उत्तराखंड में रिटायरमेंट के बाद अफसरों की सरकारी पारी, उठ रहे कई सवाल, पढ़ें पूरी खबर
उत्तराखंड में अफसरों को लेकर एक ऐसी परंपरा शुरू हो गई है, जो उन्हें रिटायर ही नहीं होने देती.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : August 22, 2026 at 7:31 AM IST
|Updated : August 22, 2026 at 1:00 PM IST
देहरादून: उत्तराखंड में कभी सेवा विस्तार तो कभी आयोग, प्राधिकरण और परिषदों में एडजस्टमेंट की व्यवस्था के चलते वो सरकारी कामकाज से जुड़े ही रहते हैं. ताजा मामलों ने अफसरों की नियुक्तियों को लेकर एक बार फिर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं. उत्तराखंड में क्या सरकार अधिकारियों को सेवानिवृत्त करना ही नहीं चाहती? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि रिटायरमेंट की उम्र पूरी कर चुके अधिकारियों को लगातार नई जिम्मेदारियां देकर सरकारी सिस्टम में एडजस्ट किया जा रहा है.
खास बात यह है कि इन नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया क्या है, इसके मानक क्या हैं और किस आधार पर अधिकारियों का चयन किया जा रहा है, यह अब भी स्पष्ट नहीं है. यहां तक कि दायित्वधारियों की सिफारिश पर भी इंजीनियरों को सेवा विस्तार मिलने के मामले सामने आ चुके हैं. ऐसा भी नहीं है कि इस पर सरकारी सिस्टम में कोई औपचारिक प्रक्रिया ना रखी गई हो. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिरकार सरकारी सिस्टम में 60 साल तक काम करने वाले यही अधिकारी लगातार इन नियुक्तियों के लिए क्यों चुने जा रहे हैं. निजी क्षेत्र के एक्सपर्ट और बुद्धिजीवियों के साथ टेक्निकल एक्सपर्ट पर भरोसा क्यों नहीं जताया जा रहा. यह सभी सवाल कांग्रेस की तरफ से आए हैं.
सरकार पूरी तरह से अधिकारियों के दबाव में काम कर रही है. केवल सेटिंग गेटिंग के आधार पर अधिकारियों को रिटायरमेंट होने के बाद फिर से या तो सेवा विस्तार दिया जा रहा है या फिर उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं की तरह तमाम आयोग, प्राधिकरण और परिषदों में एडजस्ट किया जा रहा है.
-सुजाता पॉल, कांग्रेस नेत्री-
आज जब युवा बेहतर क्वालिफिकेशन और शिक्षा के साथ नए इनोवेशन करने के लिए तैयार है और सरकारी सिस्टम को सुधारने के लिए उनकी बेहद ज्यादा जरूरत है तब सरकार ऐसे युवाओं पर भरोसा नहीं जता रही है. ताजा मामला रिटायर्ड IAS अफसर दीपेंद्र चौधरी का है, जिन्हें सरकार ने सेवा का अधिकार आयोग में आयुक्त की जिम्मेदारी दी है. 60 साल सेवा देने के बाद हाल ही में दीपेंद्र चौधरी सचिव पद से सेवानिवृत हुए थे.अभी उनके रिटायरमेंट को कुछ ही समय हुआ था कि उन्हें आयोग में आयुक्त बना दिया गया.
इसके अलावा हाल ही में उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से प्रबंध निदेशक पद से सेवानिवृत अनिल यादव को भी जिम्मेदारी दी गई है, इसी तरह निदेशक पद से सेवानिवृत अजय अग्रवाल को भी सेवानिवृत्ति के बाद जिम्मेदारी मिली है. अनिल यादव को जहां RERA के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली है तो अजय अग्रवाल को RERA में सदस्य बनाया गया है. ऊर्जा निगम में एक और मामला डायरेक्टर ऑपरेशन का है.
डायरेक्टर ऑपरेशन एमआर आर्य इसी साल 60 साल की सेवा देने के बाद सेवानिवृत हो चुके हैं, लेकिन सरकार को उनका काम इतना बेहतरीन लगा कि उन्हें 2 साल का सेवा विस्तार दे दिया गया है. इस फेहरिस्त में हाल ही में एक नाम और जुड़ा है. यह नाम लोक निर्माण विभाग के रिटायर HOD एजाज अहमद का है. एजाज अहमद को हाल ही में सलाहकार बनाया गया है, इसके बाद वह फिर से सरकारी सिस्टम में फिर शामिल हो गए हैं.
सरकार कई बार अनुभवी अधिकारियों को उनके अनुभव के आधार पर फिर से मौका देती है. इसमें कुछ भी गलत नहीं है. इसको लेकर कांग्रेस जो आरोप लगा रही है वह पूरी तरह से गलत है.
-खजानदास, कैबिनेट मंत्री-
राज्य में ये पहली बार नहीं हुआ है इससे पहले सिंचाई विभाग से लेकर लोक निर्माण विभाग तक के हेड ऑफ डिपार्टमेंट को सेवा विस्तार दिया जा चुका है. इतना ही नहीं सरकार ने जिलाधिकारी से लेकर गढ़वाल कमिश्नर तक को भी सेवानिवृत्ति के बाद सेवा विस्तार दिया है. हाल ही में एक ऐसा ही बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें मंडी से जुड़े एक इंजीनियर को सेवा विस्तार दिया गया है.
खास बात यह है कि इस सेवा विस्तार को देने से पहले मंडी में दायित्वधारी के रूप में काम करने वाले भाजपा के नेता का इस इंजीनियर के लिए सिफारिशित पत्र भी काफी वायरल हुआ. वैसे यह मामले केवल हाल ही के है जबकि राज्य में ऐसे अधिकारियों की संख्या दर्जनों में है जो पिछले लंबे समय से सेवानिवृत होने के बाद भी सरकारी सिस्टम का हिस्सा बने हुए हैं.
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