडा और फिर सुरकछार होते हुए कटघोरा से बाहर निकल रही है. जो पेंड्रा रोड तक जाएगी.
किस कंपनी ने बनाया है ये अनोखा अंडरपास
सामान्यतौर पर रेलवे के कार्यों की गुणवत्ता को काफी अच्छा माना जाता है. खासतौर पर जब राज्य सरकार की एजेंसियों से तुलना की जाए, तब केंद्र की एजेंसी का काम काफी बेहतर होता है. लेकिन कुसमुंडा के कुछ अंडरपास के मामले में यह तथ्य पूरी तरह से सटीक नहीं बैठते.
गेवरा रोड-पेंड्रा रोड का इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड (IRCON) छत्तीसगढ़ में एक प्रमुख निर्माण संस्था के रूप में कार्य करती है. विशेष रूप से रेलवे बुनियादी ढांचे के विकास में छत्तीसगढ़ में इरकॉन सीधे तौर पर सरकारी परियोजनाओं के लिए काम करती है. छत्तीसगढ़ पूर्व रेल परियोजना (Chhattisgarh East Railway Limited - CERL) और छत्तीसगढ़ पूर्व-पश्चिम रेल परियोजना (Chhattisgarh East-West Railway Limited - CEWRL) की परियोजनाओं में इरकॉन एक प्रमुख स्टेकहोल्डर एजेंसी है.
ये कंपनियां इरकॉन, एसईसीएल (SECL) और छत्तीसगढ़ सरकार का एक संयुक्त उद्यम (joint venture) है. गेवरा रोड-पेंड्रा रोड रेल कॉरिडोर में सिविल कार्यों, पुल निर्माण और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए ये कंपनियां उप-ठेकेदार के रूप में काम करती हैं.इसी कंपनी ने इस अनोखे अंडरपास का निर्माण किया है,जो अब लोगों के लिए मुसीबत का सबब है.
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