हिमाचल में मौसम की बेरुखी से संकट में रबी फसल, सूखे की मार की वजह से इतने हजार हेक्टेयर में नहीं हुई बिजाई
हिमाचल में मौसम की बेरुखी से रबी फसल पर पड़ रही भारी. खेतों में नमी न हो से हजारों हेक्टेयर में नहीं हुई बिजाई.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 8, 2026 at 5:41 PM IST
शिमला: हिमाचल में इस बार रबी फसल का मौसम किसानों के लिए चिंता और संकट का बड़ा कारण बन गया है. प्रदेश में समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से खेत सूखे पड़े हैं. अधिकतर क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहे सूखे की वजह से हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि इस बार 36,335 हेक्टेयर में रबी फसलों की बिजाई ही नहीं हो सकी. जिन किसानों ने किसी तरह हिम्मत कर खेतों में बीज डाले है, उनकी उगी हुई फसल भी अब सूखे की मार से प्रभावित होने लगी है.
मौसम की बेरुखी का रबी फसलों पर असर
मौसम की बेरुखी ने गेहूं, जौ और चना जैसी प्रमुख रबी फसलों पर गहरा असर डाला है. इसका खुलासा कृषि विभाग को फील्ड से मिली रिपोर्ट में हुआ है. आने वाले समय में अगर मौसम मेहरबाब नहीं हुआ तो फसलों को होने वाले नुकसान का आंकड़ा और अधिक बढ़ सकता है.

36,335 हेक्टेयर पर नहीं हुई बिजाई
हिमाचल में रबी सीजन में गेहूं, जौ, चना और दालों की बिजाई के लिए 3,53,270 हेक्टेयर भूमि पर बिजाई का लक्ष्य तय किया गया है. लेकिन प्रदेश में अक्टूबर के बाद समय पर बारिश और बर्फबारी न होने से किसान सिर्फ 3,16,935 हेक्टेयर पर ही इन फसलों की बिजाई कर पाए हैं. इसमें भी बहुत से क्षेत्रों में किसानों ने गेहूं की बिजाई सूखे में की है. ऐसे में जो फसल उग रही है, उस पर अब लंबे समय से चल रहे सूखे की मार पड़ रही है.

3,22,000 हेक्टेयर पर गेहूं की बिजाई की लक्ष्य
प्रदेश भर में सबसे अधिक गेहूं की बिजाई के लिए 3,22,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सूखे की वजह से किसान 2,90,713 हेक्टेयर पर ही बिजाई कर पाए हैं. ऐसे में 31,287 हेक्टेयर भूमि पर किसान नमी न होने की वजह से बिजाई नहीं कर पाए हैं. इसी तरह से जौ की बिजाई के लिए 18,000 हेक्टेयर का लक्ष्य तय किया गया है. जिसमें किसान अभी तक सूखे की वजह 405 हेक्टेयर भूमि बिजाई नहीं हुई है.

10,334 हेक्टेयर में फैसले प्रभावित
हिमाचल में खाद्यान्न उत्पादन इस बार संकट में पड़ गया है. प्रदेश में इस बार 7,15,280 मीट्रिक टन खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है. लेकिन मौसम की बेरुखी से बिजाई न होने और उगी हुई फसल पर सूखे की मार पड़ने से खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य भी खतरे में पड़ गया है. प्रदेश में 10,334 हेक्टेयर में गेहूं, जौ, चना और दालों की फसलें सूखे के कारण करीब 33 फीसदी से प्रभावित हो चुकी है, इसमें अकेले 9,369 हेक्टेयर पर गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है. इसी तरह से 405 हेक्टेयर पर जौ की फसल सूखे की वजह से प्रभावित हुई है. इसी तरह से प्रदेश में कमर्शियल फसलों में 30,215 हेक्टेयर पर सब्जियों की बिजाई की गई है, जिसमें 527 हेक्टेयर भूमि पर सब्जियों की फसल सूखे की चपेट में आई है.

फसलों की बिजाई के लिए लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन में ली जाने वाली फसलों में 3,53,270 हेक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें सबसे अधिक गेहूं की बिजाई के लिए 3,22,000 हेक्टेयर, जौ 18,000 हेक्टेयर, चना 270 हेक्टेयर व रबी दालें के लिए 13,000 हेक्टेयर में बिजाई का लक्ष्य तय किया गया है.
7,15,280 मीट्रिक टन पैदावार का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश में रबी सीजन में पैदावार के लिए भी कृषि विभाग ने लक्ष्य तय किया है. इसमें सबसे अधिक गेहूं की फसल के पैदावार के लिए 6,50,000 मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसी तरह से जौ की पैदावार के लिए 30,000 मीट्रिक टन, चना 280 मीट्रिक टन और रबी दालों के उत्पादन के लिए 35,000 मीट्रिक टन का लक्ष्य तय है.

अधिकारियों को 10 दिनों में रिपोर्ट देने के निर्देश
कृषि निदेशक डॉ. रविंद्र सिंह जसरोटिया व संयुक्त निदेशक रविन्द्र चौहान ने कहा, 'रबी सीजन में सूखे की वजह से प्रभावित हुई फसलों की फील्ड से रिपोर्ट प्राप्त हो गई है, जिसे अब सरकार को भेजा रहा है. सूखे की स्थिति को देखते हुए फील्ड अधिकारियों को हर 10 दिनों रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं.
13 जनवरी तक नहीं होगी बिजाई
हिमाचल प्रदेश में जनवरी महीने में भी किसानों को निराश किया है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अभी भी 13 जनवरी तक प्रदेश में बारिश के कोई आसार नहीं है. इस तरह से मौसम की बेरुखी का दौर लंबा रहेगा. जिस कारण किसानों की आने वाले दिनों में भी रबी सीजन में शेष बची कृषि योग्य भूमि पर बिजाई की उम्मीद पूरी होने वाली नहीं है. वहीं, अगर जनवरी में हुई बारिश के आंकड़े पर गौर करें तो प्रदेश में 1 से 7 जनवरी तक 2.8 मिलीमीटर बारिश हुई है, जो सामान्य से 77 फीसदी कम है. इस दौरान प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 12.3 मिलीमीटर बारिश का है.

1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक इतनी फीसदी कम बारिश
हिमाचल मानसून की विदाई के बाद 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक के पोस्ट मानसून ने हमेशा ही प्रदेशवासियों को बारिश के लिए तरसाया है. इस बार अक्टूबर में सामान्य से 173 फीसदी अधिक बारिश होने के बाद नवंबर और दिसंबर का महीना सूखा बीत गया. ऐसे में अक्टूबर में भारी बारिश होने के बाद भी इस बार पोस्ट मानसून सीजन में बारिश का आंकड़ा सामान्य से फीसदी कर रहा.
16 साल में पोस्ट मानसून की स्थिति
पोस्ट मानसून में पिछले 16 सालों के आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में एक ही बार साल 2019 में सामान्य से अधिक बारिश हुई है.

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