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उत्तराखंड में सियासी सुपर वीक! नितिन नवीन और राहुल गांधी के दौरों से चुनावी हलचल तेज

कांग्रेस और बीजेपी दोनों दल चुनाव मोड में आ चुके हैं. दोनों ही दलों के राष्ट्रीय नेता उत्तराखंड आ रहे हैं. रिपोर्ट- किरणकांत शर्मा

उत्तराखंड में सियासी सुपर वीक!
उत्तराखंड में सियासी सुपर वीक! (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 27, 2026 at 8:46 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में अगले साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है. इसलिए उत्तराखंड अब चुनावी रंग में रंगा नजर आने लगा है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने विधानसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति बनानी शुरू की है. यही कारण है कि दोनों ही पार्टियों के दिग्गज नेता उत्तराखंड आ रहे हैं. एक तरफ जहां बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड दौरा कंफर्म हो चुका है, तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी भी दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड आ रहे हैं.

उत्तराखंड में 2027 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ही अहम साबित होगा. एक तरफ जहां बीजेपी इस बार जीत की हैट्रिक लगाने का प्रयास करने में लगी हुई है तो वहीं कांग्रेस अपनी खोई हुई सत्ता पाने की जुगत में. इसलिए दोनों पार्टियों ने ग्राउंड वर्क शुरू कर दिया है.

नितिन नवीन का तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा: चुनावी रणनीति बनाने में इस बार भी बीजेपी थोड़ी आगे ही नजर आ रही है. क्योंकि बीजेपी अभी तक उत्तराखंड में पीएम मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित और रक्षा मंत्री राजनाथ का दौरा करा चुकी है. वहीं अब इस कड़ी में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का नाम भी जुड़ने जा रहा है.

नितिन नवीन 28 मई को तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड आ रहे हैं, जिसके लिए बीजेपी कई दिनों से तैयारियों में जुटी हुई है. राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन का यह पहला उत्तराखंड दौरा है. माना जा रहा है कि इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ भी बैठक करेंगे और मिशन 2027 की रणनीति पर चर्चा करेंगे.

राहुल गांधी का दौरा: वहीं, कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी की बात की जाए तो वो आगामी 04 जून को दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड आ रहे हैं. राहुल गांधी करीब चार साल बाद उत्तराखंड आ रहे हैं. इससे पहले वह दिसंबर 2021 में देहरादून के परेड ग्राउंड में विजय दिवस समारोह में शामिल होने आए थे.

दोनों दलों के ये दौरे महज राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनाव की शुरुआती रणभेरी माने जा रहे हैं. लंबे समय के बाद राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे को कांग्रेस संगठन के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

कुमाऊं से शुरुआत करेंगे राहुल गांधी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी चार जून को उत्तराखंड पहुंचेंगे और अपने दौरे की शुरुआत कुमाऊं मंडल से करेंगे. राहुल गांधी अल्मोड़ा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे. इस रैली में राहुल गांधी न सिर्फ स्थानीय मुद्दों पर बीजेपी को घेरने का काम करेंगे, बल्कि बेरोजगारी, पलायन और युवाओं से जुड़े सवालों को भी कांग्रेस प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है.

पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों पर फोकस: उत्तराखंड को सैनिक बाहुल्य क्षेत्र कहा जाता है. इसलिए कांग्रेस और बीजेपी का हर चुनाव में पूर्व सैनिकों और सैनिक परिवारों पर पूरा फोकस होता है. यही कारण है कि राहुल गांधी का दूसरा कार्यक्रम पौड़ी में रखा गया है, जहां वो पूर्व सैनिक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. इस दौरान राहुल गांधी सैनिकों के परिवारों से संवाद भी करेंगे.

सैनिकों को कांग्रेस का मैसेज: राजनीतिक तौर पर इसे कांग्रेस की बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक कवायद माना जा रहा है क्योंकि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक और सैनिक परिवार निर्णायक वोट बैंक माने जाते हैं. कांग्रेस अग्निवीर योजना, पूर्व सैनिकों की सुविधाओं और सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवारों के मुद्दों को लेकर भाजपा को घेरने की तैयारी में है.

कांग्रेस चाहती है कि राहुल गांधी सीधे सैनिकों से संवाद कर यह संदेश दें कि कांग्रेस उनके मुद्दों को गंभीरता से उठा रही है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा है कि लंबे समय बाद हो रहे इस कार्यक्रम से कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार होगा. संगठन अभी से कार्यक्रमों की तैयारियों में जुट गया है.

कांग्रेस, राहुल गांधी के इस दौरे को सिर्फ जनसभा तक सीमित नहीं रखना चाहती है. राहुल गांधी के इस दौरे से पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल भी बढ़ेगा. संगठन अभी से कार्यक्रमों की तैयारियों में जुट गया है.
- गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष -

देहरादून में रणनीति बैठक: अल्मोड़ा की जनसभा के बाद अगले दिन पांच जून को राहुल गांधी देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, पूर्व मंत्रियों, जिला अध्यक्षों और अनुषांगिक संगठनों के पदाधिकारियों के साथ बड़ी बैठक करेंगे. इस बैठक को कांग्रेस संगठन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.

गुटबाजी होगी खत्म? कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी प्रदेश संगठन से सीधे फीडबैक लेंगे और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर जमीनी रणनीति पर चर्चा करेंगे. दरअसल, कांग्रेस लंबे समय से उत्तराखंड में गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है. कई वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय की कमी समय-समय पर सामने आती रही है. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत भी कई मौकों पर संगठनात्मक फैसलों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं. ऐसे में राहुल गांधी का यह दौरा संगठन को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं में भरोसा पैदा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस अब उत्तराखंड में मुद्दों की राजनीति के जरिए भाजपा को चुनौती देने की तैयारी में है. बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और महंगाई जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस आने वाले समय में बड़े आंदोलन की रणनीति भी बना सकती है. राहुल गांधी का यह दौरा लंबे समय बाद हो रहा है तो ये कांग्रेस के लिए और भी महत्वपूर्ण है. सबसे बड़ी यही है कि राहुल तो अपनी बात कहकर चले जाएंगे, लेकिन बाद में भी पार्टी में सब कुछ वैसे ही चलता रहा, जैसे अक्सर देखने को मिलता है, तो फिर क्या ही कहना.
- भागीरथ शर्मा, राजनीतिक जानकार -

राजनीतिक जानकार भागीरथ शर्मा का मानना है कि कांग्रेस को बीजेपी से लड़ने के लिए जिस तरह से देश में बहुत कुछ करने की जरूरत है, उसी तरह से राज्य में भी कांग्रेस को अभी बीजेपी से लड़ने के लिए अपने स्वार्थ छोड़ने होंगे.

भाजपा का बूथ से शिखर अभियान: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का उत्तराखंड दौरा भी राजनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पार्टी ने उनके कार्यक्रम में बदलाव करते हुए कई नए कार्यक्रम जोड़े हैं. भाजपा नेतृत्व इस दौरे को आगामी विधानसभा चुनाव की संगठनात्मक तैयारी का बड़ा चरण मान रहा है.

नितिन नवीन का कार्यक्रम: नितिन नवीन 28 मई को देहरादून पहुंचेंगे. एयरपोर्ट से लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय तक जगह-जगह उनका स्वागत किया जाएगा. हालांकि, ऊर्जा संकट और सादगी के संदेश को देखते हुए पार्टी ने रोड शो से दूरी बनाई है. उनके दौरे की शुरुआत भाजपा कोर कमेटी की बैठक से होगी, जिसके बाद वे मंत्रियों के साथ अलग से बैठक करेंगे. 29 मई को सभी सांसदों और विधायकों के साथ बैठक प्रस्तावित है.

देहरादून के डाकरा क्षेत्र के एक बूथ अध्यक्ष के घर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भोजन भी करेंगे. साथ ही बूथ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे. भाजपा इसे अंत्योदय से संगठन की रणनीति के तौर पर प्रचारित कर रही है.

संतों व शिक्षाविदों के बीच संदेश: भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यक्रम में दो नए बड़े आयोजन भी जोड़े हैं. 29 मई की शाम नितिन नवीन ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन में गंगा आरती में शामिल होंगे और संत समाज के साथ संवाद करेंगे. इसमें हरिद्वार और ऋषिकेश के कई प्रमुख संतों की मौजूदगी रहने की संभावना है. भाजपा इस कार्यक्रम के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक विमर्श को भी राजनीतिक तौर पर मजबूत करने की कोशिश में दिखाई दे रही है.

इसके अलावा 30 मई को नितिन नवीन शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में विकसित भारत 2047 में उच्च शिक्षा की भूमिका विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे. यहां वो शिक्षाविदों और युवाओं से संवाद करेंगे और कॉलेज ऑडिटोरियम का उद्घाटन भी करेंगे. भाजपा इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं, शिक्षित वर्ग और नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रही है.

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि भाजपा संगठन अंतिम पंक्ति के कार्यकर्ता तक पहुंच बनाने में विश्वास रखता है. राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा उसी सोच को मजबूत करेगा.

पहाड़ में चुनावी शंखनाद: राजनीतिक जानकार सुनील दत पांडे का मानना है कि उत्तराखंड में अब हर बड़ा कार्यक्रम सीधे विधानसभा चुनाव 2027 से जोड़कर देखा जाएगा. भाजपा जहां सत्ता की निरंतरता बनाए रखने के लिए संगठन को धार दे रही है तो वहीं कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल तैयार करने की कोशिश में जुटी है.

राहुल गांधी और नितिन नवीन के प्रस्तावित दौरे बेहद अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि दोनों दल इन कार्यक्रमों के जरिए अपने कार्यकर्ताओं को साफ संदेश देना चाहते हैं कि अब चुनावी तैयारी का समय शुरू हो चुका है. आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में बयानबाजी, रणनीतिक बैठकों, शक्ति प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियानों की रफ्तार और तेज होने वाली है. पहाड़ की राजनीति अब पूरी तरह चुनावी मोड में प्रवेश करती दिखाई दे रही है ओर ये दौरे उसकी शुरुआत है.
- सुनील दत पांडे, राजनीतिक जानकार -

भाजपा बनाम कांग्रेस किसकी रणनीति पड़ेगी भारी: उत्तराखंड में इस समय भाजपा मजबूत संगठन और सत्ता की ताकत के साथ मैदान में है. विधानसभा में भाजपा के पास 47 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस 19 सीटों के साथ विपक्ष में है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और धार्मिक-सांस्कृतिक मुद्दों को अपनी बड़ी उपलब्धियों के तौर पर पेश कर रही है. भाजपा का फोकस संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखने और हिंदुत्व-राष्ट्रवाद के एजेंडे को मजबूत बनाए रखने पर है.

वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, अग्निवीर योजना, महंगाई और युवाओं की नाराजगी को बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश में है. राहुल गांधी का दौरा इसी रणनीति की शुरुआत माना जा रहा है. कांग्रेस चाहती है कि कार्यकर्ताओं के भीतर नई ऊर्जा पैदा हो और जनता के बीच यह संदेश जाए कि पार्टी अब मैदान में सक्रिय रूप से उतर चुकी है.

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