MMDR को लेकर हेमंत सरकार पर जमकर बरसे रघुवर दास, झारखंड को लूटखंड बनाने का लगाया आरोप
MMDR बिल को लेकर रघुवर दास ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा है. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.

Published : August 26, 2026 at 3:26 PM IST
रांची: झारखंड में इन दिनों MMDR विधेयक को लेकर पक्ष-विपक्ष के बीच घमासान मचा हुआ है. एक तरफ राज्य सरकार ने इसे मालिकाना हक छीनने वाला बताया तो दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि नए कानून से एक देश में खनिज का एक रेट हो जाएगा. इस बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमंत सरकार को आड़े हाथों लिया है.
झारखंड को लूटखंड बनाने का आरोप
MMDR की सराहना करते हुए रघुवर दास ने हेमंत राज में चल रहे अवैध कोल माइनिंग से लेकर डीएमएफटी में लूट पर सवाल खड़ा करते हुए झारखंड को लूटखंड बनाने का आरोप लगाया है. बीजेपी प्रदेश कार्यालय में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि झामुमो इसको गलत बताकर जनता को गुमराह कर रही है.
उन्होंने मीडिया में आई खबर का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में किस तरह अवैध रूप से कोयला का उत्खनन हो रहा है, वह जगजाहिर है. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने झारखंड को लूटखंड बना दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री ने एमएमडीआर संशोधन को राज्यहित में बताते हुए कहा कि माइनिंग टैक्स और वैधानिक भुगतान का लगभग 90% राशि राज्यों को जाता है, जो आगे भी जारी रहेगा. एमएमडीआर संशोधन विधेयक से जनजाति क्षेत्र में विकास होने का दावा करते हुए रघुवर दास ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार जनजाति क्षेत्र के विकास के लिए कई योजना संचालित कर रही है.
चुनाव के वक्त सरकार को याद आई मंईयां योजना- रघुवर दास
उन्होंने अपने कार्यकाल में चलाए गए लोकहित से जुड़ी कई योजनाओं को हेमंत सरकार द्वारा बंद किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए हमारी सरकार ने 1 रुपए में 50 लाख तक की संपत्ति की रजिस्ट्री की व्यवस्था की थी, मगर इसे भी बंद कर दिया गया. इसके अलावा इस सरकार ने किसानों के सम्मान के लिए शुरू की गई प्रति एकड़ पांच हजार रुपए देने की योजना थी, मगर सरकार ने इसे भी बंद कर दिया और जब चुनाव आया तो उन्हें मंईयां याद आने लगी.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार ने महिलाओं, युवाओं और किसानों के साथ विश्वासघात किया है. आज राज्य में विश्वास का संकट है. हालत यह है कि आज राज्य में इस सरकार पर न तो व्यवसायी विश्वास कर रहे हैं न ही किसान विश्वास कर रहे हैं और न ही छात्र विश्वास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सरकार 1100 करोड़ रुपए के सेस का रोना रो रही है, लेकिन आंकड़े सरकार की नीयत में खोट को उजागर करते हैं. उन्होंने कहा कि डीएमएफटी फंड में किस तरह से लूट हुआ है, वह सबके सामने है.
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